वेबसाइट जो पकड़वाती है चोरी हूई मूर्तियां

  • 31 अक्तूबर 2015
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संयुक्त राष्ट्र के अनुसार भारत में 32 विश्व धरोहरें हैं जिनका निर्माण सैकड़ों साल पहले किया गया था.

भारतीय पुरातत्व विभाग (एएसआई) के अनुसार पिछले एक दशक में लगभग 10,000 से भी ज़्यादा प्राचीन कलाकृतियां भारत से लापता हो गई हैं.

राष्ट्रीय और राज्य पुरातत्व विभागों के पास सैकड़ों एेसे स्मारक हैं जिनमें कई मंदिर, मस्जिदें और संग्रहालय शामिल हैं.

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Image caption राजस्थान के सिंगराचौरी से चोरी हुई मूर्ति जो अमरीका के एक संग्रहालय में मिली

एएसआई के अधिकारी एमएस चौहान ने बीबीसी को बताया, "अगर धरोहर की कलाकृतियां एएसआई के पास पंजीकृत हैं तो ही चोरी होने पर कार्रवाई की जा सकती हैं."

उन्होंने कहा, "हमारे विभाग के पास कर्मचारियों की कमी की वजह से हम हर स्मारक की सुरक्षा नहीं कर पाते क्योंकि उनकी संख्या बहुत ज़्यादा है."

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पिछले दस वर्षों से मुंबई के रह रहे प्रोफ़ेसर किरीट मनकोडी भारत से लापता हुई प्राचीन कलाकृतियों को वापस लाने में सरकार की मदद कर रहे हैं.

प्रोफ़ेसर मनकोडी एएसआई और इंटरपोल के साथ मिलकर विश्व धरोहर से लापता हुई वस्तुओं को खोजने का काम कर रहे हैं.

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उन्होंने 'प्लंडर्ड पास्ट' नाम से एक वेबसाइट बनाई हैं जहां वे लापता हुई सभी वस्तुओं की जानकारी एकत्र करते हैं.

मनकोडी ने कहा, "मैं जब भी किसी चोरी की ख़बर सुनता या पढ़ता हूँ तो तुरंत अपनी वेबसाइट पर उसकी सूचना डाल देता हूँ."

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उन्होंने कहा कि जिन देशों के पास राष्ट्रीय धरोहरों और विरासत की कमी होती हैं वहां इन कलाकृतियों की बहुत ऊंची क़ीमत लगाई जाती है."

भारत में इन वस्तुओं के चोरी होने के तरीक़े को समझाते हुए वह कहते हैं, "हमारे यहां कई स्मारक शहर से दूर होते हैं, तो कुछ जंगलों के पास हैं, ऐसे में उनकी सुरक्षा करना बहुत मुश्किल हो जाता है."

प्रोफ़ेसर मनकोड़ी बताते हैं कि कुछ लोग 10-20 हज़ार रुपए देकर इन मूर्तियों की चोरी करवा लेते है और फ़िर उन्हें लाखों की क़ीमत में विदेशी बाज़ार में बेच देते हैं.

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वह कहते हैं, "थाइलैंड जैसे देशों से होते हुए अंत में ये अमरीका और फ़्रांस के मार्केट में पहुंच जाती हैं."

इन लापता हुई वस्तुओं की जानकारी कई अंतरराष्ट्रीय पत्रिकाओं और वेबसाइट्स के द्वारा प्रोफ़ेसर मनकोडी और एएसआई को मिलती हैं जिसके बाद वे अपनी कार्रवाई शुरू करते हैं.

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फ़िलहाल चोरी की 100 से भी ज़्यादा शिकायतें सरकार के पास आई हैं जिनमें से 15 वस्तुओं का ठिकाना मालूम चल गया है और उन्हें वापस लाने की प्रक्रिया जारी है.

एक ऐसे ही किस्से को साझा करते हुए प्रोफ़ेसर मनकोडी बताते हैं, "मध्य प्रदेश के एक मंदिर की लापता मूर्ति के बारे में जब वेबसाइट पर लिखा गया तो अमरीका की पुलिस ने उसे ढ़ूंढ निकाला."

पुरातत्व की जानकारी रखने वाले आर्किटेक्ट विकास दिलावरी कहते हैं, "राष्ट्रीय धरोहर का संरक्षण करना हमारा फ़र्ज़ बनता है. प्रगति के नाम पर इसे ख़त्म करना ठीक नहीं हैं".

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