जब बॉलीवुड बोला 'हैप्पी इंडिपेंडेंस डे'

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भारतवासी इस वर्ष अपनी आज़ादी की 68वी वर्षगांठ बना रहे हैं और इसका उल्लास सिर्फ़ देश की राजधानी दिल्ली में ही नहीं बल्कि मायानगरी मुंबई में भी दिख रहा है.

आजादी को लेकर कई बॉलीवुड सितारों ने देशवासियों को शुभकामनाएं दी औऱ साथ ही 'सैल्यूट सेल्फ़ी' खींच कर सोशल मीडिया पर पोस्ट की.

क्या है सैल्यूट सेल्फ़ी ?

आज़ादी के मायने हर देश के हर नागरिक के लिए अलग अलग होते हैं ऐसे में बॉलीवुड सितारों के लिए क्या है 'आज़ादी' ये बीबीसी ने जानने की कोशिश की.

सलमान ख़ान

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बॉलीवुड के 'बजरंगी भाईजान' के लिए आज़ादी है कि लोगों को जीने का हक़ हो, स्वतंत्र रहने का हक़ हो और अपनी बात कहने की आज़ादी मिले. वैसे बात कहने की आज़ादी पर सलमान का ज़ोर था क्योंकि हाल ही में उन्हें याक़ूब मेमन पर ट्वीट करने पर माफ़ी मांगनी पड़ी थी.

कटरीना कैफ़

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फ़ैंटम फ़िल्म में एक जासूस का किरदार निभा रही कटरीना आज़ादी के मायने मानती है 'बोलने की आज़ादी' देने को. कटरीना का मानना है कि भारत आज़ाद है लेकिन यहां खुल कर आप अपनी बात नहीं कह सकते और साथ ही लोगों में समान भाव भी नहीं है.

अमिताभ बच्चन

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सदी के महानायक अमिताभ इस स्वतंत्रता दिवस काफ़ी सक्रिय नज़र आए, उन्होनें सैल्यूट सेल्फ़ी डालने के साथ महाराष्ट्र में बाघ सरंक्षण के लिए एम्बैसेडर बनना भी स्वीकार किया, वो कहते हैं,"आज़ादी है कि हर आदमी को उसका हक़ मिले, आपस में भाईचारा हो और हर किसी को सुख़ शांति से जीवन जीने को मिले."

सुष्मिता सेन

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बहुत समय बाद मीडिया के सामने आई पूर्व मिस यूनिवर्स और अभिनेत्री सुष्मिता सेन का मानना है, "मेरे लिए आज़ादी पढ़ा लिखा होना है, क्योंकि मैं ख़ुद बारहवीं तक पढ़ी हूं और पढ़ाई के मायने जानती हूं, इसलिए मेरी बेटी रेने पर भी पढ़ाई के लिए ज़ोर देती हूं."

कपिल शर्मा

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कॉमेडी नाइट्स विद कपिल से मशहूर हुए कपिल अब हीरो बन गए हैं, बॉलीवुड के इस नए हीरो के मुताबिक, "कपिल शर्मा सबको गंदगी से आज़ादी दिलाना चाहते हैं और अगर देश साफ़ हो जाता है तो वो इसे असली आज़ादी मानेंगे, कपिल प्रधानमंत्री के स्वच्छ भारत अभियान के सफ़ल होने की भी कामना करते हैं."

सैफ़ अली ख़ान

सैफ़ के लिए फ़िलहाल तो अपनी फ़िल्म फ़ैंटम को पाकिस्तान में बैन होने से रोकना ही सबसे बड़ी अाज़ादी होगी लेकिन सैफ़ के शब्दों में, "आज़ादी है जब आपको ख़ुद व्यक्त करने, बोलने की आज़ादी हो. अगर आपकी सोच पर ही रोक लग जाए तो फिर आज़ादी के क्या मायने."

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