'गणपति' का बीमा 237 करोड़ रुपए में

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गणपति उत्सव के दौरान मूर्तियों की स्थापना, प्रसाद और गीत-संगीत के साथ साथ सार्वजनिक पंडालों की सुरक्षा व्यवस्था एक अहम काम है, बल्कि बदलते दौर में मूर्तियों का बीमा भी बड़ी-बड़ी रक़म देकर करवाया जाता है.

बीबीसी ने डाली एक नज़र मुंबई के कुछ गणेश मंडलों पर और जाना किसका कितना बीमा है?

जीएसबी सेवा मंडल

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मुंबई के सबसे अमीर गणपति पंडालों में गिने जाने वाले 'जीएसबी मंडल' को हर साल सोने चांदी के चढ़ावे मिलते हैं.

237 करोड़ रुपए का बीमा करवाने वाले इस गणेश उत्सव के अध्यक्ष आरजी भट्ट ने बताया, "इस बार गणपति की मूर्ति के अंग जैसे कान, हाथ और मुकुट लगभग 70 किलो सोने के चढ़ावे से बनाए गए हैं और गणपति का आसन 470 किलो चाँदी का बना है."

वे कहते हैं, "इसके आलावा सुरक्षा और अन्य व्यवस्था में लगने वाली रक़म को मिला कर कुल 237 करोड़ का बीमा करवाया है, जिसमे 21 करोड़ सिर्फ गणपति के आभूषणों का बीमा है."

लालबाग का राजा

साल 1934 में स्थापित हुआ 'लालबाग का राजा' सबसे प्रसिद्ध सार्वजनिक गणपतियों में गिना जाता है.

'लालबाग का राजा' के बीमा की जानकारी देते हुए मंडल अध्यक्ष अशोक पवार ने बीबीसी को बताया, "हम हर साल बीमा करवाते हैं. इस बार हमने बीमे की रक़म को 50 करोड़ तक बढ़वाया है."

वो कहते हैं, "इस बीमे की रक़म में भगवान की मूर्ति के अलावा भी कई चीजें शामिल होती हैं जैसे पंडाल, गणपति के गहने और यहां आने वाले भक्तों की सुरक्षा का भी ध्यान रखा जाता है."

अशोक पवार ने आगे बताया, "इस बार दो बीमा करवाए गए हैं, एक उत्सव के लिए और एक विसर्जन के लिए. इनकी कुल रक़म 50 करोड़ है और प्रीमियम लगभग 14 लाख है."

इस गणपति के दर्शन के लिए लाखों लोग अलग-अलग जगहों से आते हैं.

इस मंदिर में लगी भक्तों की भीड़ के बीच कई बॉलीवुड के सितारे भी आते हैं. इस बार 'लालबाग के राजा' का शीश महल बॉलीवुड के मशहूर कला निर्देशक नितिन देसाई ने तैयार किया है.

अंधेरी का राजा

पिछले 50 वर्षो से मुंबई के अंधेरी इलाके में 'अंधेरी का राजा नाम' से स्थापित हो रही गणपति की इस मूर्ति का बीमा 6 करोड़ रुपए से भी ज़्यादा का है.

बीबीसी से बात करते हुए यहां के प्रवक्ता उदय सालिया ने बताया, "इस वर्ष हमने 6 करोड़ 52 लाख रुपये का बीमा करवाया है जिसमें आग लगना, भूकंप आना और भी अन्य तरह की त्रासदी शामिल है. इस बीमे का प्रीमीयम हर महीने हम एक लाख़ रुपये के तौर पर भरते हैं."

अन्य गणपति मंडलों से अलग 'अँधेरी का राजा' मंडल के गणपति लगभग 17 से 18 दिनों तक विराजमान रहते हैं.

बीमा पर जागरुकता

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आरके इंश्योरेंस एंड इन्वेस्टमेंट के बीमा सलाहकार रितेश कोचर कहते हैं, "बीमा को लेकर लोगो में काफ़ी जागरूकता बढ़ी है. अब यह अनिवार्य रूप से गणपति उत्सव का हिस्सा बन चुका है."

रितेश कहते हैं, "मंडल में मूर्ति से लेकर हर चीज़ का मूल्यांकन किया जाता है और उसके अनुरूप बीमा की रक़म तय की जाती है, गणपति मंडलों का इंश्योरेंस करने में अब बड़ी-बड़ी कंपनियां भी शामिल हो गई हैं."

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