'राष्ट्र और राष्ट्रगान तो सभी का होता है'

  • 29 अगस्त 2015
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15 अगस्त पर हर साल विभिन्न फ़िल्म निर्माताओं और कलाकारों द्वारा मिलकर राष्ट्रगान का एक नया वर्ज़न निकालने की परंपरा चली आ रही है.

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लेकिन इस बार इस परंपरा को आगे बढ़ाते हुए राष्ट्रगान का एक ख़ास वर्ज़न सामने आया है जिसे 'किन्नर समाज' ने बनाया है.

26 वर्षीय नील सरकार और 22 वर्षीय तुषार के फ़िल्म निर्माण बैनर 'यथार्थ पिक्चर्स' के तले बने इस वीडियो को सोशल मीडिया पर वायरल होने में समय नहीं लगा, लेकिन इसे शूट करने में दो साल लग गए थे.

सवाल

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इस वीडियो को बनाने वाले सरकार नील अभी फ़िल्म निर्माण का कोर्स कर रहे हैं और उन्हें इस वीडियो को बनाने का आईडिया दो साल पहले आया था.

वो कहते हैं, "मैं कोलकाता में था और वहां मैने एक 'एलजीबीटी प्राईड परेड' देखी. मेरे मन में सवाल उठा कि आख़िर किसी को अपने जेंडर को लेकर प्राईड परेड निकालने की ज़रुरत क्यों पड़ रही है?"

नील आगे जोड़ते हैं, "इस सवाल का जवाब मुझे एलजीबीटी समाज को समझने के बाद मिला कि समाज के कुछ लोगों को बिल्कुल हाशिए पर खड़ा कर दिया गया है क्योंकि वो पुरुष महिला के बने बनाए खांचो को तोड़ रहे हैं."

कास्ट

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नील के इस आईडिया पर काम करने के लिए उनके सहपाठी तुषार तैयार हो गए लेकिन 2 साल तक उनके इस आईडिया पर काम करने के लिए कोई उन्हें मिल नहीं रहा था.

तुषार बताते हैं, "हम सड़क पर घूमते या कॉलोनियों में बच्चे के जन्म के समय आने वाले किन्नरों से मिलते उनसे आग्रह करते कि वो हमारे वीडियो में काम करें लेकिन कोई हां नहीं कहता."

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दो साल तक कास्ट की तलाश में घूमते इन दोनों युवा फ़िल्ममेकर्स को कास्ट मिली 'हमसफ़र' ट्रस्ट से और फिर मुंबई और गुजरात से आए 7 किन्नरों के साथ मिलकर एक दिन में ये वीडियो शूट हुआ.

सम्मान

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इस वीडियो में काम करने वाले किन्नरों में से चार किन्नर माधुरी, समीना, फ़िदा और पारस बीबीसी के मुंबई स्थित स्टूडियो पहुंचे.

माधुरी जो इस वीडियो में वकील बनी हैं असल ज़िंदगी में एलजीबीटी समुदाय के हितों के लिए काम भी करती हैं.

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माधुरी ने कहा,"जब हमें इस वीडियो के लिए फ़ोन आया तो हमें लगा था कि किसी कॉमेडी वीडियो के लिए हमें अप्रोच किया जा रहा है, क्योंकि आजतक फ़िल्मों में हमें मज़ाक के लिए ही इस्तेमाल किया जाता है."

वो आगे कहती हैं, "लेकिन जब सुना कि राष्ट्रगान गाने के लिए हमें बुलाया जा रहा है मन में बहुत सम्मान की भावना आई."

'हिजड़ा' गाली नहीं है

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इस वीडियो के निर्देशक नील कहते हैं कि 'भारतीय हम भी हैं' यह नाम हमने इस तिरस्कार की भावना के चलते ही रखा.

वो कहते हैं, "लोग इस कम्युनिटी के बारे में सोचते ही नहीं हैं, वो इन्हें देखना तो दूर इनके बारे में सोचना ही नहीं चाहते "

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तुषाऱ बताते हैं कि ज़िंदग़ी में पहली बार उन्हें पता चला कि 'हिजड़ा' शब्द कोई गाली या आपत्तिजनक शब्द नहीं बल्कि एक सामान्य संबोधन है.

किन्नर माधुरी इसका अर्थ समझाते हुए कहती हैं, "हिजड़ा यानि जिसके हृद्य में 'हिज' हो, यानि लचक हो, आप बताईए यह गाली कैसे हो गई?"

मज़ाक

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वीडियो में दिखाई देने वाली किन्नर फ़िदा कहती हैं, "आज ये वीडियो आया तो हम यहां इंटरव्यू दे रहे हैं वर्ना मुग़लों के जाने के बाद से किन्नरों की स्थिति बेहद ख़राब हुई है."

साल 2014 में सर्वोच्च न्यायालय द्वारा किन्नरों को तीसरे लिंग के रुप में मान्यता देने के फ़ैसले पर किन्नर माधुरी ने कहा, "अभी हमारे समाज के उत्थान में लंबी दूरी है, फ़ैसला आने में 69 साल लग गए हैं लेकिन सिर्फ़ फैसले से हालात नहीं बदलते."

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सरकार और समाज दोनों ही ओर से उदासीनता की शिकायत करते हुए किन्नर उर्मी कहती हैं, "अदालत ने हमारा वजूद मान लिया लेकिन क्या समाज हमारा वजूद मान रहा है? क्या हमें नौकरियां मिल रही हैं? भाजपा सरकार के लिए तो हमारी मांगे अभी कोई मायने नहीं रखती."

अपने साथ होने वाले भेदभाव की ओर इशारा करते हुए वीडियो में दिखाई दीं एक और किन्नर समीना ने बताया, "मैंने एक सोसाईटी में मकान लिया था लेकिन एक हफ़्ते के अंदर सोसाईटी में विरोध शुरु हो गया और रात 2 बजे मुझे सामान समेत घर से निकाल दिया गया."

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समीना इसके बाद कठोर होकर कहती हैं, ऐसे भेदभाव के बाद आप हमारे उत्थान और हमारे भीख मांगने या वेश्यावृत्ति से बाहर आने की बात करते हैं तो 'मज़ाक' ही लगता है.

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