महाराष्ट्र: 16 संगठनों का 'मराठा मूक मोर्चा'

  • संजय तिवारी
  • बीबीसी हिंदी डॉटकॉम के लिए
मूक मराठा मोर्चा

इमेज स्रोत, SANJAY TIWARI

इमेज कैप्शन,

पोलियो के शिकार जयकांत मोर्चे में शामिल होने के लिए अपनी ट्राइसाइकिल से दापोली से पुणे गए.

छोटे शहरों-कस्बों के बाद मराठा क्रान्ति मूक मोर्चा अब बड़े शहरों की ओर रुख कर रहा है.

नासिक में 24 सितंबर की कामयाबी के बाद 25 सितंबर को राज्य के दूसरे बड़े शहर पुणे में मोर्चा निकाला गया.

इस मोर्चे में कई सांसद, विधायक और मंत्री शामिल थे. इसके अलावा भाजपा, काँग्रेस और एनसीपी समेत लगभग सभी राजनैतिक पार्टियों के स्थानीय नेता मौजूद थे.

इमेज स्रोत, SANJAY TIWARI

इमेज कैप्शन,

संतोष भालेकर का मानना है कि मराठा समाज के लोगों को आरक्षण मिलना चाहिए.

मराठा क्रांति मार्च के आयोजकों ने 15 लाख लोगों के शामिल होने का दावा किया है. लिहाज़ा पुणे पुलिस ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए हैं.

अभी तक कहा यह कजा रहा था कि इस आंदोलन का कोई चेहरा नहीं है.

पुणे में रविवार को निकाले गए मोर्चा में पूर्व सांसद अजित पवार, एनसीपी से सांसद उदयनराजे भोंसले, शिवसेना से सांसद शिवाजीराव पाटील और सांसद श्रीरंग बारणे मौजूद थे. इसके अलावा राज्य मंत्री विजय शिवतारे , कांग्रेस के हर्षवर्धन पाटील, विश्वजीत कदम और भाई जगताप भी इस मौके पर मजूद थे.

स्थानीय संवाददाता संजय तिवारी ने बताया कि इस मोचे का अयोजना "मराठा सकल समाज'' ने किया. यह मूक मोर्चा 16 मराठा संगठनों का गठबंधन है.

इमेज स्रोत, RAKESH KADAM

पिछले कुछ समय से महाराष्ट्र के छोटे शहरों-क़स्बों, ज़िलों और तालुका मुख्यालयों में लोग सड़कों पर निकल रहे हैं.

मोर्चे के आयोजकों ने कई मांगें रखी हैं.

इमेज स्रोत, SANJAY TIWARI

इमेज कैप्शन,

मराठा मूक मोर्चा में शामिल शुभांगी साकोरे और सुप्रिया साकोरे आरक्षण और महिलाओं के पर होने वाले अत्याचार का विरोध अहम मानती हैं.

कुछ महीने पहले अहमदनगर ज़िले के कोपर्डी गांव में मराठा लड़की के साथ बलात्कार के बाद उसकी हत्या कर दी गई थी. इसका आरोप कुछ दलित लड़कों पर लगा था.

प्रदर्शनकारियों की मांग की थी कि कोपर्डी की घटना के फ़रार अभियुक्तों को जल्द से जल्द गिरफ़्तार किय जाए.

इमेज स्रोत, SANJAY TIWARI

इमेज कैप्शन,

मोर्चे में शामिल सुनील जगदाले उनकी पत्नी और बेटियां.

दूसरी ओर, मराठा समुदाय गुजरात के पटेलों और हरियाणा के जाटों की तरह ही आरक्षण की मांग भी कर रहा है.

उनकी तीसरी मांग दलित उत्पीड़न रोकथाम क़ानून में बदलाव करने की है. इस क़ानून के तहत दलित समुदाय के लोगों को जाति के नाम पर गाली देने या अपमानित करने वाला आदमी गिरफ़्तार किया जा सकता है. उस पर मुक़दमा चलाया जा सकता है.

मराठा समुदाय के लोगों का आरोप है कि इस क़ानून का बड़े पैमाने पर दुरुपयोग हो रहा है. यह केंद्र का क़ानून है, इसलिए इसमें संशोधन केंद्र सरकार ही कर सकती है.

इमेज स्रोत, ASHIS JADAV

प्रदर्शनकारियों का कहना है कि किसानों के लिए पेंशन शुरू की जाए और किसान आत्महत्याओं को रोकने के लिए कदम उठाए जाएं.

महाराष्ट्र में बीते कई सालों में ख़ुदकशी करने वालों में मराठाओं की तादाद सबसे अधिक रही है.

इमेज स्रोत, SANJAY TIWARI

इमेज कैप्शन,

पुणे मराठा मोर्चा में शामिल एक प्रदर्शनकारी

अब तक 14 जगहों पर 'मूक मोर्चा' निकाला जा चुका है. इस रैली में लाखों लोग बग़ैर कुछ बोले शामिल होते हैं.

पहला मूक मोर्चा औरंगाबाद में निकाला गया था. इसके बाद उस्मानाबाद, जलगांव. बीड, परभणी, हिंगोली. नादेड़, जालना, अकोला, नवी मुंबई, सोलापुर और नासिक में भी ऐसा मोर्चा निकाला जा चुका है.

इमेज स्रोत, SANJAY TIWARI

इमेज कैप्शन,

मराठा मूक मोर्चा में शामिल प्रदर्शनकारी मौन रहते हैं.

बुलडाणा. नंदुरबार, सांगली. बारामती और सतारा में भी मोर्चा निकाले जाने की योजना है.

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)