आशा पारेख सम्मान की हक़दार: जूही चावला

  • 7 जनवरी 2016

फ़िल्म जगत की मशहूर अदाकारा आशा पारेख पद्मभूषण पुरस्कार की सिफ़ारिश के सिलसिले में केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी से मिली थीं.

ये जानकारी खुद नितिन गडकरी ने कुछ दिन पहले अपने एक बयान में दी थी.

आशा पारेख का समर्थन करते हुए अभिनेत्री जूही चावला ने कहा कि हो सकता है उन्हें ऐसा लगा हो कि पुरस्कार मिलने के बाद लोग उनके काम को याद रखेंगे.

अपनी आने वाली फ़िल्म 'चॉक एंड डस्टर' के सिलसिले में बीबीसी से मुलाकात में जूही ने राष्ट्रीय पुरस्कार, सेंसर बोर्ड जैसे कई विषयों पर बात की.

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जूही कहती हैं, "किसी भी तरह का पुरस्कार एक कलाकार के हुनर को सम्मान देता है."

वे मीडिया पर कहती हैं, "आज मीडिया बहुत तेज़ी से आगे बढ़ रहा है. हर दिन नई ख़बरें सुनने को मिलती हैं और ख़बरों के मामले में हमारी याददाश्त काफ़ी कमज़ोर है."

उनका कहना है, "किसी को याद नहीं रहता कि छह महीने पहले क्या हुआ था."

आशा पारेख की तारीफ़ करते हुए वे कहती हैं, "आशा जी अपने ज़माने की बहुत बड़ी अभिनेत्री रही हैं और उनकी हर फ़िल्म सिल्वर जुबली होती थी."

उनका कहना था, "एक अभिनेत्री के साथ-साथ, वह बेहतरीन कत्थक डांसर भी हैं."

जूही कहती हैं कि कितने लोग यह जानते हैं कि वह सेंसर बोर्ड की भी सदस्य रही हैं, पर सबको एक 'सेंसेशनल' लाइन मिल गई कि उन्होंने पद्मभूषण के लिए सिफ़ारिश की.

वर्ष 1986 में अपना फ़िल्मी करियर शुरू करने वाली अभिनेत्री जूही के मुताबिक़, "आज हर तरफ़ युवा पीढ़ी के कलाकार ख़बरों में रहते हैं. इसका मतलब यह नहीं कि हम वरिष्ठ कलाकारों को भूल जाएं."

उनके मुताबिक़, "एक नज़र उन वरिष्ठ कलाकारों के काम पर भी डालनी चाहिए और देखना चाहिए कि क्या उनका काम पुरस्कार मिलने लायक है या नहीं. और अगर है तो उन्हें पुरस्कार ज़रूर मिले."

बीते साल 2015 में भारतीय सेंसर बोर्ड काफ़ी चर्चा में रहा. कई कलाकारों और फ़िल्म निर्माताओं ने सेंसर बोर्ड की जमकर आलोचना भी की.

लेकिन जूही मानती हैं कि सेंसर बोर्ड का होना आवश्यक है.

वे कहती हैं, "चाहे कोई कुछ भी बोले, मुझे खुशी है कि सेंसर बोर्ड भारत में है. नहीं तो कुछ निर्माता ऐसे भी हैं जो बिज़नेस करने के नाम पर कुछ भी दिखा देते हैं. उन पर लगाम लगाना ज़रूरी है."

जूही चावला और शबाना आज़मी की फ़िल्म 'चॉक एंड डस्टर' 15 जनवरी 2016 को रिलीज़ होगी. निर्देशक जयंत गिलाटर हैं.

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