मुंबई में 'ट्रेन बुलीज़' से बचें

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मुंबई की लोकल ट्रेनों में भीड़ होना कोई नई बात नहीं है और अगर आपको बैठने की जगह मिल जाए, तो आप किस्मत वाले समझे जाते हैं.

इन दिनों ट्रेन में जगह होने पर भी यात्रियों को ट्रेन में न चढ़ने देना या सीट पर न बैठने देना जैसी बात देखने में आ रही है.

पिछले वर्ष नवंबर में ट्रेन में चढ़ने की कोशिश कर रहे भावेश नखाते नाम के एक युवक की ट्रेन से गिरकर मौत हो गई. इस मामले ने तब तूल पकड़ा, जब हादसे का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ.

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वीडियो में दिख रहा है कि भावेश दरवाज़े की रॉड पकड़े हैं और लोगों से गुज़ारिश कर रहे हैं कि उन्हें अन्दर आने दें.

भावेश के बार-बार कहने पर भी किसी ने उन्हें भीतर नहीं आने दिया. कुछ देर बाद उनका हाथ फिसला और ट्रेन से गिरकर उनकी मौत हो गई.

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मुंबई लोकल ट्रेन से रोज़ क़रीब 70 लाख से ज़्यादा लोग सफ़र करते हैं और एक दिन में पश्चिम, मध्य और हार्बर लाइन के स्टेशनों के बीच क़रीब 3000 चक्कर लगाती है.

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रेलवे बोर्ड के आंकड़ों के मुताबिक़ लगभग रोज़ कोई न कोई यात्री हादसे का शिकार होता है और पिछले साल रेलवे अधिकारियों ने क़रीब 4000 यात्रियों पर कार्यवाही की.

झुंड बनाकर दादागिरी और सह-यात्रियों को ट्रेन में चढ़ने न देने की घटनाएं मुंबई की लोकल ट्रेनों में पहले से चल रही हैं.

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कल्याण से दादर जा रहे अविनाश भंडारी बताते हैं, "रोज़ दादर से घाटकोपर जाते वक़्त कुछ लोग दरवाज़े को घेरकर खड़े हो जाते है. इससे हमें ट्रेन में चढ़ने में काफ़ी तकलीफ़ होती है."

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ये दिक़्क़त सिर्फ़ पुरुषों के कंपार्टमेंट ही नहीं बल्कि महिलाओं को भी सहनी पड़ती है. सीट होने के बाद भी महिलाओं को बैठने नहीं दिया जाता.

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पश्चिम मार्ग पर विरार से दादर सफ़र कर रही वैष्णवी बताती हैं, "हमारी ट्रेनों में महिलाओं के कई ऐसे झुंड आते हैं, जो सीट खाली होने पर भी बैठने नहीं देते."

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वही अंधेरी से चर्चगेट सफ़र करने वाली आरुषी कहती हैं, "शाम के समय जगह होने पर भी हमें बैठने नहीं दिया जाता और जब उनसे पूछते हैं, तो वे कहते हैं कि हमारे पहचान वालों के लिए रोक के रखी है."

इन बातों की जानकारी रेलवे अधिकारियों को भी है. पश्चिम रेलवे के प्रवक्ता नितिन कुमार डेविड ने बीबीसी को बताया, "हमारे पास कई बार ऐसी शिकायतें आई हैं और हम इसे सुलझाने के लिए काम कर रहे हैं."

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वे आगे कहते हैं, "हम समय-समय पर रेलवे पुलिस फ़ोर्स से जांच करवाते हैं और यात्रियों को तकलीफ़ दे रहे लोगों को गिरफ़्तार भी करते हैं."

मुंबई की जनता वैसे भी भीड़ और ट्रेन में लंबे सफ़र से परेशान रहती है. इसके ऊपर इन परेशानियों की तो लोग कतई उम्मीद नहीं करते हैं.

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