कलाकार आसान टार्गेट हैं: दीपिका

  • 17 दिसंबर 2015

आठ साल पहले शाहरुख़ ख़ान की फ़िल्म 'ओम शांति ओम' से अपना डेब्यू करने वाली अभिनेत्री दीपिका पादुकोण इस दिसंबर में शाहरुख़ की फ़िल्म 'दिलवाले' को अपनी फ़िल्म 'बाजीराव मस्तानी' से टक्कर देने वाली हैं.

लेकिन दीपिका इसे कोई टकराव नहीं मानतीं और उनके हिसाब से दोनों फ़िल्मों को उनके हिस्से के दर्शक मिलेंगे.

फ़िल्म 'बाजीराव मस्तानी' के प्रमोशन के सिलसिले में बीबीसी से हुई मुलाक़ात के दौरान दीपिका ने इस फ़िल्म और निजी जीवन से जुड़े कई मुद्दों पर बात की.

हाल ही में असहिष्णुता के मुद्दे पर बॉलीवुड कलाकारों शाहरुख़ और आमिर ख़ान को ख़ासा परेशानी का सामना करना पड़ा था और साल 2015 के शुुरुआती महीनों में 'माई च्वाईस' नाम के वीडियो को लेकर दीपिका भी विवादों से घिर गई थीं.

लेकिन दीपिका मानती हैं कि कलाकारों को जानबूझ कर विवादित मुद्दों में निशाने पर लिया जाता है, "101 प्रतिशत ऐसा ही होता है कि हम कलाकारों को बहुत आसानी से निशाना बनाया जाता है."

वो विस्तार से बताती हैं, "पहले हमसे सवाल पूछा जाता है, फिर हम जवाब देते हैं. जो हमें सही लगता है, उस पर कुछ लोग सहमत नहीं होते और हमारी आलोचना शुरु हो जाती है."

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दीपिका मानती हैं कि अभिनेताओं का काम फिल्मों के ज़रिए दर्शकों का मन बहलाना है लेकिन बेमतलब की बयानबाज़ी से बवाल पैदा किए जाते हैं जो बेहद ग़लत है.

वो कहती हैं, "यही वजह है कि हम सवालों से बचते हैं और बयान नहीं देते."

दीपिका की आने वाली फ़िल्म 'बाजीराव मस्तानी' के साथ भी एक विवाद जुड़ता नज़र आ रहा है.

हाल ही में इस फ़िल्म के प्रमोशन के लिए दीपिका और रणवीर सिंह 'कॉमेडी नाईट्स विद कपिल' में गए थे और वहां राजा महाराजाओं की काफ़ी खिल्ली उड़ाई गई, जो कई लोगों को पसंद नहीं आई.

इस पर सफ़ाई देते हुए दीपिका पादुकोण कहती हैं, "मुझे लगने लगा है कि लोग आज कल बहुत संजीदा हो गए हैं और हम सबको थोड़ा ठंडा होना चाहिए."

अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए दीपिका कहती हैं, "हर चीज़ को लेकर हम सब लोग बहुत संवेदनशील और भावुक हो गए हैं और क्योंकि मैं ख़ुद डिप्रेशन से गुज़र चुकी हूं इसलिए अपने अनुभव से सभी को यह नसीहत दूंगी कि ज़िन्दगी बहुत नाज़ुक है और हर चीज़ पर संवेदनशील हो जाएंगे या हर बात को पकड़ कर बैठेंगे, तो ख़ुद को ही नुक़सान पहुंचाएंगे."

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वो मानती हैं कि ये मज़ाक़ मस्ती एक अलग बात है लेकिन फ़िल्म में वो काफ़ी गंभीर हैं और इस फ़िल्म से बाजीराव मस्तानी के बारे में लोगों को जागरुक कर रही हैं.

दीपिका कहती हैं, "मैं ख़ुद इतिहास की छात्रा रही हूं और मैंने कभी बाजीराव मस्तानी के बारे में नहीं पढ़ा था. ऐसे में हमें तो ख़ुश होना चाहिए कि हमारी आने वाली पीढ़ी उनके बारे में कुछ तो जान पाएंगी."

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