ऑनलाइन डेटिंग से बढ़ते 'साइबर अपराध'

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भारत मे साइबर क्राइम नई बात नहीं है, इंटरनेट के तेजी से हो रहे प्रसार के साथ ही साइबर अपराध के आंकड़े आसमान छू रहे हैं.

बैंकिंग, इंफ़ॉर्मेशन और शेयर मार्केट को प्रभावित करने के बाद साइबर अपराधी इन दिनों युवाओ में मशहूर हो रही ऑनलाइन डेटिंग ऐप्स में सक्रिय हो रहे हैं.

साइबर क्राइम ब्रांच के मुताबिक पिछले कुछ वर्षो मे इन अपराधों में जमकर बढ़ोतरी हुई है और निशाने पर अक्सर टीन एजर्स रहते हैं.

कैसे ऑनलाइन डेटिंग वेबसाइट्स के जरिए भारतीय युवा बन रहे हैं अपराधियों के लिए आसान लक्ष्य- नज़र डाली बीबीसी हिंदी ने.

आकर्षण

ऑनलाइन डेटिंग साइट्स जैसे टिंडर, मीट पीपल, त्वू जैसी साइट्स और मोबाइल ऐप्स हैं जहां लोग अपनी प्रोफ़ाइल बनाकर अन्य यूज़र्स के साथ चैटिंग कर सकते हैं वो भी बिना कोई ज्यादा जानकारी दिए.

अनजान लोगों से अनजान बन कर बात करने के इसी 'थ्रिल' के चलते युवा इन डेटिंग साइट्स की तरफ आकर्षित होते हैं.

मनोवैज्ञानिक डॉ. किरण शांडिल्य ने बताया, "इन डेटिंग ऐप्स की तरफ आकर्षित होने वाले युवा अधिकतर अकेलेपन के शिकार होते हैं. आत्मविश्वास की कमी के चलते वो वास्तविक जीवन मे दोस्त बनाने से बेहतर ऐसे ऐप्स को ज़रिया बना लेते हैं."

शिकार

मुंबई साइबर क्राइम सेल के डीसीपी धनंजय कुलकर्णी ने बीबीसी को बताया, "साल 2013 से अगर तुलना करें तो साइबर क्राइम 5 गुना बढ़ा है और इसके बढ़ने की भी गुंजाइश है."

साइबर क्राइम का शिकार कोई भी हो सकता है क्योंकि सुरक्षा के कमज़ोर उपायों के चलते मोबाइल के एक क्लिक से साझा हो रही आपकी निजी जानकारी जैसे नाम/नंबर/तस्वीरों को आसानी से कोई भी देख सकता है.

मुंबई की 16 वर्षीया एक छात्रा ने नाम ना बताने की शर्त पर बताया, "6 महीने पहले मेरी अपनी तस्वीर एक सोशल नेटवर्किंग साइट पर ग़लत तरीके से इस्तेमाल हो रही थी. साइबर सेल में शिकायत दर्ज करने पर ही वो तस्वीर वहां से हटी."

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सिर्फ़ महिलाएं या लड़कियां ही इसका शिकार हो ऐसा नहीं है.

मुंबई के 17 वर्षीय एक युवक ने अपने साथ हुई घटना को साझा करते हुए बताया, "मैं एक डेटिंग मोबाइल ऐप के ज़रिए एक युवती से बात किया करता था जो अपने आप को कॉलेज की छात्रा बताती थीं, 6 महीने तक बात करने के बाद जब वे मिले तब उन्हें पता चला कि वो एक लड़की नही बल्कि 45 वर्षीय पुरुष हैं जो मुझे ब्लैकमेल करने लगा था."

क्या करें

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अगर मुंबई साइबर सेल के आंकड़ो पर नज़र डालें तो इन साइट्स के ज़रिए बीते दो महीनों में अभद्र भाषा के प्रयोग के 40 मामले, ब्लैकमेंलिंग के 11 मामले दर्ज हुए हैं. लेकिन देशभर में यह आंकड़ा हज़ार से ज्यादा है.

और विशेषज्ञों के मुताबिक ये वो मामले हैं जो दर्ज हुए. अधिकतर लोग डर, शर्म या अज्ञानता के चलते शिकायत दर्ज ही नहीं करवाते.

डीसीपी कुलकर्णी ने इस पर कहा, "पुलिस जनता से चाहती है कि वो एेसी घटना की रिपोर्ट दर्ज कराए और जांच मे हमारा साथ दें, यही एक तरीका है जिससे हम साइबर क्राइम्स पर लगाम लगा सकते हैं."

लेकिन विशेषज्ञ हों या पुलिस सभी ने युवाओं के साथ साथ अभिभावकों को भी सचेत रहने को कहा है ताकि वो अपने बच्चों की ऑनलाइन गतिविधियों का ध्यान रखें.

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