मैं रहमान को नहीं जानता था: सुभाष घई

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भारत में संगीतकार एआर रहमान का नाम किसी पहचान का मोहताज नहीं है, लेकिन निर्माता निर्देशक सुभाष घई ने यह कहकर सबको चौंका दिया कि वो एआर रहमान को जानते नहीं थे.

दरअसल मामला है मुंबई में हुए पांचवे हृद्यनाथ मंगेशकर पुरुस्कार वितरण समारोह का जहां रहमान को सम्मानित किया गया, इस समारोह में सुभाष घई भी मौजूद थे.

उन्होंने रहमान के साथ अपनी पहली मुलाक़ात को याद करते हुए कहा, "परदेस की शूटिंग के सिलसिले में मैं कहीं जा रहा था कि मेरे ड्राइवर ने गाड़ी में 'रोजा' के गाने लगा दिए."

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वो आगे कहते हैं, "मैं उस संगीत से इतना प्रभावित हुआ कि रहमान का नंबर खोजा और उनसे मिलने पहुंच गया और उन्हें अपनी अगली फ़िल्म में संगीत देने के लिए कहा."

सुभाष घई हंसते हुए कहते हैं कि तब रहमान ने मुझे कहा था कि उन्हें हिंदी नहीं आती, इस पर मैंने कहा,"अरे संगीत तो आता है ?"

उस मुलाक़ात के बाद एआर रहमान और घई की जोड़ी ने 1999 में 'ताल' जैसी म्यूज़िकल हिट फ़िल्म दी.

रहमान भी 'ताल' को अपने करियर की लैंडमार्क फ़िल्म मानते हुए कहते हैं, "मैं दुनिया के किसी भी कोने में जाता हूं लोग मुझसे ताल का संगीत बजाने के लिए ज़रुर कहते हैं. ये मेरे लिए किसी स्टैंप जैसा है और मुझे इसका गर्व है."

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आज एक ऑस्कर और चार राष्ट्रीय पुरुस्कार जीत चुके एआर रहमान अपनी शुरुआत के बारे में कहते हैं, ''मैं 90 के दशक का संगीतकार हूं जहां संगीत बनाने के लिए काफ़ी मेहनत करनी पड़ती थी लेकिन आजकल यह आसान है.''

रहमान ने पुरुस्कार लेते समय यह भी कहा कि वो हृद्यनाथ मंगेशकर के संगीत को काफ़ी पसंद करते हैं और फ़िल्म संगीत को दिए उनके योगदान को कम करके नहीं आंका जा सकता.

रहमान के संगीत से सजी अगली फ़िल्म इम्तियाज़ अली निर्देशित 'तमाशा' है जिसके गाने अभी से रेडियो और यूट्यूब पर काफ़ी लोकप्रिय हो रहे हैं.

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