फ़िल्मी होली का सफ़र

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होली में रंग-गुलाल, मिठाई - गुझिया और बॉलीवुड गानों का एक अलग ही स्थान होता है. इन बॉलीवुड गानों के अब तक के सफ़र पर एक नज़र.

हिंदी सिनेमा जगत की पहली होलियों में नाम आता है, 50 के दशक में आई पहली टेक्नीकलर फ़िल्म 'आन' का. इसमें दिलीप कुमार और निम्मी होली खेलते और झूमते नज़र आ रहे हैं.

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इसके बाद साल 1958 में आई फ़िल्म 'मदर इंडिया' की 'होली आई रे कन्हाई' का पड़ाव. इस गीत को 50 के दशक की मशहूर गायिका शमशाद बेगम ने गाया था.

होली के रंग में एक और रंग वी शांताराम ने अपनी फ़िल्म 'नवरंग' में भी उकेरा है. साल1959 में आई इस फ़िल्म में महिपाल और संध्या मुख्य भूमिका में हैं.

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महिपाल, दिवाकर नाम के कवि की भूमिका में हैं. इस गाने में संध्या महिला और पुरुष की दोहरी भूमिका मंच पर 'जा रे हट नटखट' गाते हुए नाच रही हैं.

सत्तर के दशक में भी कुछ होली के गीत सदाबहार की सूची में हैं. पहला नाम है साल 1960 में आई फ़िल्म 'कोहिनूर' का 'तन रंग लो जी आज मन रंग लो'. इसके बाद फ़िल्म 'गोदान' और 'फूल और पत्थर' में भी होली के गाने थे.

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साल 1970 में दो फ़िल्में आईं, जिनके गाने आज भी होली के अवसर पर सुनाई दे जाते हैं. पहला है राजेश खन्ना और आशा पारेख की फ़िल्म 'कटी पतंग'.

एक विधवा माधवी (आशा पारेख) सामाजिक कुप्रथाओं के चलते होली नहीं खेलती है. लेकिन कमल (राजेश खन्ना) होली पर माधवी को न छोड़ने का ऐलान करते हुए गाते हैं, 'आज न छोड़ेंगे हमजोली'.

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इसके बाद आया अस्सी का दशक जब 'होली, कब है होली..?' और 'बुरा ना मानो होली है' सरीखे डायलॉग मिले. इस दशक में सबसे ज़्यादा रंगो के पर्व को भुनाया गया.

साल 1973 आई वहीदा रहमान और धर्मेन्द्र की फ़िल्म 'फ़ागुन' का गाना 'फ़ागुन आयो रे' और इसी साल आई 'नमक हराम' का गाना 'नदिया से दरिया' भी होली के सफर के अहम पड़ाव है.

आर डी बर्मन के कम्पोज़ीशन में तैयार इस गाने को किशोर कुमार ने गया है. इसे रेखा और राजेश खन्ना पर फ़िल्माया गया.

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इसके बाद साल 1975 में आई फ़िल्म 'शोले'. रामगढ़ पर खूंखार डकैतों के हमले से अनजान गांव वाले 'होली के दिन दिल खिल जाते हैं' पर झूमते नाचते नज़र आते हैं.

इसी साल आई सुनील दत्त की फ़िल्म 'ज़ख़्मी' में वो डफ़ली बजाते हुए 'होली आली रे आली रे' गाते हुए नज़र आते हैं. होली के इस गाने से वो फ़िल्म में अपने दुश्मनों के ख़िलाफ़ जंग छेड़ने का ऐलान करते हैं.

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फिर साल 1978 में बासु चटर्जी के निर्देशन में बनी फ़िल्म 'दिल्लगी' में धर्मेन्द्र पर फ़िल्माया गया गाना 'कर गई मस्त मुझे' का नम्बर आता है. इस फ़िल्म में धर्मेन्द्र के साथ हेमा मालिनी भी मुख्य भूमिका में हैं.

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अब बात करते हैं उस गाने की, जो होली का एंथम कहा जाता है. साल 1981 में आई फ़िल्म 'सिलसिला' का 'रंग बरसे भीगे चुनर वाली' होली पर गाये और बजाये जाने वाले गानों में पहले नंबर पर आता है.

साल 1982 में आई फ़िल्म 'राजपूत' का 'भागी रे भागी ब्रिज की बाला' भी होली के गीतों में प्रमुख कहा जाता है. इसी साल आई राकेश रोशन की फ़िल्म 'कामचोर' का गाना 'रंग दे गुलाल मोहे' ने मिलन- जुदाई के रंग को परदे पर दिखाया.

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मुंबई की गलियों में खेली जाने वाली होली को साल 1984 में आई फ़िल्म 'मशाल' के गाने 'होली आई, होली आई' में बख़ूबी दिखाया गया है. अनिल कपूर और रति अग्निहोत्री पर इस गाने को फ़िल्माया गया है.

इसके बाद साल1985 में आई फ़िल्म 'आख़िर क्यों' के गाने 'सात रंग में खेले' में रिश्तों के बदलते रंगों को नायिका स्मिता पाटिल देखती हैं. स्मिता के अलावा राकेश रोशन और टीना मुनीम भी इस गाने में नज़र आती हैं.

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90 के दशक के आते-आते कई फ़िल्मों में होली के गीत सुनने को मिले. इन्हीं में से एक है साल 1993 में आई फ़िल्म 'डर' का गाना 'अंग से अंग लगाना सजन हमें ऐसे रंग लगाना'.

जूही चावला, सनी देओल की फ़िल्म में शाहरुख़ नकारात्मक भूमिका में थे.

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साल 2000 की फ़िल्म 'मोहब्बतें' का गाना कुछ-कुछ शहरी होती होली के इर्द-गिर्द बुना गया था. इस फ़िल्म का गाना 'सोनी सोनी अंखियों वाली' आज भी युवा वर्ग में काफ़ी लोकप्रिय है.

इसके अलावा साल 2003 में आई फ़िल्म 'बाग़बान' में अमिताभ बच्चन और हेमा मालिनी पर फ़िल्माया गया गाना 'होली खेले रघुवीरा' भी होली के गानों में अलग स्थान रखता है.

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कहते हैं कि इस गीत की शूटिंग के समय अमिताभ बच्चन ने पहले ख़ुद को होली के रंगो में रंगा और फिर उन्होंने हेमा मालिनी के साथ इस मस्ती भरे गीत को बिना किसी रीटेक के ओके कर दिया.

साल 2005 में आई फ़िल्म 'वक्त- द रेस अगेंस्ड टाइम' में अक्षय कुमार और प्रियंका चोपडा़ पर फ़िल्माया गीत 'डू मी ए फेवर लेट्स प्ले होली' में कुछ आधुनिकता मिलाने की भी कोशिश हुई.

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इसके बाद साल 2013 'ये जवानी है दीवानी' का गाना 'बलम पिचकारी' और साल 2014 में आई फ़िल्म 'रामलीला' का गाना 'लहू मुंह लग गया' भी युवाओं में लोकप्रिय है.

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