मुझे पता तो हो कि चुनाव लड़ कौन रहा है: अखिलेश

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उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने अपने चाचा शिवपाल यादव से मुलाकात के बाद मीडिया से बातचीत करते हुए कहा, "पार्टी में नेताजी का ही कहा माना जाएगा और मैं उन्हीं की कही बातों के मुताबिक़ काम कर रहा हूं."

उन्होंने कहा कि मैं प्रदेश अध्यक्ष से नहीं बल्कि अपने चाचा से मिलकर आ रहा हूं.

आगामी विधान सभा चुनाव में टिकट बँटवारे के मामले में उन्होंने कहा, "जब ये चुनाव मेरे इम्तिहान के रूप में देखे जा रहे हैं तो मुझे इतना तो पता ही होना चाहिए कि कौन लोग चुनाव लड़ रहे हैं."

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शनिवार को हुए घटनाक्रम में शिवपाल यादव को अखिलेश ने सिंचाई और राजस्व विभाग वापस दे दिए. यही नहीं, उन्‍हें चिकित्सा शिक्षा और लघु सिंचाई विभाग भी तोहफ़े के रूप में मिल गए.

लेकिन पीडब्ल्यूडी विभाग वापस नहीं मिला. इसे शिवपाल का पसंदीदा विभाग माना जाता है. इसे अखिलेश ने अपने पास ही रखा है.

पिछले कई दिनों से समाजवादी पार्टी के भीतर जो द्वंद्व चल रहा है उसके मुख्य किरदार अखिलेश यादव और शिवपाल यादव ही हैं. शिवपाल और अखिलेश की इस जंग में शिवपाल के समर्थक उन्हें इंसाफ़ दिलाने की मांग को लेकर लखनऊ और इटावा में कई जगह प्रदर्शन और नारेबाज़ी कर रहे थे. लेकिन शनिवार को अखिलेश के समर्थकों ने भी इस मामले में दो-दो हाथ करने की ठान ली और पार्टी कार्यालय के बाहर जमकर नारेबाज़ी की.

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ये नारेबाज़ी तब भी हो रही थी जब सपा प्रमुख मुलायम सिंह यादव कार्यकर्ताओं से बातचीत कर रहे थे. नारे लगाने वालों को मुलायम सिंह की डांट भी पड़ी लेकिन वो चुप नहीं हुए. इसी दौरान मुलायम सिंह ने एक बार फिर शिवपाल यादव की जमकर प्रशंसा की और यहां तक कह दिया कि शिवपाल ने उनके साथ जब पार्टी बनाई तब अखिलेश स्कूल में पढ़ रहे थे.

वहीं शिवपाल यादव भी बार-बार दोहरा रहे हैं कि वो वही करेंगे जो नेताजी यानी मुलायम सिंह कहेंगे.

अखिलेश यादव भी मुलायम सिंह की बात मान गए हैं और प्रदेश अध्यक्ष पद से भी मोह छोड़ दिया है.

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