लोगों का कहना, सेना नदारद, बनाया जा रहा है बेवकूफ़

  • 2 अक्तूबर 2016
Image caption बैंका गांव के मिडिल स्कूल में चलाए जा रहे रिलीफ कैंप में बुजुर्ग महिलाएं डरी हुई हैं

भारत प्रशासित जम्मू-कश्मीर के उड़ी में हुए चरमपंथी हमले के बाद भारत पाकिस्तान बॉर्डर पर तनाव का माहौल बना हुआ है.

भारत सरकार ने पंजाब से सटी नियंत्रण रेखा के 10 किलोमीटर तक के गांवों को खाली करने का आदेश दिया है.

नियंत्रण रेखा से सटे गांवों से पलायन भी शुरू हो चुका है लेकिन लोगों को किन-किन परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है इसका बीबीसी ने जायज़ा लिया.

कई गांवों के किसानों में डर और अनिश्चितता के साथ गुस्सा भी है.

लोगों में एक सवाल ये भी है कि उन्हें कितने दिनों तक ऐसे रहना पड़ेगा?

नियंत्रण रेखा से सटे कुछ गांव तो पूरी तरह खाली कर दिए हैं लेकिन कुछ लोग रात में घर छोड़ देते हैं और सुबह घर वापस लौट आते हैं.

सालविंदर सिंह भारत-पाकिस्तान सीमा से सटे पंजाब के गिलपन गांव से हैं. वो बेहद ग़ुस्से में हैं.

उन्होंने बीबीसी को बताया, "सरकार ने गांव खाली करने को तो बोल दिया है लेकिन हमारे लिए कोई इंतज़ाम नहीं किया है. हम अपने जानवर लेकर जाएं कहां."

उन्होंने आगे कहा, " हमने 1971 की जंग देखी है. पहले गांवों में आर्मी आती है गांव की घेरा बंदी होती है. यहां ऐसा कोई माहौल दिखाई नहीं दे रहा है . ये सभी लोगों को बेवकूफ बना रहे हैं."

वहीं तरण तारण ज़िले के थेकला गांव के किसान गुरदीप सिंह ने बताया कि उनके खेत नियंत्रण रेखा से बिलकुल सटे हुए हैं, जहां सरकार ने बाड़ लगाई है. कुछ किसानों के खेत उस बाड़ के बाहर भी हैं.

उड़ी हमले के बाद से किसान अपने खेतों तक नहीं पहुंच पा रहे हैं. हमले से पहले बाड़ के गेट खोल दिए जाते थे जिससे किसान खेत पर जाकर सिंचाई का काम किया करता था.

वहीं खड़े दूसरे किसान ने बताया, "हम शाम होते होते गांव खाली कर देते हैं लेकिन सुबह फिर से खेतों और घर पर आ जाते हैं."

Image caption बैंका गांव के मिडिल स्कूल में चलाया जा रहा रिलीफ कैंप

पंजाब के ही बैंका गांव में लगे रिलीफ़ कैंप का नज़ारा कुछ अलग था. मिडिल स्कूल में बने इस गए रिलीफ़ कैंप में 30-35 परिवार के बच्चे और महिलाएं ठहरी हुईं हैं.

इसी रिलीफ़ कैंप की देखरेख कर रहीं हिंदी की शिक्षक सोना देवी ने बताया कि भारत पाकिस्तान के तनाव के बाद इस स्कूल को शरणार्थी कैंप बनाया गया है.

इस कैंप में रह रहीं एक बुजुर्ग महिला ने बताया, "हमें अधिकारियों ने आकर कहा कि यहां से दस किलोमीटर दूर कहीं चले जाएं. हमारा आस पास कोई रिश्तेदार नहीं है इसलिए हम इस कैंप में रुके हैं."

रिलीफ कैंप के इंचार्ज सुखा सिंह ने बताया कि इस ज़िले में 23 रिलीफ़ कैंप चलाए जा रहे हैं. जहां स्वास्थ्य से लेकर खाने पीने तक का पूरा इंतजाम किया गया है. इस रिलीफ कैंप में डॉक्टर भी बैठे थे, जिन्होंने बताया कि लोगों में तनाव की शिकायत है. थकान की वजह से लोगों को बुखार आ रहा है.

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