'स्टीरियोटाइप' होना बुरी बात नहीं- नक्काश

  • 12 अप्रैल 2016

फ़िल्म 'बजरंगी भाईजान' के गाने 'सेल्फ़ी ले ले रे..' से मशहूर होने वाले गायक नक्काश अजीज़ का मानना है कि एक तरह के गाने गाना कोई बुरी बात नहीं है.

बॉलीवुड के कई वरिष्ठ गायक इन दिनों हिंदी फ़िल्मों में अपनी शुरुआत कर रहे गायकों पर टिप्पणी करते हुए कहते हैं कि आजकल के गायक एक ही तरह के गाने गाते हैं, जिसकी वजह से वे ज़्यादा दिनों तक नहीं चलेंगे.

इन दिनों लोकप्रिय हो रहे फ़िल्म 'फैन' का गाना 'जबरा फैन' में अपनी आवाज़ देने वाले नक्काश कहते हैं, "मेरे हिसाब से एक तरह के गाने गाने में कोई बुराई नहीं है."

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वे आगे कहते हैं, "जो लोग हमें 'स्टीरियोटाइप' कह कर बुलाते हैं, वे हमारी तुलना सोनू निगम या उदित नारायण जी से करते है, उनके समय का संगीत अलग हुआ करता था."

नक्काश का मानना है कि आज फ़िल्मी संगीत काफी बदल गया है, उनके मुताबिक़ "पहले गानों में सिर्फ़ भारतीय संगीत सुनाई देता था, लेकिन अब संगीत काफ़ी आधुनिक हो गया है."

वे उदहारण देते हुए कहते हैं, "अरिजीत सिंह धीमे गाने बेहतर गाते हैं, उसी तरह मैं तेज़ गाने अच्छे गाता हूं, तो स्टीरियोटाइप होने वाली बात तो आनी ही नहीं चाहिए."

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वे आगे कहते हैं, "मुझसे लोग पहले कहा करते थे कि तुम सिर्फ़ आइटम नंबर ही क्यों गाते हो, तो मैं उनसे हंस के कहता था कि किसी को तो करना होगा न, तो मैं क्यों नहीं."

नक्काश से जब पूछा गया कि उन्हें सलमान पर फ़िल्माया उनका गाना ज़्यादा पसंद है या शाहरुख़ पर फ़िल्माया 'जबरा फ़ैन', तो वे मुस्करा के कहते हैं, आपने मुझे परेशानी में डाल दिया.

हालांकि, थोड़ी देर बाद वे ख़ुद ही बोल पड़े, "मुझे अकेले गाना ही ज़्यादा पसंद है जैसा की मैने 'फ़ैन' में किया".

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फिर क्या था बीबीसी के स्टूडियो में मौजूद सभी लोगों को नक्काश ने अपनी आवाज़ से 'जबरा फ़ैन' बना डाला.

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