एयरपोर्ट पर कुत्ते कर रहे हैं इंसान का इलाज

  • 20 अप्रैल 2016

मुंबई के अंतर्राष्ट्रीय एयरपोर्ट पर तीन ऐसे ख़ास कुत्ते हैं, जो यात्रियों के तनाव और थकान को दूर करने का काम करते हैं.

कुत्तों को सबसे वफ़ादार जानवर माना जाता है, लेकिन चरमपंथ के बढ़ते ख़तरे के चलते इन्हें सुरक्षा इंतज़ामों में तरजीह दी जाती है.

आमतौर पर इन्हें एयरपोर्ट पर यात्रियों के सामान में संदिग्ध वस्तु भांपने के लिए रखा जाता है, लेकिन मुंबई के अंतरर्राष्ट्रीय एयरपोर्ट पर तीन ऐसे कुत्तों को रखा गया है, जिनका काम थोड़ा अलग ही है.

दरअसल, ये कुत्ते यात्रियों को उनकी लम्बी यात्रा के थकान और तनाव से राहत दिलाने का काम करते हैं.

भारत के सबसे व्यस्त एयरपोर्ट में से एक मुंबई के अंतरष्ट्रीय एयरपोर्ट पर हर रोज़ हज़ारों की तादाद में यात्री आते और जाते हैं.

अधिकतर यात्रियों को यात्रा को लेकर कई प्रकार की चिंताएं होती हैं. यात्रियों की इसी चिंता को दूर करने के लिए तीन कुत्तों को रखा गया है.

इस अनोखे पहल से यात्रियों में उत्साह देखने को मिला. स्कॉटलैंड की लुईस ने हों या भारतीय यात्री रूना, जिन्होंने भी इन कुत्तों को देखा, वो इनके पास आए और समय बिताया.

एक घंटे में तक़रीबन 4 - 5 बार इन थेराप्यूटिक कुत्तों के पास लौटे स्वामी कहते हैं, "लम्बी लाइन में खड़े होने से अच्छा है कि मैं इन प्यारे जानवरों के साथ वक़्त बिताऊं."

पुणे के एनीमल एंजेल द्वारा तैनात इन कुत्तों का नाम - गोल्डी, पेपे और शाइन है. इन्हें ख़ास प्रकार की ट्रेनिंग भी दी गई है.

इस ख़ास ट्रेनिंग के बारे में एनीमल एंजेल की संचालक मीनल कविश्वर कहती हैं, "इन्हें यात्रियों के तनाव को भांपने कर उनके साथ खेलने की ख़ास ट्रेनिंग दी गई है.''

मीनल ने बताया कि गोल्डन रेट्रीवर गोल्डी हमारी सबसे वयस्क सदस्य है. इससे पहले उसने 7/11 के पीड़ितों के साथ काम किया था.

शुक्रवार से रविवार शाम के 7 बजे से रात के 1 बजे तक तैनात इन कुत्तों की देखरेख कर रहे आकाश लोणकर कहते हैं कि इनकी ख़ास एक साल की ट्रेनिंग हुई है.

ट्रेनिंग के दौरान इन्हें कई अंजान लोगों से मिलवाया है, ताकि ये न तो घबराएं और न ही भौंके.

आकाश आगे कहते हैं, '' कई बार बच्चे ग़लत तरीक़े से उन्हें पकड़ते हैं, तब ये कुत्ते उन पर भौंकने के बजाय इशारे से बता देते हैं कि उन्हें तकलीफ़ हो रही है और उनका इशारा मिलते ही बच्चों के पास जाकर उन्हें सही तरीके से पकड़ना सीखाते हैं.''

हज़ारों की संख्या में एयरपोर्ट पर पर्यटकों की आवाजाही होती है, ऐसे में इन कुत्तों पर बहुत दबाव रहता है. उन पर पड़ने वाले दबाव बारे में हितेश साल्वे कहते हैं कि कुत्तों की गोल्डन रेट्रीवर प्रजाति लोगों से घुलने मिलने में बहुत माहिर होती है.

इनके लिए यह कोई काम नहीं है, बल्कि यह तो इनकी फितरत है.

वहीं फ़िल्मों में जानवरों को प्रशिक्षण देने वाले एनीमल ट्रेनर जावेद खान का कहना है, "गोल्डन रेट्रीवर कुत्तों की प्रजाति सिर्फ़ खाने की नहीं, बल्कि प्यार की भी भूखी होती है.''

वो आगे कहते हैं कि उन्हें लोगों का साथ पसंद है. उनके लिए एयरपोर्ट जैसा माहौल किसी चिंता का विषय नहीं है. इस पहल से लोगों के मन से कुत्तों के प्रति डर भी निकला जा सकेगा.

यात्रियों की सहुलियत को देखते हुए इन कुत्तों को एयरपोर्ट में ऐसी जगह रखा गया है, जहां कुत्तों के चाहने वाले जा सकते है और जो इनसे दूरी रखना चाहते हों वो दूर रह सकते हैं.

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