दिल्ली में संदिग्ध गोरक्षकों ने की दो की पिटाई

  • 16 सितंबर 2016
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Image caption दिल्ल पुलिस

टाइम्स ऑफ़ इंडिया की ख़बर है कि संदिग्ध गोरक्षकों ने एक मदरसे के बाहर दो युवकों की पिटाई कर दी.

टाइम्स ऑफ़ इंडिया अख़बार में छपी ख़बर के मुताबिक पश्चिमी दिल्ली में नांगलोई के नज़दीक प्रेम नगर में बुधवार शाम को दो व्यक्तियों की तब पिटाई हुई जब वो बक़रीद के मौके पर जिन भैंसों की कुर्बानी दी जा चुकी थी, उनके अवशेषों को ले जा रहे थे.

इस रिपोर्ट के मुताबिक संदिग्ध गोरक्षकों ने 25 वर्षीय हाफ़िज़ अब्दुल ख़ालिद और 35 वर्षीय अली हसन को टेम्पो से बाहर निकाल कर रॉड से उनकी पिटाई की.

Image caption बलात्कार के ख़िलाफ़ प्रदर्शन (फ़ाइल फ़ोटो)

दिल्ली के मुंडका मेट्रो स्टेशन के पास 5 लोगों ने दो लड़कियों से सामूहिक बलात्कार किया है.

हिन्दुस्तान टाइम्स की इस अख़बार के मुताबिक पीड़ित लड़कियों की उम्र 17 से 18 साल के बीच है.

पुलिस के मुताबिक बुधवार को वो अपने पुरुष दोस्तों के साथ घूमने गईं थी.

देर शाम वापसी में वो मुंडका मेट्रो स्टेशन पर रूककर उनसे बात कर रही थीं.

तभी 5 पुरूषों वहां पहुंचे और उनके दोस्तों के साथ मारपीट कर उन्हें भगा दिया और उनके साथ बलात्कार किया.

पुलिस ने चार अभियुक्तों को गिरफ़्तार किया है और पांचवे अभियुक्त की तलाश कर रही है.

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Image caption शिवपाल यादव

द हिन्दू अख़बार ने लिखा है कि उत्तर प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री शिवपाल सिंह यादव ने गुरूवार देर रात अखिलेश मंत्रिमंडल और पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष पद से त्यागपत्र दे दिया है.

हालांकि मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने उनका इस्तीफ़ा नामंजूर कर दिया है.

शिवपाल यादव के त्यागपत्र के फ़ैसले से संकेत मिलता है कि विवाद अभी थाम नहीं है.

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Image caption अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान

हिन्दुस्तान टाइम्स ने लिखा है कि देश के सबसे प्रतिष्ठित अस्पताल दिल्ली के एम्स के ठीक पीछे चिकनगुनिया के वायरस का सबसे ज़्यादा प्रकोप देखने को मिला है.

नगर निगम की एजेंसियों के 10 सिंतबर तक के आंकड़ों के मुताबिक़ एम्स के डॉक्टरों की रिहायशी कॉलोनी आयुर्विज्ञान नगर, पड़ोस के गौतम नगर और मस्जिद मोठ इलाक़े में इस साल चिकनगुनिया के सबसे ज़्यादा केस सामने आए हैं.

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Image caption गेंहूं (फ़ाइल फ़ोटो)

ब्रिटेन में जितना अन्न पैदा होता है उससे ज़्यादा भारत में बर्बाद हो जाता है.

हिन्दुस्तान टाइम्स ने लिखा है कि सरकारी अध्ययन में ये पता चला है कि भारत में ज़्यादा अन्न पैदा होता है लेकिन 6.7 करोड़ टन अऩ्न हर साल बर्बाद हो जाता है.

यह ब्रिटेन जैसे देशों की वार्षिक अन्न पैदावार से ज़्यादा है, और बिहार जैसे बड़े राज्य के सालभर की ज़रूरत के लिए काफ़ी है.

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