ऊधम सिंह जिन्होंने की थी ड्वायर की हत्या

ऊधम सिंह इमेज कॉपीरइट chamanlal JNU facebook page

'हमें ऊधम सिंह के बारे में जानकर बहुत अच्छा लगा. पंजाब के बाहर बहुत ही कम लोग ऊधम सिंह के बारे में जानते हैं.'

( ऊधम सिंह पर वीडियो रिपोर्ट देखिए)

"वो जलियांवाला बाग में मौजूद थे जब वहाँ अंधाधुंध गोलियां चलाई गई थीं. तब माइकल ओ'ड्वायर पंजाब के गवर्नर थे. तो उनकी कहानी में हमें ये बड़ा दिलचस्प लगा."

यह कहना है डांस एंड म्यूज़िक बैंड 'स्का वेंजर्स' के निखिल वासुदेवन ने. उन्होंने ऊधम सिंह की 75वीं पुण्यतिथि के मौके पर एक वीडियो बनाया है.

ऊधम सिंह को 31 जुलाई 1940 को गवर्नर माइकल ओ'ड्वायर की हत्या के आरोप में फांसी दे दी गई थी.

वे किताब के अंदर बंदूक छुपाकर लंदन के कॉक्सटन हॉल में दाखिल हुए थे और उन्होंने ओ'ड्वायर की गोली मारकर हत्या कर दी थी.

जानिए ऊधम सिंह के बारे में कुछ ख़ास बातें.

1. असली नाम

ऊधम सिंह का असली नाम शेर सिंह था. साल 1933 में उन्होंने पासपोर्ट बनाने के लिए 'ऊधम सिंह' नाम अपनाया.

2. माता-पिता का देहांत

इमेज कॉपीरइट chamanlal JNU facebook page

तीन साल की उम्र में ही ऊधम सिंह की मां का देहांत हो गया था. कुछ सालों बाद उनके पिता का भी देहांत हो गया. उनके बड़े भाई का नाम साधु सिंह था.

3. मेहनती छात्र

ऊधम सिंह काफ़ी मेहनती थे और साल 1919 में सेंट्रल यतीमख़ाना, अमृतसर में रहकर उन्होंने मैट्रिक की परीक्षा पास की.

4. पाँच साल की जेल

इमेज कॉपीरइट chamanlal JNU facebook page

वे 'गदर' पार्टी से जुड़े और उस वज़ह से बाद में उन्हें 5 साल की जेल की सज़ा हुई थी.

जेल से निकलने के बाद उन्होंने अपना नाम बदला और पासपोर्ट बनाकर विदेश चले गए.

5. भगत सिंह

लाहौर जेल में ऊधम सिंह की मुलाकात भगत सिंह से हुई.

इमेज कॉपीरइट Getty

ऊधम सिंह की लिखी चिट्ठियों में इसका ज़िक्र भी किया गया है. ऊधम सिंह ने पत्र में लिखा था, 'भगत सिंह मेरा प्यारा दोस्त है.'

6. दूसरा नाम

जलियांवाला बाग काडं के समय पंजाब के गवर्नर रहे माइकल ओ'ड्वायर की हत्या के बाद लंदन में ऊधम सिंह पर मुकदमा चला.

इमेज कॉपीरइट chamanlal JNU facebook page

उन्होंने जेल से जितने भी पत्र लिखे वो सब 'मोहम्मद सिंह आज़ाद' के नाम से थे.

7. धर्म

ऊधम सिंह किसी भी धर्म में विश्वास नहीं रखते थे.

लंदन की जेल में ऊधम सिंह ने अपने अंतिम वक़्त में किसी भी तरह की धार्मिक किताब न ही मांगी और न ही पढ़ी.

8. वारिस शाह की 'हीर'

लंदन की जेल में अपने अंतिम दिनों में ऊधम सिंह ने अपने दोस्तों को एक ख़त लिखकर वारिस शाह की 'हीर' लाने को कहा था.

इमेज कॉपीरइट chetan anand

ऊधम सिंह अदालत में वारिस शाह की 'हीर' पर हाथ रखकर शपथ लेना चाहते थे.

9. ग्लोबट्रौटर

ऊधम सिंह साल 1933 में पासपोर्ट बनने के बाद सबसे ज़्यादा घूमे.

इमेज कॉपीरइट ska vengers

वे अफ़्रीका के अलावा सोवियत संघ समेत कई यूरोपीय देश गए.

10. दूसरे शख़्स

देश के बाहर फांसी पाने वाले ऊधम सिंह दूसरे शख़्स थे.

उनसे पहले मदन लाल ढींगरा को कर्ज़न वाइली की हत्या के लिए साल 1909 में फांसी दी गई थी.

(ऊधम सिंह और भगत सिंह पर शोध करने वाले और जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय के पूर्व प्रोफ़ेसर चमन लाल से बातचीत पर आधारित)

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)

संबंधित समाचार