झारखंड के चिरुडीह में पसरा है मातमी सन्नाटा

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झारखंड के चिरुडीह (बड़कागांव) में शनिवार को हुए गोलीकांड के बाद मातमी सन्नाटा पसरा हुआ है.

लोग अपने घऱों में क़ैद हैं, सड़कों पर सिर्फ पुलिस के जवान तैनात हैं. इलाके में निषेधाज्ञा लगा दी गई है. रैपिड एक्शन फोर्स के जवान भी तैनात कर दिए गए हैं. पूरे दिन सायरन बजाती गाड़ियों की आवाजाही ने लोगों को और डरा दिया है.

रविवार को कड़ी सुरक्षा के बीच गोलीकांड मे मारे गए चारों लोगों का अंतिम संस्कार कर दिया गया.

मृतक महताब के चचेरे भाई इसराइल अंसारी ने बीबीसी से कहा कि दोपहर बाद पुलिस वैन में उनके भाई की लाश लाई गई. इस कारण मिट्टी डालने की रस्म शाम में पूरी की गई.

उन्होंने बताया कि लोग काफी डरे हुए हैं. डर यह कि कहीं पुलिस इस मामले में उन्हें भी नामज़द न कर दे.

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Image caption झारखंड की मुख्य सचिव राजबाला वर्मा ने मौके का दौरा किया

चिरुडीह में एनटीपीसी के ख़िलाफ़ "कफ़न सत्याग्रह" पर बैठी कांग्रेस विधायक निर्मला देवी का कोई पता नहीं चल रहा है. उनका फोन 'अनरिचेबल' है. पुलिस भी उनके बारे में कुछ नहीं बता रही है.

शनिवार को पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर पहले लाठीचार्ज किया, फिर फायरिंग की. इसमें चार ग्रामीणों की मौत हो गई थी. इस दौरान घायल दर्जनों लोग रांची और हज़ारीबाग के अस्पतालों में अपना इलाज करा रहे हैं.

सरकार अभी यह समझने की कोशिश कर रही है कि यह गोलीकांड कैसे हुआ. इसके लिए एक जांच कमेटी बनाई गई है.

मुख्य सचिव राजबाला वर्मा मुख्यमंत्री के साथ अमरीका से लौटने के बाद रविवार को डीजीपी के साथ मौके पर गई. सरकार ने इस घटना की जांच के लिए एक उच्च स्तरीय कमेटी का गठन किया है.

हज़ारीबाग के डीसी रविशंकर शुक्ल ने बीबीसी को बताया कि मुखिय सचिव ने घटनास्थल के दौरे के बाद जांच कमेटी के अफ़सरों के साथ एक बैठक की. इसमें हज़ारीबाग प्रशासन के अधिकारी भी मौजूद थे.

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Image caption सुखदेव भगत, अध्यक्ष, झारखंड कांग्रेस

मुख्य सचिव ने भरोसा दिलाया है कि सरकार इस मामले की निष्पक्ष जांच करा रही है.

दूसरी ओर, गोलीकांड के प्रभावितों से मिलने चिरुडीह जा रहे झारखंड कांग्रेस के अध्यक्ष सुखदेव भगत को पुलिस ने वहां पंहुचने से पहले ही गिरफ़्तार कर लिया.

सुखदेव भगत ने बीबीसी से कहा, "लोकतंत्र में सरकार गोलियां नहीं चलवाती, लोगों से बातचीत करती है. मुख्यमंत्री रघुवर दास निवेशकों को आमंत्रित करने के लिए देश-विदेश घूम रहे हैं. अगर रैयतों को ही नहीं संभाल सके तो झारखंड में कौन निवेश करेगा?. बड़कागांव गोलीकांड की न्यायिक जांच कराई जानी चाहिए."

उन्होंने कहा कि सरकार इस घटना में मारे गए लोगों के परिजनो को 25-30 लाख रुपए का मुआवज़ा दे. पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी ने भी इस घटना की निष्पक्ष जांच कराने और मारे गए लोगों के रिश्तेदारों को 25-25 लाख रुपए का मुआवजा देने की मांग की है.

इस गोलीकांड को लेकर लोगों में गुस्सा है. सोशल मीडिया में यह मामला ट्रेंड कर रहा है.

भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी-लेनिनवादी) ने पूरे प्रदेश में प्रतिवाद मार्च निकाला. वहीं सोशल एक्टिविस्ट ए के पंकज, फ़ैसल अनुराग समेत सैकड़ों लोगों ने रविवार को रांची में अलग प्रतिरोध मार्च निकाला और सरकार से इस्तीफे की मांग की.

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