'तुक्के में एक साथ इतनी चीज़ें कर लेता हूं'

लेखक, निर्माता और निर्देशक विशाल भारद्वाज का कहना है कि वो बस तुक्के में ही एक साथ इतनी सारी चीज़ें कर लेते हैं, वर्ना इंडस्ट्री में उनसे बेहतर कई लोग हैं.

आमतौर पर मीडिया से दूरी रखने वाले विशाल इस बार अपनी लिखी फ़िल्म 'तलवार' की सफलता के बाद हमसे मुख़ातिब हुए और कई बातें साझा की.

तो 16 पुरस्कार मिलते

बिना किसी शोर शराबे और तामझाम के विशाल दबे पांव उस कमरे में आ जाते हैं जहां हम बैठे थे.

विशाल कहते हैं, “देखिए अल्लाह मेहरबान तो गधा पहलवान, भगवान सभी को प्रतिभा देता है, लेकिन कोई तराश लेता है कोई नहीं. लेकिन इसका भी मुझे कोई घंमड नहीं है.”

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वे आगे कहते हैं, “मुझे नहीं लगता कि मैंने बहुत अच्छा काम किया है, अगर किया होता तो 6 नहीं 16 राष्ट्रीय पुरस्कार मेरे नाम होते.”

सबसे मुश्किल संगीत

इतने सारे काम करने वाले विशाल भारद्वाज के लिए सबसे मुश्किल चीज़ क्या है? उनका जवाब है, संगीत.

वे कहते हैं, ”मेरे लिए सबसे मुश्किल और मज़ा देने वाली चीज़ है संगीत बनाना क्योंकि इससे जो आनंद मिलता है वो कहीं नहीं मिलता.”

संगीत की किसी विरासत से इनकार करते हुए वो कहते हैं, “मेरे परिवार में कोई संगीत से जुड़ा नहीं था. लेकिन मुझे संगीत आता है. इसके पीछे मेरी कड़ी मेहनत है."

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बॉलीवुड में अधिकांश कलाकार किसी न किसी की छत्रछाया में आगे बढ़ते हैं. विशाल की ज़िंदगी में इस गॉडफ़ादर वाली भूमिका को निभाने वाले गुलज़ार हैं.

अपने स्ट्रगल के दिनों को याद करते हुए विशाल कहते हैं," मैं जब अपने शुरुआती दिनों में स्ट्रगल कर रहा था, तभी दिल्ली में गुलजार साहब से मुलाक़ात हुई.”

विशाल कहते हैं, “उस दिन हम एक गाने के लिए मिले थे और उस गाने को सुनकर गुलज़ार साहब ने मुझे थाम लिया. मैं आज जो कुछ हूं, उनकी वजह से. वो गाना जिसने हमें मिलवाया, वो था, जंगल बुक का गीत.”

'चड्डी पहन के फूल खिला है'

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गुलज़ार का 90 के दशक में दूरदर्शन पर दिखाए जाने वाले कार्टून धारावाहिक 'दि जंगल बुक' के लिए लिखा गीत."जंगल जंगल बात चली है” ही वो गाना था जिसे संगीतबद्ध करवाने के लिए वे विशाल से मिले थे.

इस गीत को याद करते हुए विशाल कहते हैं, “गुलज़ार साहब के साथ वो मेरी पहली रिकॉर्डिंग थी. यकीन मानिए, वो गाना 15 से 20 मिनट में बन गया था.”

इस गीत के बाद ही ग़ुलज़ार की ओर से विशाल को ‘माचिस’ का ऑफ़र मिला और वो फ़िल्म संगीत बनाने लगे.

दूसरे विश्वयुद्ध पर फ़िल्म

आजकल अपनी फ़िल्म 'तलवार' की सफ़लता से खुश विशाल कहते हैं, “मैं साफ़ करना चाहता हूं कि ये फ़िल्म तलवार परिवार के पक्ष में नहीं है, हमने बहुत गहन पड़ताल की है और जो भी जांच में हुआ था वो हमने सामने रखा है”

जल्द ही अपने पसंदीदा कलाकारों में से एक शाहिद और सैफ़ के साथ फ़िल्म 'रंगून' लेकर आ रहे विशाल ने बताया कि यह फ़िल्म 1940 के दौरान दूसरे विश्व युद्द की पृष्ठभूमि पर लिखी गई है.

विशाल कहते हैं, “बहुत कम लोगों को यह पता है कि दूसरे विश्व युद्ध में भारत भी शामिल था. इसमें सबसे बड़ी बात थी कि भारतीय ही भारतीयों के खिलाफ़ लड़ रहे थे. ब्रिटिश सेना ने भारतीय सैनिकों को नेताजी सुभाष चन्द्र बोस की इंडियन नेशनल आर्मी के ख़िलाफ़ लड़ने का हुक्म दिया था. इसी पृष्ठभूमि को लेकर हम एक लव ट्राएंगल दिखाने की कोशिश करेंगे.”

इस फ़िल्म में कंगना रनौत भी नज़र आएंगी. विशाल इस कहानी को अपना अगला बड़ा प्रोजेक्ट मानते हैं.

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