नहीं रहे कॉमेडियन रज़्ज़ाक ख़ान

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हिंदी फ़िल्मों के जाने माने हास्य कलाकार रज़्ज़ाक ख़ान का मुंबई में निधन हो गया है.

मोहरा, राजा हिंदुस्तानी, इशक़, हेरा फ़ेरी और भागमभाग जैसी फ़िल्मों में उन्होंने लोगों को अपने स्टाइल और आवाज़ से ख़ूब हँसाया है.

कहते हैं कि लोगों को हँसाना बहुत मुश्किल काम है. ये बात फ़िल्मों में काम करने वाले उन हास्य अभिनेताओं से बेहतर कौन समझ सकता है जो फ़िल्मों के ज़रिए बार-बार और लगातार दर्शकों को हँसाते, गुदगुदाते हैं.

कई फ़िल्मी हस्तियों ने उन्हें श्रद्धांजलि दी है. ऋषि कपूर ने लिखा है, रेस्ट इन पीस, रज़्ज़ाक ख़ान जिनके साथ मैने कई बार काम किया है

वहीं राजपाल यादव ने लिखा है, "दिल बैठ गया ये ख़बर सुनके। मेरे दोस्त #RazakKhan अब नहीं रहे. मेरे पास कोई शब्द नहीं है. #RIP."

(2007 में बीबीसी को लंदन में रज़्ज़ाक खान से बात करने का मौका मिला था. पेश है रज़्ज़ाक ख़ान से बातचीत के मुख्य अंश)

आपको लोग कॉमेडी के लिए जानते हैं...कोई कॉमेडी किंग की संज्ञा देता है.. कैसा लगता है.
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ये किंग की संज्ञा देकर तो आप एक बोझा लाद रहे हो. कौन किंग, काहे का किंग. लोग पसंद करते हैं बहुत बड़ी बात है और प्रोड्यूसर पैसा देता है, इज़्ज़त देता है ये उससे भी बड़ी बात है. काम की वजह से ही तारीफ़ मिलती है. किंग का लेबल मिलने से तो समझो पैक-अप है.

बार-बार लगातार हर फ़िल्म में लोगों को हँसाना आपके लिए कितना मुश्किल या आसान होता है. कभी मन में आशंका नहीं रहती है कि अगर कोई डायलॉग बोला या कॉमिक सीन किया और लोगों को हँसी नहीं आई?
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हम लोग एक्टर हैं, कोई स्टैंड-अप कॉमेडियन नहीं है. निर्देशक हमें जो सीन देता है, उसका आनंद उठाते हुए हम लोगों को हँसाने की कोशिश करते हैं.कागज़ पर जो लिखा है उसे अपने अभिनय से और बेहतर करने की कोशिश होती है.

अच्छी कॉमेडी क्या है आपके लिए?

कॉमिक टाइमिंग ऊपरवाला देता है. वो आपको फ़नी बोन दे देता है. आपको भी नहीं पता चलता कि आपने क्या बोला, पर वो टाइमिंग सही हो जाती है.

टेलीवीज़न पर कॉमेडी शो की मानो भरमार है. उनके स्तर के बारे में क्या कहेंगे.

सबसे बड़ी बात ये है कि कॉमेडी शो पर आने वाले ये लोग आपका मनोरंजन कर रहे हैं. ये फ़ुल टाइम जॉब है- कॉमेडी करना बहुत गंभीर काम है. लेकिन कुछ लोग मानते हैं कि इनमें से कई शो ऐसे हैं जिन्होंने कॉमेडी को मानो मज़ाक बना दिया है.मेरे हिसाब से तो ये शो एक उपलब्धि की तरह हैं. आप खड़े-खड़े हज़ार लोगों को हँसा रहे हो,मामूली बात नहीं है.

आप एक साथ कई फ़िल्मों में काम करते हैं- कई तरह की भूमिकाएँ होती हैं .काम करने की ऊर्जा कहाँ से मिलती है.

अंत में दर्शक संतुष्ट होना चाहिए हमारे काम से बस.

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