नेता और अफ़सर भी बदलें भेष : सोनू निगम

गायक सोनू निगम का कहना है कि अफ़सर और नेताओं को अपनी एअरकंडीशन गाड़ियों और दफ़्तरों से निकलकर आम लोगों के बीच जाना चाहिए.

बीते दिनों गायक सोनू निगम का भिखारी के भेष में सड़कों पर गाते हुए एक वीडियो सोशल मीडिया पर काफ़ी चर्चित रहा.

इस बारे में वो कहते हैं, ''धूप-मिट्टी में बैठकर गाना इतना आसान नहीं था. वह भी तब जब मेरे साथ ना मेरे मैनेजर थे और ना ही कोई टीम. ऐसे में यदि कोई मुझे पहचान लेता, तो संभलना बेहद मुश्किल हो जाता.''

'कल्चरल मशीन' की साझेदारी में सोनू निगम का सोशल एक्सपेरीमेंट क़ामयाब हुआ और अब सोनू निगम चाहते है कि देश के नेता और अफ़सर भी ऐसा ही कुछ करें.

सोनू कहते हैं, "नेता और अफ़सर भी समाज के भीतर जाकर सच्चाई देखें क्योंकि एअरकंडीशन गाड़ियों में घूमकर और एअरकंडीशन दफ़्तरों में बैठकर देश नहीं चलाया जा सकता.''

उदहारण देते हुए वे कहते हैं, ''पहले राजा-महाराजा भी तो भेष बदलकर लोगों के बीच जाते थे.''

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सोनू मानते हैं कि लोगों के बीच जाकर ही समाज की असली तस्वीर देखी जा सकती है.

अपने इस अनुभव को सोनू ज़िंदगी के एक सबक के रूप में देखते हैं.

वे कहते हैं, "हम आज इतने व्यस्त हो गए हैं कि हर समय भागते रहते हैं और जिस ज़मीन पर भाग रहे हैं उस ज़मीन की सराहना भी नहीं करते."

ये अनुभव बेहद ख़ास रहा, लेकिन उन्हें अपनी गायकी में ख़ामियां भी नज़र आईं.

साथ ही उनका यह भी मानना है कि उनकी आवाज़ में कुछ कशिश ज़रूर है, तभी व्यस्त होने के बावजूद लोग उनका गाना सुनने के लिए दो पल ठहरे.

श्रोताओं को अच्छे संगीत से रूबरू करने को आतुर सोनू का कहना है कि भारत में ग़ैर फ़िल्मी संगीत को भी जगह मिलनी चाहिए जैसे ग़ज़ल आदि.

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