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'बर्मनदा की धुनों को गुनगुनाने का दिल करता है'
 

 
 
एसडी बर्मन
महान संगीतकार सचिव देव बर्मन के जन्म को सौ साल हो गए हैं.

अस्सी से ज़्यादा फ़िल्मों का संगीत देनेवाले एसडी बर्मन की फ़िल्मों की फेहरिस्त में मिली, अभिमान, ज्वैल थीफ़, गाइड, प्यासा, बंदनी, सुजाता, टैक्सी ड्राइवर जैसी अनेक फ़िल्में हैं जिन्होंने इतिहास बनाया.

एसडी बर्मन न सिर्फ़ बेहतरीन संगीतकार थे बल्कि लोक धुनों को सजाने की कला में भी माहिर थे.

उनके गीतों को 40 से 50 साल हो गए हैं लेकिन आज भी वे फीके नहीं पड़े हैं और आज भी उन गानों को गुनगुनाने का दिल करता है.

प्यासा का एक गीत मुझे आज तक याद है, जाने क्या तूने कही...यह गाना आज भी पुराना नहीं लगता है.

बर्मनदा के बारे में फ़िल्म इंडस्ट्री में एक बात प्रचलित थी कि वो तंग हाथ वाले थे यानी ज़्यादा खर्च नहीं करते थे.

उन्हें पान खाने का बेहद शौक था और वो अपने पान भारतीय विद्या भवन, चौपाटी से मंगाते थे.

एक बार वो सेट पर आए तो मैंने उनसे कहा कि दादा एक पान मुझे दे दें. उन्होंने पान मुझे दे दिया.

गुरुदत्त वहीं थे, उन्होंने नाराज़ होकर कहा कि दादा मैं दिन रात आपके साथ काम करता हूँ और मैंने जब पान माँगा तो आपने मना कर दिया.

बर्मनदा ने उनसे कहा कि एक तो वहीदा लड़की है, दूसरे वो एक ही पान खाएगी, तुम तो हमारा पान का डब्बा ही ख़त्म कर दोगे. अगर तुम्हें पान खाना है तो अपने मंगाओ.

बर्मनदा का व्यक्तित्व अलग तरह का था. वो फ़ुटबॉल के शौकीन थे.

एक बार मोहन बागान की टीम हार गई तो उन्होंने गुरुदत्त से कहा कि आज वो खुशी का गीत नहीं बना सकते हैं. यदि कोई दुख का गीत बनवाना हो तो वो उसके लिए तैयार हैं.

दरअसल वो जो भी काम करते थे, पूरी तल्लीनता के साथ करते थे.

(मोहनलाल शर्मा के साथ बातचीत पर आधारित)

 
 
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