कॉस्मेटिक बेचते-बेचते बन गए सर्किट

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माया नगरी में कहावत है कि यहां टैलेंट के साथ-साथ क़िस्मत का ज़ोरदार होना भी ज़रूरी है क्योंकि किसकी क़िस्मत कब फिर जाए कोई कह नहीं सकता.

अभिनेता अरशद वारसी भी इस बात में यक़ीन रखते हैं क्योंकि फ़िल्मों में आने से पहले 'मुन्नाभाई का सर्किट' सोच भी नहीं सकता था कि वो एक दिन फ़िल्मों में इतना बड़ा नाम बन जाएगा.

आगामी फ़िल्म 'गुड्डू रंगीला' में रंगीला का किरदार निभा रहे अरशद वारसी ने बीबीसी से ख़ास बातचीत में अपनी निजी ज़िंदग़ी से जुड़ी कुछ दिलचस्प बातें साझा की.

बुरे दिन

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14 साल की उम्र में ही अरशद वारसी के माता-पिता का देहांत हो गया, जिसके बाद अरशद का जीवन बेहद कठिनाइयों में बीता.

अरशद बताते हैं, "आर्थिक परेशानियों के चलते 17 साल की उम्र में ही मैंने महिलाओ के कॉस्मेटिक सामान को मुंबई के एक होटल में सेल्समैन के रूप में बेचने का काम करना शुरू किया."

वो कहते हैं, "उसके बाद मैंने एक फोटो लैब में फोटो डेवेलप करने का काम किया और आज भी वहां से गुज़रता हूँ तो सब कुछ याद आ जाता हैं."

अरशद आज भी अपने पुराने दोस्तों से मिलते हैं क्यूंकि वो मानते हैं कि इंसान को अपने बुरे दिन कभी नहीं भूलने चाहिए.

अमिताभ और जया की मेहरबानी

डांस में रुचि होने के कारण अरशद वारसी कोरियोग्राफर बन गए लेकिन अरशद वारसी अपनी सफ़लता का श्रेय बच्चन परिवार को देते हैं.

आदर के साथ बात करते हुए अरशद ने बताया, "अमिताभ और जया जी की मेहरबानी की वजह से ही मुझे फ़िल्मों में आकर पैसे कमाने का एक ज़रिया मिला और जो अब तक क़ायम है."

अरशद साल 1993 तक फ़िल्मों में कोरियोग्राफ़ी का काम कर रहे थे लेकिन साल 1993 में जब 'रूप की रानी चोरों का राजा' में वो ख़ुद भी नज़र आए तब जया बच्चन ने उन्हें अपनी कंपनी की फ़िल्म में रोल ऑफ़र किया.

एबीसीएल की पहली हिंदी फ़िल्म 'तेरे मेरे सपने' में जया बच्चन ने उन्हें बतौर लीड मौका दिया.

टाइपकास्ट

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अरशद को उनकी कॉमेडी के लिए बहुत सरहाना मिलती आई है लेकिन उन्हें लगातार कॉमेडी फ़िल्में करना पसंद नहीं हैं.

वो कहते हैं, "इस इंडस्ट्री में एक एक्टर का टाइपकास्ट होना आम बात है. यहाँ सबको एक लेबल मिल जाता है और मुझे भी कॉमेडी करते रहने का स्टैम्प लगा दिया गया था लेकिन मेरी क़िस्मत अच्छी हैं की मुझे कॉमेडी से हटकर भी कुछ अलग किरदार करने का मौका मिला."

आगामी फ़िल्म 'गुड्डू रंगीला' में रंगीला का किरदार निभा रहे अरशद वारसी ने बताया इस फ़िल्म में वो कॉमेडी नहीं सीरियस किरदार में नज़र आएंगे.

मुन्ना भाई 3

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'मुन्नाभाई एम.बी.बी.एस' और 'लगे रहो मुन्ना भाई' की कामयाबी के बाद अरशद को इंतज़ार हैं मुन्ना भाई 3 का.

अरशद कहते हैं, "निर्माताओं को सिर्फ संजय दत्त के जेल से बाहर आने और शूटिंग शुरू करने का इंतजार है. मुन्ना भाई 3 ज़रूर बनेगी इसमें कोई संदेह नहीं है."

अरशद ने माना की अभी कहानी पर थोड़ा काम चल रहा है लेकिन ये अभी तय नहीं है कि इसका निर्देशन सुभाष कपूर करेंगे या राज कुमार हिरानी क्योंकि सुभाष अपनी फ़िल्म में व्यस्त हैं और राज कुमार हिरानी संजय दत्त के बायोपिक में.

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