'ज़मीन तो ब़ाज़ार से कम भाव पर ही मिलेगी'

अभिनेत्री और सांसद हेमा मालिनी को नृत्य अकादमी के लिए मुंबई में दी गई ज़मीन पर एक विवाद खड़ा हो गया है.

सरकार पर आरोप है कि हेमा मालिनी को मुंबई के प्राईम इलाके में जगह मार्केट के दाम से बहुत कम पैसों में दे दी गई है.

हालांकि अभी तक इस मामले में चुप रही हेमा ने अपनी सफ़ाई में आज कहा,"यह ज़मीन अभी मेरे हाथ में नहीं आई है और न ही इसकी क़ीमत मुझे बताई गई है. एक बार मुझे ज़मीन का हक़ मिले तो कीमत कुछ भी हो मैं इसे ज़रुर ख़रीदूंगी."

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हेमा ने साफ़ किया,"जो लोग इस ज़मीन के दाम मार्केट रेट से कम होने की बात कर रहे हैं, उन्हें बता दूं कि यह ज़मीन मैं निजी तौर पर नहीं बल्कि अकादमी के लिए ले रही हूं, तो ऐसे में यह मुझे बाज़ार के भाव से कुछ कम कीमत पर ही मिलेगी."

हेमा मालिनी ने यह भी कहा की वो अभी तक यात्रा कर रही थीं इसलिए इस बात पर प्रतिक्रिया नहीं दे सकीं.

दरअसल हेमा मालिनी की ज़मीन का विवाद 20 साल पुराना है और यह विवाद एक नए नियम 'कोस्टल रेग्युलेशन ज़ोन' के कारण सुर्खियों में आया है.

इस नियम के चलते दिलीप कुमार, पंडित हरि प्रसाद चौरसिया, सुनील गावस्कर को आवंटित किए गए प्लॉट भी विवाद में आए थे.

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महाराष्ट्र सरकार की ओर से सांस्कृतिक, खेल कूद और शैक्षणिक गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए कलाकारों और खिलाड़ियों को जूहू-वर्सोवा लिंक रोड इलाके में ज़मीन दी गई.

लेकिन हरि प्रसाद चौरसिया के स्कूल 'वृंदावन' के बन जाने के बाद यह नियम लागू हो गया और सभी आवंटन निरस्त कर दिए गए.

दिलीप कुमार को आवंटित प्लॉट फ़िल्म कलाकारों के संगठन 'सिंटा' के लिए मिला था और ज़मीन का आवंटन निरस्त हो जाने के बाद अमरीश पुरी और आशा पारेख ने मिल कर इस ज़मीन से थोड़ी दूर मौजूद एक प्लॉट को 'सिंटा' के लिए रखा था.

वहीं हेमा मालिनी को मुंबई के बाहरी इलाके मालवणी में ज़मीन ऑफ़र की गई जिसे उन्होनें ठुकरा दिया और जूहू या वर्सोवा में ही ज़मीन की मांग जारी रखी.

इस मांग पर हरकत करते हुए महाराष्ट्र सरकार ने हेमा को अंधेरी जैसे महंगे इलाके में ज़मीन तो आवंटित कर दी लेकिन अब यही ज़मीन विवाद का कारण बन गई है.

ज़मीन को लेकर ऐसी ही मांग अभिनेता अक्षय कुमार भी लंबे समय से करते आए हैं.

वो मुंबई में एक मार्शल ऑर्ट्स अकादमी खोलना चाहते हैं और इसके लिए मुंबई में ही ज़मीन की मांग कर रहे हैं.

हालांकि सरकार ने उन्हें मुंबई से सटे इलाके भाईंदर में जगह देने की बात कही थी लेकिन अक्षय ने इसे ठुकरा दिया.

ज़मीन की मांग कथक नृत्यांगना सितारा देवी भी आजीवन करती रहीं लेकिन वो सरकार से सहमति लेने में विफल रहीं.

जाने माने निर्माता निर्देशक सुभाष घई को भी मुंबई के गोरेगांव इलाके में अपने फ़िल्म संस्थान 'विसलिंग वुड्स' को लेकर विवाद का सामना करना पड़ा था.

सुभाष घई ने इस संस्थान की ज़मीन को 2004 तक ही लीज़ पर लिया था और इसके बाद उन्होनें 2014 तक इस ज़मीन से ज़ुड़े ज़रुरी काग़ज़ात उपलब्ध नहीं करवाए थे.

इस लापरवाही के चलते बाज़ार मूल्य के हिसाब से सुभाष घई को 10.31 करोड़ रुपए सरकार को चुकाने पड़ रहे हैं.

सरकारी ज़मीन को लेकर विवाद से अभिनेता शाहरुख़ ख़ान भी गुज़रे हैं हालांकि यह बस कुछ फ़ीट ज़मीन को लेकर ही था.

साल 2015 में शाहरुख़ ख़ान के बंगले के बाहर बने एक चबूतरे को सांसद पूनम महाजन की शिकायत पर अनाधृिकत कब्ज़ा घोषित कर तोड़ दिया गया था.

हालांकि इस मुद्दे को लेकर शाहरुख पर कोई जुर्माना या अदालती कारर्वाई नहीं की गई थी और न ही शाहरुख़ ने इस तोड़फोड़ का कोई विरोध किया था.

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