आरडी बर्मन: गिलास, स्कूल बेंच से भी संगीत रचने का हुनर

राहुल देव बर्मन यानी 'आरडी' अपने संगीत में जादू रचते थे. बारिश की टप-टप या गाड़ी का हॉर्न सबमें संगीत खोज लेते थे.

फ़ि‍ल्‍म ‘जागीर’ के गाने ‘सबको सलाम करते हैं’ के शुरूआती बीस सेंकेंड में किसी भी वाद्य यंत्र का प्रयोग नहीं क‍िया गया है बल्‍क‍ि मुंह से आवाज़ न‍िकाली गई है.

आज के दौर के ‘बीट बॉक्‍सिंग’ कहे जानी वाली इस कला का प्रयोग तीस साल पहले ही आरडी ने क‍िया था.

संगीत के जीनियस बर्मन दा के 76वें जन्मदिवस पर जानिए ऐसी ही कुछ अजब ग़जब आवाज़ों के धुनों में प्रयोग के बारे में.

<span >गिलास

गिलासों के टकराने की आवाज़ सुनाई देने पर बरबस ही फ‍िल्‍म ‘यादों की बारात’ का ‘चुरा लिया है तुमने’ याद आ जाता है.

सैंडपेपर

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फ़िल्‍म ‘ज़माने को दिखाना है’ का गाना ‘होगा तुमसे प्‍यारा कौन’ में रेलगाड़ी की आवाज लाने के ल‍िए आरडी ने सैंडपेपर का इस्‍तेमाल क‍िया.

सैंड पेपर को आपस में रगड़कर आप भी देखें इसमें से वाकई ट्रेन की आवाज़ न‍िकलेगी

स्‍कूल बेंच

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गुलज़ार की फ़ि‍ल्‍म ‘क‍िताब’ के गाने ‘मास्‍टरजी की चिट्ठी’ में स्‍कूल बेंच का प्रयोग क‍िया.

दरअसल इस गीत के फ़िल्मांकन में एक कक्षा में बच्‍चों को गाता हुए दिखाया जाना था और बच्‍चे गाते वक्‍त स्‍कूल बेंच को ही पीटते हैं.

इस बात का ध्‍यान रखते हुए आरडी ने अपने ऑर्केस्‍ट्रा में स्‍कूल बेंच को बजाया.

आधी भरी बोतल

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‘शोले’ फ‍िल्‍म का गाना ‘महबूबा-महबूबा’ और देवानंद की फ‍िल्‍म ‘वारंट’ का गाना ‘रूक जाना ओ जाना’ में उन्‍होंने आधी भरी बोतल के सिरे पर फूंक कर निकाली आवाज़ का प्रयोग क‍िया है.

गाने की शुरुआत में यह आवाज़ सुनने को मि‍लती है.

ताल‍ियां

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‘ये वादा रहा’ फ‍िल्‍म का गाना ‘तू, तू है वहीं, दिल ने जिसे’ में आरडी ने ताल‍ियों का प्रयोग क‍िया था.

इस गाने में तालियों को क‍िसी वाद्य यंत्र की तरह ही इस्‍तेमाल क‍िया गया है.

स्‍कूल की घंटी

अम‍िताभ बच्‍चन अभ‍िनीत फ‍िल्‍म ‘महान’ का गाना ‘ये दिन तो आता है एक दिन जवानी में’ के एक अंतरे के बाद एक स्‍कूल बेल से निकली आवाज़ का प्रयोग क‍िया गया.

इसके लिए आरडी ने भरी पानी की एक बाल्‍टी ली और स्‍कूल बेल को बजाते हुए उस भरी पानी की बाल्‍टी में डाला. इसके बाद जो कंपन के साथ आवाज निकली वो इस गाने में साफ़ सुनी जा सकती है.

ड्रम स्‍ट‍िक से बजा तबला

‘1942 ए लव स्‍टोरी’ का गाना ‘प्‍यार हुआ चुपके से’ में आरडी ने तबले को ड्रम स्‍ट‍िक से बजाया था.

इसका कोई ख़ास कारण जब गीतकार जावेद अख़्तर को समझ नहीं आया तो उन्होनें इसे महान जीनीयस की एक नई ख़ोज मान लिया था, इस बात का ज़िक्र जावेद साहब एक डॉक्यूमेंट्री में कर चुके हैं.

पीठ का बाजा

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देवानंद की फि‍ल्‍म ‘डार्ल‍िंग- डार्ल‍िंग’ के गाने ‘रात गई बात गई’ के तीसरे मि‍नट में एक खास थाप सुनाई देती है.

दरअसल वह आवाज़ आरडी ने अपने असिस्‍टेंट की पीठ को बजाकर निकाली थी.

उन्‍होंने अपने सहायक को टेबिल पर ब‍िना शर्ट के पेट के बल ल‍िटाया और फ‍िर उसके पीठ को बजाया औऱ ज़ाहिर बात थी की इस प्रयोग पर भी किसी ने सवाल नहीं पूछा था,सहायक ने भी नहीं.

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