गीतकार अब जुमलों से खेलते हैं: समीर

समीर

3539 गाने और 650 गानों के साथ गीतकार समीर ने अपना नाम गिनीज़ बुक ऑफ़ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज करवाया है.

नज़र के सामने जिगर के पास, तेरी उम्मीद तेरा इंतज़ार और ऐसे ही कई बेहतरीन गाने लिखे हैं गीतकार समीर अंजान ने.

मशहूर गीतकार ‘अंजान’ के बेटे समीर ने कक्षा सातवीं से लिखना शुरू किया और 12वीं कक्षा तक जाते जाते उन्हें ये यकीन हो गया कि वो एक गीतकार बन सकते हैं.

समीर ने बताया कि वो अपने पिता की विधा से खुद को दूर करना चाहते थे क्योंकि उनपर कई इल्ज़ाम लगे कि शायद उनके लिखे हुए गाने उनके पिता ने लिखकर दिए होंगे.

बचपन से ही समीर आनंद बक़्शी और मजरूह सुल्तानपुरी को बहुत सुना करते थे क्योंकि उनकी लिखने की विधा समीर को बहुत भाती थी.

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ये पूछने पर कि उनके लिखे गानों पर किस अभिनेता के हाव भाव बहुत अच्छी तरह से निभे हैं समीर ने कहा, “मुझे अमिताभ बच्चन के हाव भाव मुझे बहुत पसंद हैं. उन्होंने बाग़बान, बड़े मियां छोटे मियां, कभी खुशी कभी ग़म में जिस तरह मेरे लिखे गानों में अपनी अदायगी दिखाई वो उनके सिवा कोई और नहीं कर सकता.

समीर ने खुद को बदलते वक़्त के साथ बदला. फ़िल्म 'फ़ालतू' का 'चार बज गए लेकिन पार्टी अभी बाकी है' और फ़िल्म 'धूम 2' का 'क्रेज़ी किया रे' जैसे गाने भी लिखे.

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मौजूदा गीतकारों में से कौन हैं समीर के पसंदीदा गीतकार?

समीर ने बताया, “मुझे लगता है कि आजकल सभी गीतकार बस जुमलों पर खेलते हैं. उल्टा-पुल्टा कुछ भी लिख देते हैं पर इरशाद कामिल में मुझे कुछ संभावनाएं दिखती हैं पर उन्हें अभी काफ़ी काम करना है.”

फ़िल्म ‘आशिकी’ का गाना ‘सांसों की ज़रुरत है जैसे’ समीर का पसंदीदा गाना है जो उन्होंने फ़िल्म ‘कुर्बानी’ के गाने ‘हम तुम्हें चाहते हैं ऐसे’ से प्रेरित होकर लिखा.

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