पंजाब बीजेपी में फूट, आप, कांग्रेस नज़रे गड़ाए

  • 1 अक्तूबर 2016
इमेज कॉपीरइट PTI

विधान सभा चुनाव सर पर है लेकिन भारतीय जनता पार्टी पंजाब में ख़ुद को एकजुट रखने के जद्दोजहद में फंसी नज़र आ रही है.

पूर्व क्रिकेटर और तीन बार पाटी के सांसद रह चुके नवजोत सिंह सिद्धू ने पार्टी का साथ बीच मझधार में छोड़ दिया है.

अगले साल फ़रवरी में राज्य में चुनाव हैं और बीजेपी के अंदर अलग-अलग गुटों में घमासान मचा हुआ है.

अभी राज्य में बीजेपी, शिरोमणी अकाली दल की सरकार है. ये गठबंधन लगातार दो बार से पंजाब में सत्ता में रही है. दस साल तक सत्ता में रहने के बाद एंटी इनकंबेंसी का डर बीजेपी को सता रहा है.

पंजाब की बीजेपी अभी तक 2014 के लोकसभा चुनाव में कैप्टन अमरिंदर सिंह के हाथों अरुण जेटली की हार नहीं भुली है. इस बार कांग्रेस की कमान अमरिंदर सिंह के हाथों में ही है.

लक्ष्मी कांत चावला, बलराम जी दास टंडन (छत्तीसगढ़ का गर्वनर नियुक्त), बलदेव राज चावला, मनोरंजन कालिया जैसे बीजेपी की राय ईकाई के सीनियर नेता ख़ुद को अलग-थलग महसूस कर रहे हैं जिससे की पार्टी के अंदर नए धड़े पैदा हो चुके हैं.

नए अध्यक्ष विजय सांपला ने हाल ही में राज्य कार्यकारिणी का पुर्नगठन किया है. ऐसा माना जाता है कि विजय सांपला को उनके लोकसभा क्षेत्र के बाहर बहुत कम लोग जानते हैं. पार्टी के इस फ़ैसले से राज्य के पूर्व बीजेपी प्रमुख कमल शर्मा के कैंप में लोग जले भुने बैठे हैं.

बीजेपी की विधायक और सिद्धू की बीवी डॉक्टर नवजोत कौर सिद्धू ने भी पार्टी के नाक में सिद्धू के पार्टी छोड़ने से पहले से दम कर के रखा हुआ है.

वो बादल सरकार में चीफ़ पार्लियामेंट्री सेक्रेटरी हैं. वो अपनी पार्टी की जमकर आलोचना करती रही हैं. वो बादल पिता-पुत्रों पर अमृतसर के लिए पैसा नहीं देने और अपने संसदीय क्षेत्र के विकास को नज़रअंदाज़ करने का आरोप लगाती रही हैं.

इमेज कॉपीरइट Reuters

इन दोनों ही मियां-बीवी का ज़ोर इस बात पर है कि बीजेपी को अकालियों के साथ अपना ऐतिहासिक गठबंधन तोड़ देना चाहिए.

इसने बीजेपी के अंदर पार्टी के कुछ नेताओं के बीच इस सोच को हवा दी कि अगले चुनाव में बीजेपी को अकेले लड़ना चाहिए.

बीजेपी के वोट का आधार मुख्य तौर पर शहरी इलाकों में है. बीजेपी और शिरोमणी अकाली दल का गठबंधन अगला चुनाव विकास के मुद्दे पर लड़ने जा रहा है लेकिन लोगों का कहना है कि पंजाब के शहर मूलभूत सुविधाओं के लिए भी तरस रहे हैं.

हाल ही में राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ के विचारक जगदीश गगनेजा की हत्या को लोग राज्य में क़ानून व्यवस्था की बदतर होती हालत का उदाहरण बता रहे हैं. इससे बीजेपी की छवि को भी नुक़सान पहुंचा है.

दिन पर दिन बढ़ते हुए अपराध और स्थानीय दफ्तरों में भ्रष्टाचार के मामले हर दिन सामने आ रहे हैं जिससे शहरी वोटर बीजेपी से दूर हट रहे हैं.

इमेज कॉपीरइट PTI PUNJAB CONGRESS

वो अब कांग्रेस या आम आदमी पार्टी को वोट देने के विकल्प पर गंभीरता से विचार कर रहे हैं. आम आदमी पार्टी भी पंजाब में शहरी वोटरों पर नज़र गड़ाए बैठा है.

बीजेपी के मंत्री राज्य सरकार में महत्वपूर्ण मंत्रालय संभाल रहे हैं जिसमें स्थानीय निकायों से लेकर स्वास्थ्य, मेडिकल की पढ़ाई, समाज कल्याण, उद्योग-धंधे और वन विभाग शामिल हैं.

लेकिन जब सरकार की नाकामियों, भ्रष्टाचार और कुव्यवस्था की चर्चा हर तरफ़ है तो बीजेपी को उसकी क़ीमत चुकानी पड़ सकती है.

एक अक्टूबर से तीन अक्टूबर तक होने वाली पार्टी के राज्य इकाई की कार्यकारिणी की बैठक में चुनाव की तैयारियों के अलावा गुटबाज़ी और गठबंधन पर भी बात हो सकती है.

इस बैठक में राज्य के प्रभारी प्रभात झा और राष्ट्रीय सचिव राम लाल हिस्सा लेने वाले हैं.

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)