राजकपूर के गाने से शुरु हुई 'डेडपूल'

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फ़िल्म : डेडपूल

रेटिंग : **1/2 ढाई स्टार

हॉलीवुड के लिए भारत कितना बड़ा बाज़ार है यह बात 'डेडपूल' फ़िल्म के पहले दृश्य में हीरो की टैक्सी में चल रहे 'श्री 420' के गाने 'मेरा जूता है जापानी' से साबित हो जाती है.

मार्वल कॉमिक्स के प्रसिद्ध किरदारों 'एक्स मैन' में एक मज़ाकिया लेकिन ख़तरनाक एंटी-हीरो है 'डेडपूल'.

यहां ध्यान देने वाली बात है कि डेडपूल विलेन नहीं, एंटी हीरो है, यानि वो ग्रे शेड लिए हुए है लेकिन फ़िल्म में मुख्य भूमिका में है.

मार्वल की एक्स मैन कॉमिक्स पर आधारित फ़िल्म फ़्रेंचाईज़ी में 'एक्स मैन' सीरीज़ में डेडपूल सबसे नई फ़िल्म है और डेडपूल किरदार ओरिजिनल कॉमिक्स सीरीज़ में भी नया ही है.

एक्स मैन कॉमिक्स में साल 1991 में पहली बार नज़र आए डेडपूल को वैसे तो एक तलवार चलाने वाले, तेज़ तर्रार, किसी भी चोट से ठीक हो जाने वाली क्षमता वाले नेगेटिव म्यूटेंट के रुप में दिखाया गया लेकिन युवा पाठकों को यह क़िरदार बेहद पसंद आया.

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डेडपूल आज के युवाओं का हीरो है और इसलिए इस फ़िल्म का प्रमोशन भी किसी पोस्टर पर नहीं बल्कि दीवारों पर 'ग्रैफ़िटी' के माध्यम से किया जा रहा है, जो युवा भाषा में 'कूल' है.

डेडपूल के 'वयस्क' लेकिन चुटीले डॉयलॉग युवाओं को ख़ास पसंद आते हैं और फ़िल्म में भी अपने इस फ़्लर्ट और आज के ज़माने वाले हीरो के अंदाज़ में डेडपूल के किरदार में नज़र आते हैं अभिनेता रायन रेनॉल्ड्स.

वैसे यह एक अजीब बात है कि प्रतिद्वंद्वी कॉमिक्स और फ़िल्म कंपंनी 'डीसी' (बैटमैन और सुपरमैन) के लिए भी रायन सुपरहीरो 'ग्रीन लैंटर्न' का किरदार निभा चुके हैं.

ऐसे में वो पहले ऐसे मुख्य कलाकार हो जाते हैं जो एक साथ 'डीसी' और 'मार्वल' की फ़िल्मों में नज़र आता है.

अब ट्रिविया की बातों को पीछे छोड़कर आते हैं फ़िल्म की समीक्षा पर.

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यह फ़िल्म 'ए' सर्टिफ़िकेट के साथ रीलीज़ हुई है और सेंसर बोर्ड को 'ए' सर्टिफ़िकेट के साथ भी इसे रीलीज़ करना आसान नहीं था.

फ़िल्म में ख़ासा ख़ून ख़राबा है, न्यूडिटी है, अश्लील इशारे हैं और द्विअर्थी संवांदो से फ़िल्म भरी पड़ी है.

शायद इसिलिए भारतीय दर्शकों के लिए सिनेमाघर में फ़िल्म में हर पांच से दस मिनट के अंतराल पर संवादो को म्यूट किया गया है और फ़िल्म के कई दृश्यो को काटा गया है जिससे 108 मिनट की फ़िल्म सिर्फ़ 63 मिनट की रह जाती है.

लेकिन यही बात ख़लती भी है क्योंकि इस फ़िल्म को देखने आए 'डेडपूल' फ़ैन, डेडपूल की वही द्विअर्थी मज़ाक करने की क्षमता के तो दीवाने हैं.

जब भी फ़िल्म में किसी डॉयलॉग को म्यूट किया जाता तो हॉल में बैठे दर्शक 'ओह' की आवाज़ में निराशा प्रकट करते और हमारे साथ बैठे एक युवा दर्शक ने अपनी प्रतिक्रिया इस प्रकार दी,"व्हाट यार, ए सर्टिफ़िकेट भी दिया और डॉयलॉग और सीन भी काट दिए. नॉट सो कूल, मैन!"

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सेंसर और कंटेंट की लड़ाई को एकतरफ़ छोड़ दें तो इस कटी कटाई फ़िल्म में कहानी है हीरो वेड विल्सन के डेडपूल बनने की.

युद्ध से लौटकर सेवानिवृत हुए वेड की ज़िंदगी छोटे मोटे अपराध कर चल रही होती है और अपनी बार डांसर गर्लफ़्रेंड के साथ वो एक सुखी और रोमांचक जीवन काट रहा होता है.

लेकिन इसी दौरान कैंसर की बीमारी का पता चलने के बाद वेड की ज़िंदगी में तूफ़ान आ जाता है और फिर एक दिन एक सीक्रेट एजेंट के उसकी बीमारी ठीक कर देने के वादे के फेर में फंसकर वेड एक दर्दनाक प्रक्रिया के बाद म्यूटेंट बना दिया जाता है.

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एक म्यूटेंट जिसका चेहरा बिल्कुल वैसा ही है जैसे हाल में दक्षिण भारतीय फ़िल्म 'आई' में हीरो का हो जाता है.

इस वीभत्स चेहरे से छूटने और अपने प्यार को वापिस पाने की जद्दोजहद में 'डेडपूल' नज़र आता है और भारतीय दर्शकों को लुभाने के लिए फ़िल्म में एक भारतीय टैक्सी ड्राईवर है जो डेडपूल का दोस्त बन जाता है.

फ़िल्म में दूसरे सुपरहीरोज़ से लेकर खुद अपने उपर 'डेडपूल' के बहाने निर्देशक ने ख़ासा मज़ाक किए हैं.

जैसे एक दृश्य में डेडपूल बताता है, "इस फ़िल्म में आपको सिर्फ़ एक दो म्यूटेंट ही नज़र आएंगे क्योंकि बाकी को लेने का बजट हमारे पास नहीं था."

फ़िल्म की शुरुआत में ही डेडपूल यह साफ़ कर देता है कि यह एक नई फ़्रेंचाईज़ी की शुरुआत है और अगली फ़िल्म में वो मार्वल फ़िल्मों के सुपरहिट किरदार 'वुल्वरीन' के साथ नज़र आएगा.

फ़िल्म के अंत में डेडपूल आपको 'स्वच्छ भारत' का भी संदेश देता नज़र आता है और आपसे दरख्वास्त करता है कि आप अपने ख़ाने पीने के पैकेट साथ लेकर जांए.

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