गीली मिट्टी से साकार होती रचनात्मकता

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इन दिनों अमरीका में रहने वाली, भारतीय मूल की विज़ुअल आर्टिस्ट अनंदिता दत्ता की दिलचस्प प्रदर्शनी दिल्ली की लेटीट्यूड 28 आर्ट गैलरी में चल रही है.

'एवरीथिंग एंड्स एंड एवरीथिंग मैटर्स' नाम की यह प्रदर्शनी बेहद अनूठी है.

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अनंदिता की प्रदर्शनी स्कल्पचर, इंस्टॉलेशन और प्रदर्शनी का मिला जुला रूप है. जिसमें कलाकार अपनी कलाकृति को प्रदर्शनी के दौरान ही साकार रूप देता है.

अनंदिता गीली मिटटी के प्रयोग से रचनात्मकता को साकार रूप देती हैं.

कलाकृति का हिस्सा

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वह कहती हैं, "हम मिट्टी से जन्मे हैं और मिट्टी में ही मिल जाएंगे. विभिन्न भौगोलिक स्थितियों की मिट्टी का भाव भी अलग होता है. अपनी बनाई कलाकृति को भावनात्मक रूप से मैं बार-बार जीती हूं."

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"हर कलाकृति को बनाने में बहुत वक़्त लगता है और पूरा होने पर कलाकृति की तस्वीर खींचने के बाद कुछ मिनटों में उसे नष्ट कर दिया जाता है. इसका तात्पर्य है दुनिया में हर चीज नश्वर है परंतु महत्वपूर्ण भी है."

इस प्रदर्शनी में फोटोग्राफ्स, वीडियो इंस्टॉलेशन व स्कल्पचर के ज़रिए अनंदिता अपनी बात कहने की कोशिश कर रही हैं.

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वह कहती हैं, " मैं ज़िंदगी से प्यार करती हूं और मृत्यु का विचार मुझे दुख देता है. यही कारण है कि इस काम के ज़रिए मैं इस द्वंद्व को दिखाने की कोशिश करती हूं. मैं जब भी इस दुविधा में होती हूं, तब अपने काम के ज़रिए अपनी मनस्थिति को प्रदर्शित करती हूं. कई कलाकार मिट्टी का प्रयोग पर्यावरण का संदेश देने के लिए करते हैं, परंतु मेरा कारण निजी है."

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फ़्रांस में बनाए गए एक इंस्टॉलेशन 'लिमिटेशन आई' में अनंदिता खुद कृति का हिस्सा हैं. एक फ्रूट क्रेट में सिर डालकर वह दीवार के सहारे खड़ी थीं. उनके आसपास गीली मिटटी लगाई गई जिसमें उन्होंने हाथों से आकृतियां उभारीं. इसके पीछे मंशा कारावास की घुटन दिखाने की थी.

बंगाल, छत्तीसगढ़ की मिट्टी

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अपनी कलाकृति का हिस्सा होना कैसा लगता है?

अनंदिता कहती हैं, "मिट्टी मुझे पूरी तरह बदल देती है, मैं बाहरी दुनिया से बिलकुल कट जाती हूं. नतीज़तन इस माध्यम के ज़रिए कई भावनाओं को व्यक्त करना आसान होता है."

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अपनी कलाकृतियों को बनाने के लिए दत्ता ने एक ख़ास तरह की लाल मिट्टी का प्रयोग किया है, जो बंगाल और छत्तीसगढ़ से मंगाई गई है. कई कलाकृतियों में परफॉर्मिंग आर्टिस्ट व आम जीवन में काम आने वाली वस्तुओं के माध्यम से भी कलाकार अपनी बात कहने की कोशिश करती हैं.

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वह कहती हैं, "मैंने मिट्टी को माध्यम के रूप में इसलिए चुना क्योंकि इसका अपना चरित्र होता है, गीली मिट्टी को जिस तरह चाहो ढाल लो. मुझे लगा अपने मनोभावों को व्यक्त करने के लिए इससे अच्छा माध्यम कुछ हो ही नहीं सकता."

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"एवरीथिंग एंड्स एंड एवरीथिंग मैटर्स" को 15 जून तक लाडो सराय स्थित 'लेटीट्यूड 28' आर्ट गैलरी में देखा जा सकता है.

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