'संगीत में इंसानो की जगह मशीनों ने ले ली है'

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साल 1980 में आई फ़िल्म 'कर्ज़' के मशहूर तराने 'एक हसीना थी, एक दीवाना था' का तर्ज़ बनाने वाले गोरख शर्मा का कहना है कि संगीत की दुनिया में इंसानो की जगह मशीनों ने ले ली है.

हिंदी फ़िल्म इंडस्ट्री को बेस गिटार की सौग़ात देने वाले गोरख शर्मा मशहूर संगीतकार जोड़ी लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल के प्यारेलाल के छोटे भाई हैं.

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इंडस्ट्री के वर्तमान दौर को गोरख 'मशीनी' बताते हुए कहते हैं, '' संगीत की दुनिया में इंसानो की जगह मशीनों ने ले ली है.''

जब उनसे पूछा गया कि बड़े भाई की तरह उन्होंने संगीत निर्देशन में हाथ क्यों नहीं आजमाया?

इसके जवाब में वे कहते है, "मैं उन दिनों मैन्डोलिन और गिटार की परफार्मेंस और उनकी रिकॉर्डिंग में इतना व्यस्त रहता था कि संगीत निर्देशन के लिए वक़्त ही नहीं मिल पता था."

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गोरख बताते हैं कि 12 साल की उम्र से ही मैं मैन्डोलिन बजाने लगा था. यहां तक कि मैं संगीतकार और गायक हृदयनाथ मंगेशकर (लता मंगेशकर के भाई) के शोज़ में मैन्डोलिन बजाता था.

महज़ 14 साल की उम्र में उन्होंने गुरु दत्त की फ़िल्म 'चौदवीं का चांद' गानें में मैन्डोलिन बजाया था.

गोरख कहते हैं कि गिटार बजाने का हुनर मैंने अनिबाल केस्ट्रो से सीखा था.

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अभी तक गोरख ने शंकर जयकिशन, लक्ष्मीकांत प्यारेलाल, आनंद जी-कल्याण जी, पंडित हरिप्रसाद चौरसिया, रवि, नदीम- श्रवण, राजेश रोशन जैसे बड़े संगीतकारों की धुनों में अपने गिटार, मैन्डोलिन और रुबाब से जान डाली है.

बीते ज़माने को याद करते हुए गोरख बताते हैं, ''उस समय अंग्रेज़ी संगीतकारों का दबदबा था, लेकिन बहुत कम लोग अंग्रेजी में संगीत (स्टाफ नोटेशन) पढ़ पाते थे, जिसकी वजह से उन्हें काम नहीं मिल पता था.''

वे कहते हैं, "अपने स्टॉफ़ में मैं उन चुनिंदा लोगों में से था, जो स्टॉफ़ नोटेशन पढ़ लेता था. हालांकि़, इसका श्रेय वो मेरे संगीतकार पिता पंडित रामपरसाद शर्मा उर्फ़ 'बाबाजी' को जाता है.''

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बीते दिनों को याद करते हुए वे कहते हैं, "तब पूरा दिन रिकॉर्डिंग चलती थी और 70 से 100 संगीतकारों को एक साथ एक गाने की सही धुन निकालनी होती थी. किसी एक से भी चूक हो जाती तो सबको दोबारा फिर से बजाना पड़ता था.''

वो बताते हैं, "तब एसी तो होते नहीं थे, तो हम एक बंद कमरे में घंटों रिकॉर्डिंग करने के बाद तुरंत सारे खिड़की दरवाज़ें खोल देते थे या सब पंखे के आगे खड़े हो जाते.''

1,000 से भी ज़्यादा सुपरहिट गाने उनके खाते में दर्ज़ हैं, जैसे किशोर कुमार की फ़िल्म 'मिस्टर एक्स इन बॉम्बे' का 'मेरे महबूब क़यामत होगी', 'अमर अक़बर एंथोनी' का 'माय नेम इज़ एंथोनी गोंसाल्विस', 'डर' फ़िल्म का 'जादू तेरी नज़र' हैं.

लगभग 70 वर्ष के गोरख जी आज भी स्टेज शोज़ करते हैं.

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