आपका त्योहार, इनकी तकलीफ़..

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भारत में हर त्योहार धूमधाम से मनाया जाता हैं लेकिन इस दौरान हम जाने-अंजाने में हज़ारों पशु-पक्षियों को नुकसान पहुंचा देते हैं.

भारत की महिला एवं बाल विकास मंत्री और पशु अधिकारवादी मेनका गांधी ने बीबीसी को बताया, "भारत में हर वर्ष सिर्फ दीवाली के दौरान ही 12 से 15 हज़ार पशु एवं पक्षी घायल हो जाते हैं."

मेनका गांधी ने कहा, "समय पर प्राथमिक इलाज नहीं होने के कारण अधिकतर की मौत हो जाती है."

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मेनका गांधी का मानना है कि यह तो सिर्फ़ दीवाली के आंकड़े हैं, अगर पूरे वर्ष में हुए सभी त्योहारों की बात करें तो लाखों जानवर ज़ख्मी हो जाते हैं और कोई उनकी तरफ ध्यान भी नहीं जाता.

मेनका कहती हैं, "सरकारें पशु-पक्षियों की देखभाल करने वाले संस्थानों की मदद नहीं करती हैं, भारत में ऐसे अस्पताल बहुत कम हैं जो जानवरों की खास देख-भाल करें."

सिर्फ दीवाली ही एक त्योहार नहीं हैं जिसमें बेज़ुबान जानवरों को तकलीफ पहुंचती हैं, होली और मकर संक्राति में पतंग की डोर और मांझे से भी हज़ारों पक्षी और जानवर ज़ख्मी होते हैं.

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'पीपल फॉर एनिमल्स' (पीएफए) संस्थान की प्रवक्ता गौरी मौलिकी ने बीबीसी को बताया, "दीवाली के अगले दिन ही हमें 2000 से भी ज़्यादा जानवरों के ज़ख्मी होने की खबर मिली है और यह तो वो हैं जिनकी शिकायतें दर्ज होती हैं या जिन्हें अस्पताल लाया जाता है."

वे आगे बताती हैं, "हर वर्ष लगभग 7000 ऐसे मामले तो दर्ज ही नहीं होते और यह आंकड़े तो सिर्फ उत्तर भारत के ही हैं."

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'पीपल फॉर द एथिकल ट्रीटमेंट ऑफ एनिमल्स' (पेटा) की प्रवक्ता बेनज़ीर सुरईया ने बीबीसी को बताया, "भारत में ऐसा कोई निर्धारित संस्थान नहीं है जो घायल पशु पक्षियों का आंकड़ा दे पाए."

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