बॉक्स ऑफिस पर उड़ेगी 'उड़ता पंजाब'?

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फिल्म: उड़ता पंजाब

निर्देशक: अभिषेक चौबे

कलाकार: शाहिद कपूर, करीना कपूर ख़ान, आलिया भट्ट, दलजीत दोसांझ

रेटिंग: ***1/2

जब भी किसी फिल्म के इर्दगिर्द कोई विवाद उठता है तो सिनेमाप्रेमी उस फिल्म को देखने के लिए बेताब हो उठते हैं.

फिल्म से जुड़ा विवाद जब हर अख़बार और टीवी न्यूज़ में सुर्ख़ी बनता है तो लोग बरबस कह देते हैं- इस फिल्म को ज़रूर देखना चाहिए.

अभिषेक चौबे के निर्देशन में बनी 'उड़ता पंजाब' पर ये बात पूरी तरह लागू होती है. फिल्म के निर्माता अनुराग कश्यप लगभग एक महीने से अपनी फिल्म के लिए जूझ रहे थे और अब एक विजेता बनकर उभरे हैं.

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फिल्म के कथानक में नशीले पदार्थों से जुड़ी पंजाब की उस गंभीर और कुरूप तस्वीर को उभारा गया है जो मीडिया के पन्ने पर बीते दो दशकों में नज़र आती रही है.

फिल्म का कथानक कुछ ऐसा है जैसे चार ट्रैक पर चार अलग-अलग गाड़ियां चल रही हैं जो कभी कहीं किसी एक जगह पर नहीं मिलती हैं. ऐसा शायद इसलिए क्योंकि पटकथा में जान-बूझकर ऐसी ही कल्पना की गई थी. इसमें फिल्मी मसाले के साथ रोमांस का तड़का भी है.

सरताज की भूमिका निभा रहे दलजीत दोसांझ सीधी बात करने वाले और सिद्धांतों पर चलने वाले पुलिस अधिकारी हैं.

फिल्म में करीना कपूर डॉक्टर बनी हैं, उनका नाम प्रीति साहनी है जो अपना अधिकतर समय उन युवाओं के बीच बिताती है जो ड्रग्स के दलदल में गले तक डूब चुके हैं.

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दूसरी ओर मेरी जेन (आलिया भट्ट) है जो बिहार से आती है, हॉकी की चैंपियन रही है लेकिन अब पंजाब के खेतों में काम करके अपना पेट पाल रही हैं. मेरी जेन भी ड्रग्स की दुनिया से ख़ुद को दूर नहीं रख पाती.

इन सभी किरदारों के बीच टॉमी सिंह (शाहिद कपूर) हैं जो रॉक स्टार हैं, पंजाबियों के बीच ख़ासतौर पर युवाओं में मशहूर हैं.

टॉमी सिंह भी कोकीन के आदी हैं और इस कदर नशे की गिरफ्त हैं कि यथार्थ की दुनिया से उनका कोई वास्ता नहीं है.

कथानक के हिसाब से इन सभी किरदारों के जीवन में नाटकीय मोड़ आते हैं, रिश्ते-नाते टूटते हैं. फिल्म में नेता और पुलिस अधिकारी भी दिखाए गए हैं जिनकी मदद से नशे का कारोबार फलता-फूलता है.

युवाओं और पुलिसवालों के मुंह से निकलते शब्द फिल्म में अपनी एक अलग छाप छोड़ते हैं.

शाहिद कपूर ने अपने किरदार में जान डालने की भरसक कोशिश की है जो पर्दे पर नज़र भी आता है. कसर आलिया भट्ट ने भी नहीं छोड़ी है, लेकिन बिहारी बोल उनके मुंह से उतने सटीक नहीं निकले हैं.

जहां तक करीना कपूर के अभिनय की बात है, लगता है पटकथा में उनका किरदार सही तरह से लिखा नहीं गया जिसकी वजह से वो इस फिल्म में थोड़ी फीकी लगी हैं.

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पंजाब में विधानसभा के चुनाव नज़दीक हैं और सिनेमा में जनमत को प्रभावित करने की ताकत है इस फिल्म के आने के बाद नेताओं को अपने मतदाताओं से वादे करते समय ऐहतियात बरतनी होगी.

उड़ता पंजाब के बारे में ये बात कही जा सकती है कि ये फिल्म नेताओं की उस छिपी हुई तस्वीर को उजागर करती है जिसे वो मानने को अक्सर तैयार नहीं होते.

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हालांकि इस फिल्म को परफेक्ट भी नहीं कहा जा सकता. इसमें पुलिस अधिकारी और डॉक्टर के बीच रोमांस का तड़का ऐसा लगता है कि जबरन लगाया गया है.

फिल्म के कुछ नाटकीय मोड़ इतने नाटकीय भी नहीं है कि दर्शक उनका अंदाज़ा न लगा सके. ऐसी कुछ और भी बातें हैं, लेकिन फिर भी इस फिल्म को देखा जाना चाहिए.

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