स्टैंड अप कॉमेडी के 'हिंदी' सितारे

  • 12 जून 2015

जॉनी लीवर, राजू श्रीवास्तव और सुनील पाल अब लेजेंड हो चुके हैं और कपिल शर्मा बॉलीवुड में व्यस्त हैं ऐसे में नए हिंदी स्टैंड अप कॉमेडियन्ज़ का भाग्य बदल रहा है.

इन युवाओं में से कोई रेडियो में काम करता है तो कोई विज्ञापन लिखता है कोई इंजीनियर है तो कोई समलैंगिको लिए काम कर रहा है. लेकिन इनके कॉमेडी शोज़ का काम का इनके प्रोफ़ेशन पर भारी है.

तो क्या वाकई में हिंदी स्टैंड अप कॉमेडी में इतना स्कोप है कि इसे फ़ुल टाइम करियर बनाया जा सके ?

ज़ाकिर ख़ान

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बीते साल तक नामी गिरामी एफ़एम रेडियो चैनलों के लिए कार्यक्रम बनाने वाले ज़ाकिर ख़ान ने रेडियो से किनारा कर लिया है क्योंकि कॉमेडी से आनेवाले पैसे से उनकी गाड़ी, घर की किश्तों के अलावा भी बहुत कुछ आ जाता है.

ज़ाकिर कहते हैं, "साल 2010 में जब मैंने पहला कॉमेडी शो जीता था तब इसे फ़ुल टाइम करियर बनाना मुश्किल लगता था लेकिन आज हिंदी कॉमेडी पसंद करने वाले दर्शक इतने हैं कि मुझे किसी और काम के लिए फ़ुर्सत ही नहीं है."

भारत के टॉप 10 स्टैंड अप कलाकारों में गिने जाने वाले ज़ाकिर कहते हैं, "पहले हिंदी में जॉनी लीवर और राजू श्रीवास्तव जैसे खिलाड़ी थे जिनके आगे नए लोगों को मौका मिलना मुश्किल था लेकिन अब नहीं"

बेस्ट वन लाइनर - महिलाओं के कपड़ों की दुकानों में चेंजिंग रूम के बाहर कुछ मनोरंजन का सामान रखना चाहिए, उन बेचारे पुरुषों के लिए जिनकी बीबीयां अंदर कपड़े ट्राय कर-कर देख रही हैं. मसलन बैट बॉल. ऐसा हुआ तो आदमी कहेंगे डार्लिग दो ड्रेस और ट्राय करो मैं बैटिंग ले कर आया.

दीप छाबड़िया

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22 साल के इस युवा कॉमेडियन के घरवालों ने आजतक उसका शो देखा नहीं है क्योंकि वो जानता है कि उसके मम्मी पापा इस अडल्ट ह्यूमर को सह नहीं पाएंगे.

राहुल बताते हैं कि फ़िलहाल वो कमाई के लिए तो एक विज्ञापन एजेंसी में बतौर कॉपीराइटर काम कर रहे हैं. वो कहते हैं, "कॉमेडी का सीन बहुत बड़ा हो रहा है और मुझे मौका मिलता है ऐसे शो में एंकर बनने का तो मैं क्यों न बनूं ?"

वो आगे कहते हैं, "अब सोशल नेटवर्क के साथ जगह जगह क्लब खुलने से मौके बढ़े हैं और ज़्यादातर पुराने कॉमेडियन फ़िल्मों या टेलिविज़न पर फ़ोकस कर रहे हैं, ऐसे में नए लोगों के पास मौका ही मौका है."

बेस्ट वन लाइनर - किसी प्लान में सबसे पहले 'हां चलो' कहने वाला दोस्त ही सबसे पहले नहीं जाने की गोली देता है!

वासु प्रिमलानी

6 साल से कॉमेडी कर रही वासु प्रिमलानी खुल के स्वीकार करती हैं कि वो समलैंगिक हैं लेकिन वो जानती हैं कि भारत में समलैंगिक लोगों को उतनी आत्मीयता नहीं मिलती.

वासु कहती हैं, "स्टैंड अप कॉमेडी हॉलीवुड का चलन है और भारत में तो सिर्फ़ कवि ही कॉमेडी करते थे पर अब कपिल जैसे लोगों ने कॉमेडी के लिए नए दरवाज़े खोले हैं."

वासु ने बताया कि उनकी कॉमेडी स्किल्स के चलते अब उन्हें न सिर्फ़ टीवी के निर्माता निर्देशक कॉन्सेप्ट लिखने के लिए अप्रोच कर रहे हैं बल्कि पर्यावरण संरक्षण के लिए काम करने के लिए पैसे जुटाने में भी उन्हें आसानी होती है.

बेस्ट वन लाइनर - दिल्ली और मुंबई के लड़कों में एक फ़र्क है. लड़कियों को देख कर मुंबई के लड़को का मुंह खुलता है बात करने के लिए. दिल्ली के लड़को का मुंह लड़कियों को देख कर ही खुल जाता है और खुला ही रहता है.

कमाई

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वासु, ज़ाकिर या इन जैसे दूसरे कॉमेडियन आज की तारीख में इतना व्यस्त हैं कि वो हफ़्ते में दो दिन मुंबई में हैं तो तीन दिन दिल्ली, उड़ीसा में.

आने-जाने के खर्च के अलावा 5 मिनट के परफ़ॉर्मेंस के लिए 20 से 30 हज़ार रुपए तक मिलते हैं.

सफल कॉमेडियन बनने के लिए इन्हें अपना सामान्य जनरल नॉलेज बनाए रखनी पड़ती है क्योंकि लोगों को हंसाने के लिए आपको नए ट्रेंड और ख़बरों से अपडेट रहने की ज़रूरत पड़ती है.

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