आसान नहीं महिला मेकअप आर्टिस्ट होना

  • 29 फरवरी 2016
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बॉलीवुड की कई स्थापित मेकअप आर्टिस्टों का कहना है कि उनके काम में महिलाओं को न तो उचित मेहनताना दिया जाता है और न ही उनकी सुविधाओं का ख़्याल रखा जा रहा है.

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बॉलीवुड के चर्चित अभिनेताओं से लेकर अमरीका के राष्ट्रपति बराक ओबामा तक का मेकअप कर चुकीं चारू खुराना ने सिने कॉस्ट्यूम मेकअप के क्षेत्र में महिलाओं के काम करने के लिए अदालत में आवाज़ उठाई थी और पांच साल बाद उनको जीत भी मिली.

बॉलीवुड में अब महिलाओं को भी मेकअप आर्टिस्ट का कार्ड मिलने लगा है.

चारू ने बीबीसी को बताया, "इससे पहले महिला मेकअप आर्टिस्ट कितनी भी महारत हासिल क्यों न कर लें, वो ज़्यादा से ज़्यादा हेयर ड्रेसर तक ही पहुँच पाती थीं."

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जहां इस फैसले ने महिला मेकअप आर्टिस्ट्स के लिए नए दरवाजे खोले हैं, वहीं उनको कुछ मुश्कि़लों से भी दो चार होना पड़ रहा है.

बराबरी का हक देने के नाम पर कई प्रोडक्शन हाउस महिला मेकअप आर्टिस्ट को तवज्जो तो देने लगे हैं, लेकिन सेट पर उनके प्रति उदासीन रवैया अपनाते हैं.

वरिष्ठ मेकअप आर्टिस्ट दीपक सावंत ने बताया, "न तो महिला मेकअप आर्टिस्ट को मेहनताना अच्छा मिलता है और न ही काम के दौरान उनकी सेहत के बारे में सोचा जाता है."

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दीपक आगे कहते हैं, "छोटे बजट की फ़िल्मों में 'लो बजट' के नाम पर महिला मेकअप आर्टिस्ट को रख तो लिया जाता है, लेकिन उन्हें उचित मेहनताना नहीं दिया जाता."

उन्होंने बताया, "साथ ही आउटडोर शूटिंग पर जब भी इन्हें ले जाते हैं, तो ठहरने की व्यवस्था भी अच्छे तरीके से नहीं की जाती है."

इस समस्या की एक और परत खोलते हुए दीपक ने बताया कि दरअसल, महिला मेकअप आर्टिस्ट की मांग छोटे बजट के कई कलाकार ज़्यादा करते हैं.

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दीपक के मुताबिक, "ये कलाकार खुद को बड़ा साबित करने के लिए इन महिलाओं की बेइज्ज़ती करते हैं, तो कुछ कलाकार ग़लत मानसिकता के साथ उनसे भद्दे मज़ाक तक करते हैं."

वहीं मशहूर मेकअप आर्टिस्ट दत्तात्रेय सावंत की पोती और अमिताभ बच्चन की हेयर ड्रेसर दक्षिना कहती हैं, "बॉलीवुड में यदि आप ब‍िना पहचान के अपनी जगह बनाने आते हैं, तो शोषण होता ही है. मैं अपने खानदान में तीसरी पीढ़ी की कलाकार हूं, शायद यह एक वजह रही क‍ि मुझे इन दिक्कतों का सामना नहीं करना पड़ा."

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वे पुरुषों के मुकाबले फ़िल्म इंडस्ट्री में हो रहे भेदभाव पर कहती हैं, "जहां एक दिन का मेहनताना पुरुष साथियों को दस हज़ार मिलता होगा, वहीं महिलाओं को चार हज़ार में काम करने के लिए कहा जाता है."

नवाज़ुद्दीन सिद्दीकी की मेकअप आर्टिस्ट सना केवल बॉलीवुड की इस अनदेखी सच्चाई से सहमति जताती हैं.

'बजरंगी भाईजान' और 'बदलापुर' जैसी फ़िल्मों में बतौर मेकअप आर्ट‍िस्ट काम कर चुकी सना कहती हैं, "यह ऐसी समस्या है, जो सभी क्षेत्रों में देखने को मिलेगी. ज़रूरी है कि आप अपने स्तर पर मना करना सीखें. जब तक आपको पर्याप्त मेहनताना न मिले, तब तक आप उस प्रोजेक्ट से न जुड़ें."

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सना का आरोप है, "महिला मेकअप आर्टिस्ट को न सिर्फ़ प्रोडक्शन हाउस के सही मेहनताना न देने की समस्या से जूझना पड़ता है, बल्कि साथी पुरुष मेकअप आर्टिस्ट की घट‍िया राजनीति का भी शिकार होना पड़ता है."

इन समस्याओं को सुलझाने का एक सुझाव देते हुए चारू ख़ुराना कहती हैं कि अगर फ़िल्म की शूटिंग के दौरान ज़्यादा महिलाएं मौजूद होंगी तो महिला कलाकारों को भी अच्छा लगेगा.

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