जब देव आनंद ने डुप्लिकेट से कहा फ़िल्में दिलवाओ

डुप्लिकेट

हिंदी फ़िल्मों में एक दौर था जब किसी मशहूर हीरो की झलक उनके करियर ढलने के बाद भी ज़िंदा रहती थीं उनके डुप्लिकेट यानी हमशक्लों के ज़रिए.

डुप्लिकेट देव आनंद से बातचीत सुनिए

राजेश खन्ना, देव आनंद, शशि कपूर, अमिताभ बच्चन या कॉमेडियन महमूद जैसे दिग्गज सितारों के 'हमशक्ल' फ़िल्मों में हीरो की कॉपी करते दिख जाते थे.

26 सितंबर को देव आनंद के जन्मदिन पर हमने बात की किशोर भानूशाली से जो देव साहब के हमशक्ल हैं. उन्हीं की नकल कर वे फ़िल्मों में मशहूर हुए. दिल, करण अर्जुन और सबसे बड़ा खिलाड़ी जैसी फ़िल्मों में उनको आपने देखा होगा.

लेकिन जिन देव आनंद का नाम किशोर के नाम से हमेशा के लिए जुड़ गया, बचपन में किशोर ने उन्हीं देव आनंद का नाम तक नहीं सुना था. वह तो राजेश खन्ना के फ़ैन थे.

नहीं पता कौन हैं देव आनंद

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पुराने दिनों को याद कर किशोर बताते हैं, "जब फ़िल्म 'कटी पतंग' रिलीज़ हुई थी तब मैं पांच-छह साल का रहा होऊंगा. तब काकाजी यानी राजेश खन्ना जी का ज़माना था. उस वक़्त किसी ने मुझे कहा कि तुम्हारी शक्ल बिल्कुल देवानंद जी जैसी है. मैं जानता नहीं था कि देवानंद कौन हैं."

"फिर मैंने फ़िल्म 'ज्वेल थीफ़' और 'ये गुलिस्तां हमारा' देखी और लगा कि शक्ल तो वाकई बहुत मिलती है. उसके बाद आईने के आगे खड़ा हो गया, बटन बंद किया, एक रूमाल बांधा, गर्दन हिलाई जो आज तक हिल रही है."

किशोर बताते हैं कि करीब 10 सालों तक उन्होंने संघर्ष किया लेकिन उन्हें कोई रोल नहीं मिलता था. हार कर उन्होंने गुजरात जाकर पारिवारिक कारोबार में लगने का फ़ैसला किया. लेकिन तभी किस्मत ने पलटी मारी. उन्हें एक वीडियो फ़िल्म मिली और फिर आई रामगढ़ के शोले और दिल.

दिल रिलीज़ होने के बाद 'डुप्लिकेट देव आनंद' मशहूर हो गए और ख़ुद देव आनंद ने उन्हें मिलने के लिए बुलाया था.

देव आनंद से मुलाक़ात को वो कुछ यूँ याद करते हैं, "दिल के रिलीज़ के बाद मैं उनके ऑफिस गया था. मुझे देखते ही अपने अंदाज़ में कहा -क्यों किशोर नाम है न ? फिर बोले- 'दिल' देखी है मैंने और मुझे ऐसा लगता है कि मुझे आपकी कॉपी करनी पड़ेगी. अब कितनी फ़िल्में हैं तुम्हारे पास?

"मैने बताया क़रीब 8-10 फ़िल्में होंगी. तो देवानंद साहब बोले कि मेरे पास दो ही फ़िल्में हैं, मुझे कुछ फ़िल्में दिलाओ. वे उस दिन बड़े मज़ाक के मूड में थे."

'अभिशाप है डुप्लिकेट होना'

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किशोर ने देव आनंद के साथ काम करने की ख़्वाहिश जताई थी जिस पर देव आनंद बोले थे, "ज़रूर करेंगे किशोर, अपना फोन नंबर छोड़ जाओ. हम आपको बुलाएंगे."

लेकिन 'डुप्लिकेट' का ठप्पा लग जाने से कलाकार के करियर पर कितना असर पड़ता है ?

सवाल पूछते ही किशोर तपाक से बोलते हैं, "अच्छा सवाल है. ये बॉलीवुड में ही होता है कि अगर आपने शराबी का रोल कर लिया तो आपको ज़िंदगी भर शराबी का रोल ही करना पड़ेगा, अब डुप्लिकेट शब्द श्राप जैसा लगता है. मुझे तकलीफ होती है क्योंकि मैं अच्छा एक्टर हूं लेकिन रोल वही मिलते हैं देवानंद वाले, लोग आपको उससे ऊपर आने ही नहीं देते."

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किशोर कहते हैं कि जब वे जॉनी लीवर या राजपाल यादव को देखते हैं तो उन्हें लगता है कि वे भी ये रोल कर सकते थे.

लेकिन डुप्लिकेट देव आनंद की पहचान से परे किशोर ने अपनी अलग पहचान बनाने की कोशिश की है. वे थिएटर, स्टेज शो और गेम शो करते हैं.

एक हुनर और भी इनमें. किशोर गायक भी हैं और तीन आवाज़ों में गाते हैं- किशोर, मुकेश और रफ़ी.

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