भारतीय फ़िल्में जो पाकिस्तान में बैन हो गईं

फ़ैंटम

मुंबई हमलों के इर्द गिर्द सैफ़ अली ख़ान और कटरीना कैफ़ की फ़िल्म 'फ़ैंटम' का एक डायलॉग है, “ये लोग कितना भी अटैक करें, हम लोग तो कुछ भी नहीं करते सर, बस क्रिकेट खेलना बंद कर देते हैं.”

और स्क्रीन पर दिखते हैं हाफ़िज़ सईद, डेविड कोलमैन हेडली नाम के किरदार.

हाफ़िज सईद ने तो ट्रेलर देखते ही ट्वीट कर फ़िल्म पर हमला बोल दिया था. फ़िल्म 'फैंटम' पर पाकिस्तान में पाबंदी लग चुकी है.

वैसे जिसने भी इसका ट्रेलर देखा है, वो अंदाज़ा लगा सकता था कि पाकिस्तान में इसका रिलीज़ होना ज़रा मुश्किल था.

वैसे पिछले महीने की ही बात है जब भारत और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री रूस के उफ़ा में मिले, हाथ मिलाए, दोनों देशों की ओर से साझा बयान आया.

उफ़ा के आसपास के दिनों के ख़ुशनुमा माहौल के उन्हीं दिनों में रिलीज़ हुई 'बजरंगी भाईजान'.

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निर्देशक कबीर ख़ान की इस फ़िल्म में पवन कुमार चतुर्वेदी उर्फ़ बजरंगी पाकिस्तानी सेंसर बोर्ड को ख़ूब पसंद आए.

बोर्ड ने कहा इसमें पाकिस्तानियों को पॉज़िटिव तरीक़े से दिखाया गया है.

लगभग एक महीने बाद भारत और पाकिस्तान के अधिकारी फिर मिलने वाले थे, पर पहले ही तल्ख़ी इतनी बढ़ गई कि मुलाक़ात होने से पहले ही मामला रफ़ा दफ़ा हो गया.

इसी माहौल में रिलीज़ हो रही है फ़िल्म 'फ़ैंटम'. निर्देशक वही हैं कबीर ख़ान - बजरंगी भाईजान वाले.

1965 की जंग के बाद पाकिस्तान में हिंदुस्तानी फ़िल्मों पर बैन लगाया गया था. और वो लंबा चला इतना कि 2006 के आस पास जाकर ख़त्म हुआ.

लेकिन उसके बाद भी गाहे-बगाहे पाकिस्तान में हिंदुस्तानी फिल्मों पर सेंसर की कैंची चलती रहती है. कभी मज़हब को लेकर विवाद, कभी कूटनीति तो कभी ‘बोल्ड कंटेंट’. कुछ फ़िल्मों को ऐतराज़ के कारण देर से रिलीज़ किया गया.

फ़िल्में जो बैन हुईं-

बैंगिस्तान

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'बैंगिस्तान' जुलाई 2015 में रिलीज़ हुई पर पाकिस्तान में नहीं.

कहा गया फ़िल्म इस्लाम और पाकिस्तान विरोधी है.

फ़िल्म में काम करने वाले रितेश देशमुख ने पाकिस्तान के संबंधित मंत्रालय से गुज़ारिश भी की थी कि वो फ़िल्म देखें, पर नतीजा सिफ़र रहा.

एक था टाइगर

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'बजरंगी भाईजान' के ज़रिए सलमान भले ही लोगों का दिल जीत चुके हों, लेकिन 'एक था टाइगर' में टाइगर बनकर वो पाकिस्तानी सेंसर बोर्ड को नाराज़ कर चुके हैं.

रॉ एजेंट वाली ये फ़िल्म वहां बैन कर दी गई थी.

एजेंट विनोद

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सैफ़ अली खान 'एजेंट विनोद' बनकर पहले भी पाकिस्तानी पाबंदी की मार झेल चुके हैं.

फिल्म में पाकिस्तान और आईएसआई का नाम आने से 'एजेंट विनोद' रिलीज़ से पहले बैन कर दी गई थी.

भाग मिल्खा भाग

फ्लाइंग सिख मिल्खा सिंह की संघर्ष की कहानी कहती इस फ़िल्म को भारत में बहुत तारीफ़ मिली.

लेकिन फ़िल्म में एक जगह पाकिस्तान का ज़िक्र जिन तरह से किया गया, वो पाकिस्तानी सेंसर बोर्ड को रास नहीं आया.

जब फ़िल्म में मिल्खा सिंह को पाकिस्तान जाने के लिए कहा जाता है तो वे जवाब देते हैं, मैं पाकिस्तान नहीं जाऊँगा.

इशारा बंटवारे में हुए क़त्ले आम की ओर था.

द डर्टी पिक्चर

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विद्या बालन की ए सर्टिफ़िकेट वाली 'द डर्टी पिक्चर' पाकिस्तान सेंसर बोर्ड को कुछ बहुत डर्टी साबित लगी.

बोल्ड कंटेंट का हवाला देते हुए फ़िल्म को पाकिस्तान में रिलीज़ करने की अनुमति नहीं मिली.

तेरे बिन लादेन

वैसे तो ये व्यंग्य वाली फ़िल्म थी, पर ओसामा बिन लादेन और पाकिस्तान के ज़िक्र का मतलब था फ़िल्म का बैन होना.

फिर चाहे इसमें हीरो पाकिस्तान के ही अली फ़ज़ल थे.

रांझणा

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कहने को तो ये एक प्रेम कहानी है, इसमें भारत-पाकिस्तान का कोई ज़िक्र नहीं, न ही कोई बोल्ड कंटेंट, पर फिर भी बैन हुई.

दरअसल इसमें सोनम एक मुस्लिम लड़की है जिसे हिंदू लड़के से प्यार है.

इस पर भी बैन लगा दिया गया.

खिलाड़ी 786

786 नंबर की इस्लाम में बहुत अहमियत है, इसलिए 'खिलाड़ी 786' का ट्रेलर आते ही इस पर ऐतराज़ होने लगा.

हालांकि बाद में फिल्म के टाइटल में पाकिस्तान में बदलाव कर दिया गया था.

चेन्नई एक्सप्रेस

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किंग खान की फ़िल्म पाकिस्तान में बैन तो नहीं हुई, लेकिन इसे ईद के मौक़े पर पाकिस्तान में रिलीज़ नहीं होने दिया गया.

क्योंकि कई पाकिस्तानी फ़िल्में रिलीज़ के लिए तैयार थीं.

इसलिए इसकी टाल दी गई.

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