मलकानगिरि में एनसेफ़लाइटिस से 30 बच्चों की मौत

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ओडीशा में सरकारी आकड़ो के मुताबिक मलकानगिरी ज़िले में जापानी एनसेफ़लाइटिस से पिछले 27 दिनों में 30 लोगों की मौत हो गई है.

बुधवार को पांच बच्चों की मौत हो गई है. कई बच्चों की मौत अस्पताल लाते वक्त या फिर अस्पताल लाने से पहले ही हो गई थी.

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मलकानगिरि ज़िले के कुरुकुण्डा ब्लॉक के पोट्रेल गांव में रहने वाले किसान बिबि टाकरी की 3 साल की बेटी झानसी टाकरी की तबियत गंभीर रूप से बिगड़ गयी.

उन्हें 29 सितंबर को सुबह अस्पताल में दाखिल किया गया था लेकिन शाम को उनकी मौत हो गई.

झानसी की तरह मलकानगिरि से लगातार बच्चों की मौत की ख़बर आ रही है.

सरकारी आंकड़ो के मुताबिक 100 से भी ज़्यादा बच्चों का अस्पताल में इलाज हो रहा है.

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इस बीच आदिवासी इलाका होने की वजह से पूरी जानकारी नहीं मिल पा रही है.

डॉक्टरों के अनुसार सूअर से फ़ैल रही इस बीमारी का अभी तक कोई इलाज नहीं मिल पाया है.

टीकाकरण ही इससे बचने का एकमात्र तरीका है लेकिन अभी तक टीकाकरण शुरू नहीं हुआ है.

2011 के बाद से हर साल यह बीमारी ज़िले में फैल रही है.

मामले पर बुधवार को आदिवासी नेता और पूर्व सांसद प्रदीप मांझी एक मृत बच्चे का शव लेकर ज़िलाध्यक्ष के कार्यालय के सामने धरने पर बैठ गए.

उन्होंने कहा कि सरकार की लापरवाही ही बच्चों कि मौत का कारण है.

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आम तौर पर ज़िले के रहने वाले गरीब आदिवासी घर में सूअर रखते हैं. त्योहार या उत्सवों में सूअर का मांस खाया जाता है.

राज्य के स्वास्थ्य मंत्री और सचिव ने घटना स्थल का दौरा किया है.

स्वास्थ्य सचिव आरती आहूजा ने कहा है कि टीकाकरण करवाने के लिए केंन्द्र सरकार को अनुरोध किया गया है.

उधर केंन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे पी नड्डा ने राज्य को हर तरह की मदद मुहैया करवाने और स्थिति की जांच करने के लिए केंन्द्र स्वास्थ्य मंत्रालय के अधिकरीयों को निर्देश दिया है.

ज़िले में सरकार कर्मचारियों की दशहरा की छुट्टियां रद्द कर दी गई हैं.

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