'सलमान बड़े हो गए हैं, अपने मामले खुद देखते हैं'

  • 18 मई 2016

"सलीम साहब, क्या आप अभी आराम से बात कर सकते हैं ? यह सही वक़्त है ?"

"मैं हर वक़्त आराम से ही बात करता हूं, आप देखिए, आप जल्दी में तो नहीं ?"

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जब गुफ़्तगू की शुरुआत कुछ ऐसे वाक्यों से हो तो यकीन मानिए आप एक पल के लिए सोच में पड़ जाते हैं कि क्या हम वाकई एक फ़िल्मी शख़्सियत से बात कर रहे हैं !

आमतौर पर जल्दी में रहने वाले, या पहले से ही इंटरव्यू की समयसीमा तय कर देेने वाले बॉलीवुड कल्चर में ऐसा किसी से सुनने को मिले तो हैरानी होती ही है.

मशहूर लेखक और अभिनेता सलमान ख़ान के पिता सलीम ख़ान बेहद ठहराव के साथ बात करते हैं और बीबीसी को दिए इस इंटरव्यू में उन्होंने फ़िल्मों, लेखन, सलमान और देश जैसे कई मुद्दों पर अपनी राय रखी.

सलीम-जावेद बॉलीवुड की एक करिश्माई लेखक जोड़ी है, जिसने 25 में से 21 फ़िल्में हिट दी हैं.

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सलीम बताते हैं,"मैं अच्छा दिखता था, तो मुझे एक्टिंग करने के लिए, कैमरा के सामने रहने के लिए बुलाया गया था. 400 रुपए महीने का मेहनताना था, सो हम आ गए, लेकिन एक्टिंग कुछ ख़ास जमी नहीं."

यहां जावेद अख़्तर से उनकी मुलाक़ात हुई क्योंंकि जहां सलीम ख़ान निर्देशक अबरार अल्वी के पास सहायक के तौर पर कार्यरत थे वहीं जावेद, कैफ़ी आज़मी के पास और अबरार और कैफ़ी साहब अगल बगल में रहते थे.

सलीम बताते हैं,"हमारी जोड़ी बनी, मैं कहानी लिखता वो (जावेद) उन्हें शब्द देते. हमने असफलता ज़रा कम ही देखी. आप मानिए की हमारा ट्रैक रिकॉर्ड 90% का था."

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सलीम ख़ान को आज भी दुख है कि जावेद के साथ उनकी जोड़ी टूटी और भले ही इस बात को वक़्त हो चला हो लेकिन इसकी टीस उनमें आज भी बाकी है.

वो कहते हैं,"रिश्ता यारी का हो, पति-पत्नी का हो भले ही ऑफ़िस का हो, जब जोड़ी टूटती है तो यक़ीन मानिए दुख होता है. मुझे आज भी दुख है कि हम साथ नहीं हैं और यह ठीक भी नहीं है लेकिन शायद इस रिश्ते की एक्सपायरी डेट आ गई थी."

वो क्यों अलग हुए इस बात पर कोई टिप्पणी करने से बचते हुए सलीम ख़ान बस इतना कहते हैं,"कुछ चीज़ें होनी ही होती हैं और फिर आप कितनी भी कोशिश कर लीजिए आप उन्हें रोक नहीं सकते, कभी भी."

हाल ही में सलीम ख़ान अपना नाम राज्यसभा के लिए नामित होने की ख़बरों के कारण से चर्चा में रहे लेकिन वो ख़ुद को राजनीति से दूर मानते हैं.

सलीम बताते हैं,"मैं जानता हूं मेरा नाम ख़बरों में था और मेरे लिए यह बेहद सम्मान की बात होती लेकिन मेरे पास ऐसा कोई प्रस्ताव आया ही नहीं था."

वो सरकार या उसके कामकाज पर भी किसी टिप्पणी से बचते हुए कहते हैं,"देखिए राजनीति वो फ़िल्म है जो मैंने देखी ही नहीं और अगर आप मुझसे ऐसी फ़िल्म का रिव्यू मांगेंगे जो मैंने देखी ही नहीं तो फिर मैं उस पर क्या कमेंट करूं."

लेकिन वो इतना ज़रूर मानते हैं कि किसी भी सरकार का लेखा जोखा 5 साल बाद ही बनना चाहिए.

सलीम ख़ान बॉलीवुड के सबसे बड़े स्टार सलमान ख़ान के पिता भी हैं और सलमान ख़ान बीते कुछ सालों से विवादों में घिरे रहे हैं, ऐसे में एक पिता की हैसियत से वो इन मामलों को कैसे देखते हैं.

सलीम कहते हैं,"मैंने राजकपूर साहब से एक बात सीखी है, एक वक्त के बाद बच्चों के मामलों में बोलना बंद कर देना चाहिए क्योंकि एक वक़्त बाद वो समझदार हो जाते हैं."

वो आगे कहते हैं, "सलमान के बारे में जिन मामलों पर मुझे जानकारी है, मैंने हमेशा सामने आकर बात की है. हाल ही में उनके ओलिंपिक के गुडविल अंबेसडेर के रूप में चुने जाने को लेकर सवाल उठे थे, मैंने तब भी सलमान के पक्ष में अपनी बातें रखी थी."

लेकिन क्या एक पिता के तौर पर वो परेशान नहीं होते.

सलीम आगे जोड़ते हैं,"साहब, अब क्या हम परेशां होंगे, बच्चे बड़े हो गए. 40-50 साल की उम्र है, 30 साल से इंडस्ट्री में हैं. अब अपने मामले वो ख़ुद सुलझाते हैं."

सलमान के अलावा हाल ही में अरबाज़ भी निजी ज़िंदगी में एक मुश्किल समय से ग़ुज़रे ऐसे में परिवार को परेशान देखकर क्या सलीम ख़ान परेशान नहीं होते.

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सलीम बस इतना कहते हैं,"यहां तक पहुंचने का सफ़र बड़ा लंबा है और इन सारी चीजों की आदत पड़ जाती है. कुछ लोगों को आपसे तकलीफ होती है, वो आपको तकलीफ देने की कोशिश करते हैंं लेकिन वो वक़्त भी बीता, ये भी बीत जाएगा, बस एक परिवार के तौर पर हम साथ रहते हैं."

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