पूरी तरह से फ़िट हैं 120 साल के बाबा

  • 4 अक्तूबर 2016
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क्या लंबे जीवन और अच्छी सेहत का कोई तय नुस्खा है? बनारस के 120 साल के बाबा शिवानंद को देखकर लगता है कि ऐसा हो सकता है.

बाबा शिवानंद के जीवन में लेट नाइट का मतलब है भोर यानी सुबह तीन बजे वे बिस्तर छोड़ देते हैं.

स्नान के बाद ध्यान और फिर एक घंटे योग. उनका भोजन भी सादा है- उबला हुआ आलू, थोड़ा दाल-चावल और रोज़ करेले की सब्ज़ी या नीम की सूखी पत्तियां.

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Image caption बाबा शिवानंद का पासपोर्ट और आधार कार्ड भी उनकी उम्र 120 साल बताते हैं.

उन्हें तीखा और तेलयुक्त खाना पसंद नहीं. शिवानंद दूध और फल भी नहीं लेते. इसके पीछे उनकी मान्यता है कि अभी भी देश में बहुत से लोग ग़रीब हैं, जिन्हें दूध-फल नसीब नहीं हो पाता है.

बाबा को मसाले और तेल वाले भोजन के अलावा सेक्स से भी परहेज़ रहा, इसीलिए शायद उन्होंने विवाह नहीं किया. उनके लफ़्ज़ों में ''मेरे गुरु की कृपा से मुझे न तो डिज़ायर (इच्छा) है न डिज़ीज़ (बीमारी), न डिप्रेशन (तनाव) और न ही हाइपरटेंशन''.

बाबा के मुताबिक़ छह साल की छोटी उम्र से ही वे इसका पालन कर रहे हैं.

बाबा शिवानंद 8 अगस्त 1886 को श्रीहट्ट ज़िले के हबीबगंज महकुमा, ग्राम हरिपुर के बाहुबल इलाक़े में एक ब्राह्मण परिवार में जन्मे थे. यह जगह अब बांग्लादेश में है.

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Image caption बाबा शिवानंद 120 साल की उम्र में भी हर रोज़ योग का अभ्यास करते हैं.

बाबा के पास अंग्रेज़ी में रूपांतरित उनकी कुंडली, आधार कार्ड और पासपोर्ट भी है. वह प्रवचन के लिए इंग्लैंड, अमरीका और बांग्लादेश भी जा चुके हैं.

वो बताते हैं कि उनके माता-पिता दरवाज़े-दरवाज़े भीख मांगकर जीविका चलाते थे.

उन्होंने बताया, ''जब मैं चार साल का था तो मेरे माता-पिता ने मुझे नवद्वीप निवासी बाबा ओंकारनंद गोस्वामी को समर्पित कर दिया. जब मैं छह साल का था तो माता-पिता और बहन की भूख चलते मौत हो गई. इसके बाद मैंने अपने गुरुजी के अधीन अध्यात्म की शिक्षा लेनी शुरू की और उन्हीं की प्रेरणा से कुंवारा जीवन जीने का फ़ैसला किया.''

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बांग्लादेश से आए उनके शिष्य सत्यहरिदास बताते हैं कि वह बाबा की जीवनशैली, स्वस्थ जीवन और लंबी आयु से बेहद प्रभावित हैं.

बनारस में डीज़ल लोकोमोटिव में टेक्निकल इंजीनियर जवाहरलाल सिंह 1984 से बाबा के भक्त हैं और उन्हें महापुरुष मानते हैं. डिब्रूगढ़ (असम) की महामुनी जब 10 साल की थीं, तभी से शिवानंद जी प्रभावित हैं.

अब बाबा शिवानंद के शिष्य चाहते हैं कि उनका नाम गिनीज़ बुक ऑफ़ रिकॉर्ड्स में भी शामिल हो.

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