सैटेलाइट लॉँच- भारत की मोटी कमाई का ज़रिया

  • योगिता लिमये
  • बीबीसी संवाददाता
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भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान केंद्र (इसरो) ने अपने श्रीहरिकोटा केंद्र से सोमवार को पीएसएलवी सी-35 के ज़रिए सात उपग्रहों को प्रक्षेपित कर उन्हें उनकी कक्षा में स्थापित कर दिया है.

इसका मक़सद एससीएटीएसएटी-1 को अंतरिक्ष में स्थापित करना है. यह उपग्रह अंतरिक्ष की कक्षा से मौसम की भविष्यवाणी में मदद करेगा. पीएसएलवी जिन उपग्रहों को अपने साथ लेकर गया है उनमें अमरीका, कनाडा और अल्जीरिया के उपग्रह शामिल हैं.

इसी साल जून में इसरो ने पीएसएलवी के ज़रिए एक साथ 20 उपग्रहों को अंतरिक्ष में पहुँचाया था. जून में जो उपग्रह अतंरिक्ष में भेजे गए, उनमें भारत के तीन और 17 विदेशी उपग्रह थे.

सोमवार को पीएसएलवी के इस मिशन के साथ ही भारत कुल 79 विदेशी उपग्रहों को अंतरिक्ष में पहुंचाने वाला देश बन गया है. इसके साथ ही अंतरिक्ष अभियान से भारत को होने वाली कमाई भी 12 करोड़ डॉलर तक पहुँच गई है.

यह भारत के लिए एक अच्छी ख़बर है, जिसे अक्सर अंतरिक्ष कार्यक्रम पर पैसे ख़र्च करने की वजह से आलोचना झेलनी पड़ती है. इस वजह ये है भारत के सामने ग़रीबी और भूख जैसी कई समस्याएं हैं, जिनका सामना करने के लिए पैसों की ज़रूरत है.

इसरो के चेयरमैन एएस किरण कुमार का कहना है कि इसरो अपने काम को और ज़्यादा किफ़ायती बनाने की कोशिश कर रहा है.

उनका कहना है, "अपने देश की ज़रूरतों के लिए उपग्रह लॉँच करने के दौरान यान में मौजूद अतिरिक्त जगह के इस्तेमाल से हम अपने ख़र्च की भरपाई करने में सफल होंगे".

एक ही बार में कई उपग्रहों को लॉँच करने की क्षमता ने भारत को दुनिया के इस बाज़ार में एक बड़ा खिलाड़ी बना दिया है.

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सुष्मिता मोहंती अर्थ2 ऑर्बिट कंपनी की मुख्य कार्यकारी हैं

'अर्थ2 ऑर्बिट' ऐसी कंपनी है जो इसरो और निजी कंपनियों के बीच लॉँच डील कराने में मदद करती है.

कंपनी की सीईओ सुष्मिता मोहंती कहती हैं, "इस तरह के सैटेलाइट लॉँच की ज़रूरत बढ़ती जा रही है, क्योंकि नई कंपनियां व्यावसायिक तौर पर तैयार कई सैटेलाइट को एक साथ छोड़ने की योजना बना रही हैं".

भारत को इस व्यवसाय में, समय सीमा के भीतर कई क़ामयाब लॉँच पूरा करने का भी फ़ायदा मिल सकता है.

भारत अब हर साल क़रीब 12 लॉँच की योजना बना रहा है. यह साल 2015 के मुक़ाबले दोगुनी संख्या होगी.

मोहंती बताती हैं, "विदेशों से सैटेलाइट लॉँच कर पाना अब भी बहुत आसान नहीं है. सरकारी उपग्रह एजेंसी के रॉकेट से विदेशी व्यवसायिक उपग्रह को भेजने की प्रक्रिया काफ़ी जटिल है. इसमें नियम, समझौते और कानून जैसी कई अड़चनें हैं".

इसके अलावा वैज्ञानिकों को अब दूसरे देश की स्पेस एजेंसियों से ही नहीं, बल्कि स्पेस एक्स जैसी निज़ी कंपनियों से भी प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ रहा है.

भारत अभी तक केवल छोटे और हल्के विदेशी सैटेलाइट ही लॉँच कर रहा है. पीएसएलवी की मदद से भारत ने अभी तक लगातार 35 सफल लॉँच पूरे किए हैं.

लेकिन भारी सैटेलाइट लॉँच करने से होने वाली कमाई भी बहुत बड़ी होती है. इसलिए इस क्षेत्र से जुड़ी कई कंपनियों ने अपनी दरों में कटौती की है ताकि उन्हें ज़्यादा बिज़नेस मिल सके.

अगर भारत ज़्यादा बड़े उपग्रहों को अंतरिक्ष में पहुंचाने में सफल हो जाता है, तो इससे सैटेलाइट लॉंचिंग के बाज़ार में भारत की स्थिति और मज़बूत हो सकती है और भारत इससे अरबों डॉलर की कमाई कर सकता है.

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