सर्जिकल स्ट्राइक: दो मुल्क, दो नज़रिए

  • 30 सितंबर 2016

भारत ने जम्मू-कश्मीर नियंत्रण रेखा पर चरमपंथी ठिकानों पर सर्जिकल स्ट्राइक करने का दावा किया है जबकि पाकिस्तान की तरफ़ से इसे सीमा पर होनेवाली झड़प बताया जा रहा है, 'जो अकसर होती रहती हैं.'

हालांकि पाकिस्तान ने ये माना कि उसके दो सैनिक इस कार्रवाई में मारे गए हैं.

बीबीसी ने एक साथ दो रक्षा विशेषज्ञों - आईशा सिद्दिक़ा और राहुल बेदी से बात की. पाकिस्तान की आईशा सिद्दिक़ा ने वहां की सेना पर एक किताब - सोलजर्स ऑफ़ फोरच्यून, लिखी है - जबकि राहुल बेदी दिल्ली में रहते हैं.

भारतीय सेना के सर्जिकल स्ट्राइक पर आईशा सिद्दिक़ा का कहना था कि भारत के दावे के उलट पाकिस्तान कह रहा है कि ये आम सी झड़प थी जिससे लगता है कि पाकिस्तान की ओर से किसी जवाबी कार्रवाई की कोई बात नहीं है.

सिद्दिक़ा कहती हैं कि पाकिस्तान की तरफ़ कहा जा रहा है कि भारत झूठ बोल रहा है हालांकि उसने माना है कि उसके दो जवान मारे गए हैं.

राहुल बेदी कहते हैं कि इस मामले में दोनों मुल्क दो तरह की बातें कर रहे हैं लेकिन इसमें कोई शक नहीं कि भारतीय सेना ने नियंत्रण रेखा को पार कर कोई कार्रवाई की है.

बेदी कहते है कि भारतीय विदेश मंत्रालय ने 25 से 30 देशों के दिल्ली में मौजूद राजदूतों को बुलाकर इस मामले पर जानकारी दी है.

उन्होंने कहा कि पत्रकारों की भी बैकग्राउंड ब्रिफिंग की गई है जिससे ये ज़ाहिर होता है कि नियंत्रण रेखा को सेना या स्पेशल फोर्सेस ने पार किया है लेकिन उधर किस तरह की कार्रवाई हुई है इसपर हमें भारतीय फ़ौज या प्रवक्ता की बात को ही फ़िलहाल मानना होगा.

बेदी कहते हैं कि हमारे पास इस बात की स्वतंत्र तौर पर पुष्टि करने का कोई ज़रिया नहीं है.

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हमले में मारे जानेवालों की तादाद

राहुल बेदी का कहना है कि विदेश मंत्रालय और भारतीय फ़ौज ने जो बैकग्राउंड ब्रिफिंग की है उसमें कहा गया है कि पाकिस्तान की तरफ़ कई लोग हताहत हुए हैं.

इसे सही भी माना जा सकता है या नकारा जा सकता है लेकिन फ़ौज और राजनीतिज्ञों के बीच इस बात को लेकर एक ख़ुशी का माहौल है कि भारत ने पाकिस्तान के ख़िलाफ़ ठोस कार्रवाई की है.

सिद्दिक़ा कहती हैं कि भारतीय सेना को कुछ कर दिखाने के मौक़े की तलाश थी. जो शायद उसे मिल गया.

उनका कहना है कि भारतीय फ़ौज चरमपंथियों के जिन ठिकानों पर स्ट्राइक की बात कर रही है वो कुछ ठोस नहीं लगता है क्योंकि उड़ी पर हमला करनेवाले शायद उस इलाक़े में अब तक मौजूद नहीं होंगे.

ये पठानकोट हमले के मामले में भी देखा गया था कि जिन जगहों को हमलावरों के होने का शक किया जा रहा था, तलाश करने पर वहाँ कोई मौजूद नहीं पाया गया.

उनका कहना था कि इस मामले में बहुत सारे दावे हैं और उन दावों से इंकार भी है. लेकिन फिर भी भारतीय सेना का दावा भी सवालिया निशानों के घेरे से बाहर नहीं है क्योंकि अगर वो नियंत्रण रेखा के तीन या चार किलोमीटर पार भी गए हैं तो इस तरह की कार्रवाइयां कोई नहीं हैं और ऐसा होता रहता है.

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लेकिन ये क्या वाक़ई सर्जिकल स्ट्राइक ही था और इसमें चरमपंथी ही मारे गए हैं, यह जानने का कोई निष्पक्ष तरीका नहीं है. इसमें चरमपंथी मारे गए या आम लोग इसका शिकार हुए ये बहुत सारे सवाल हैं.

भारत-पाकिस्तान और दक्षिण एशिया में असर

सिद्दिक़ा का मानना है कि ये कहना मुश्किल है कि अगर तनाव बढ़ता है और बदले की कार्रवाई होती है तो मामला कहां जाकर रुकेगा.

आप देखेंगे कि अमरीका ने भी कहा है कि दोनों देशों को संयम रखने की ज़रूरत है.

वो सवाल उठाती है कि जहां भी आतंकवाद है उसपर लगाम लगाने और उसे ख़त्म करने की ज़रूरत है लेकिन क्या जंग ही इसका एक रास्ता है?

राहुल बेदी कहते हैं कि भारत में लोग जंग की बात पर जिस तरह से छाती तान रहे हैं वो भारतीय जनता पार्टी की राजनीति के लिए फ़ायदेमंद है.

बीजेपी बार-बार पाकिस्तान को लेकर कड़े रुख़ की बात करती रही है और संदेश देती रही है कि उड़ी के हमलावर को कड़ा जवाब देंगे उस स्थिति में हालात बेहतर होने की उम्मीद नहीं लगती.

दोनों देशों में बातचीत होनी चाहिए, पर यह इस समय होना नामुमकिन है.

आयशा सिद्दिक़ा मानती है कि बातचीत इसलिए होनी चाहिए कि भारत को पाकिस्तान में चीन के फ़ैक्टर को नज़रअंदाज़ नहीं करना चाहिए.

उन्होंने कहा कि जिस तरह पाकिस्तान चीन का क्लांइट स्टेट बनता जा रहा है, उसने हालात को थोड़ा और पेचीदा कर दिया है और फ़िलहाल अमन की बात करना बेमानी सा ही होगा.

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