पाकिस्तान के इन संगठनों पर भारत विरोधी गतिविधियों का आरोप

  • सलमान रावी
  • बीबीसी संवाददाता, नई दिल्ली
हाफ़िज़ सईद

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हाफ़िज़ सईद पर जानकारी के लिए अमरीका ने ईनाम का भी एलान किया था.

पाकिस्तान की संसद के कुछ सदस्यों ने देश के अंदर संचालित होने वाले कुछ प्रमुख चरमपंथी संगठनों की गतिविधियों पर चिंता जताई है.

इन लोगों ने इन संगठनों पर कार्रवाई करने की मांग की है. ऐसे संगठनों पर एक नज़र -

जैश ए मोहम्मद: भारत ने भारत प्रशासित कश्मीर के उड़ी में सेना के कैम्प पर हुए हमले के लिए जैश ए मोहम्मद नाम के चरमपंथी संगठन को दोषी ठहराया है जिसमें 18 सैनिक मारे गए थे.

भारत का कहना है कि उड़ी के अलावा जैश ए मोहम्मद ने 2001 में भारत संसद पर हुए हमलों और इस वर्ष जनवरी माह में पठानकोट में वायु सेना के बेस हुए हमले को भी अंजाम दिया था.

इस संगठन को भारत सहित संयुक्त राष्ट्र, ब्रिटेन और अमरीका ने चरमपंथी संगठन क़रार दिया है.

हालांकि पाकिस्तान ने जैश ए मोहम्मद पर 2002 में ही प्रतिबन्ध लगा दिया था, संगठन के संथापक मौलाना मसूद अज़हर के बारे में कहा जाता है उन्होंने पकिस्तान के पंजाब प्रांत के बहावलपुर में अपना ठिकाना बना रखा है.

भारत, मसूद अज़हर के प्रत्यर्पण के लिए हमेशा पकिस्तान पर दबाव बनाता रहा है. हालांकि पकिस्तान भारत की इस मांग को हमेशा ठुकराता रहा है यह कहकर कि मौलाना मसूद अज़हर के ख़िलाफ़ भारत पुख्ता सबूत नहीं दे पाया है.

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मसूद अज़हर का नाम एयर इंडिया और तब इंडियन एयरलाइंस के विमान अपहरण में भी आया था.

जैश ए मोहम्मद का नाम तब सामने आया जब 1999 के दिसंबर माह में इंडियन एयरलाइन्स के विमान का अपहरण कर अफ़ग़ानिस्तान के क़ंधार ले जाया गया था. यात्रियों की सुरक्षित रिहाई के एवज़ में भारत सरकार ने अपनी जेल से मौलाना मसूद अज़हर को रिहा कर दिया था. मौलाना मसूद अज़हर को वर्ष 1994 में भारत में गिरफ्तार किया गया था.

उनपर आरोप था कि वो जम्मू-कश्मीर से संचालित चरमपंथी संगठन हरकत उल मुजाहिदीन के सदस्य थे.

जैश ए मोहम्मद पर भारत के अन्य मिलिट्री ठिकानों पर हमला करने का आरोप भी है जिसमें उत्तरी जम्मू-कश्मीर के मोहरा और तंगधार और जम्मू के इलाक़े के कठुआ और साम्बा सेक्टर में हुए हमले शामिल हैं.

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इस संगठन पर भारत प्रशासित कश्मीर में आत्मघाती हमलों को भी अंजाम देने का आरोप है.

भारत का दावा है कि हाल के दिनों में लाइन आफ कंट्रोल पर स्थित भारतीय सेना के ठिकानों पर जैश ए मोहम्मद के हमलों में इज़ाफ़ा हुआ है.

पठानकोट हमले के बाद भारत ने संगठन के 12 सदस्यों को गिरफ्तार किया था. उसी समय पकिस्तान ने भी जैश ए मोहम्मद के बहावलपुर और मुल्तान स्थित ठिकानों पर हमला किया था.

उड़ी हमले के ठीक पहले जैश ए मोहम्मद के नाम से एक वीडियो जारी हुआ था. इसमें भारत प्रशासित जम्मू कश्मीर में भारतीय सेना की मदद करने वालों को बुरे परिणाम की धमकी दी थी.

सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि जैश ए मोहम्मद एक दुसरे संगठन जमात उल फ़ुरक़ान के नाम से भी काम कर रहा है.

जमात-उद-दावा: जम्मू-कश्मीर और भारत के कई हिस्सों में सुनियोजित हमलों का आरोप इस संगठन पर लगा है.

हाफ़िज़ सईद को इस संगठन का संस्थापक कहा जाता है. वर्ष 2008 के नवम्बर माह में हुए मुम्बई हमलों में भी इस संगठन का नाम आया था जिसके बाद पाकिस्तानी सेना ने पकिस्तान के मुज़फ़्फ़राबाद में संगठन के ठिकाने पर छापामारी की थी.

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इस छापामारी में जमात-उद-दावा के 20 लोगों को गिरफ्तार किया गया था. जमात-उद-दावा ज़्यादातर जम्मू-कश्मीर के इलाके में हमले करता रहा है.

भारत का कहना है कि उसने कई बार जमात-उद-दावा द्वारा मुज़फ़्फ़राबाद और पकिस्तान प्रशासित कश्मीर में चरमपंथियों के ट्रेनिंग कैम्प चलाये जाने के सुबूत पकिस्तान को सौंपे हैं.

जमात-उद-दावा पर पकिस्तान में प्रतिबन्ध लगाया गया है. लश्कर-ए-तय्यबा को भी जमात उद दावा के ही एक अंग के रूप में जाना जाता है.

बीबीसी मॉनिटरिंग की जुटाई गयी जानकारी के अनुसार इस संगठन का नाम पहले 'मरकज़-अल-दावत वल इरशाद' था जिसे अमरीकी प्रतिबन्ध के बाद बदल दिया गया.

समाचार एजेंसी रॉयटर्स की 2002 में प्रकाशित एक रिपोर्ट में कहा गया है कि जमात-उद-दावा का मुख्यालय लाहौर के पास मुरीदके में 190 एकड़ में फैला हुआ है जहाँ मदरसों के अलावा अस्पताल और होस्टल भी मौजूद हैं.

लश्कर ए तैयबा: जमात-उद-दावा से जुड़ा ये संगठन पूरे दक्षिण एशिया में सबसे बड़े चरमपंथी संगठन के रूप में कुख्यात है. कहा जाता है कि ये पूरी तरह से पकिस्तान प्रशासित कश्मीर से संचालित होता रहा है जबकि इसका मुख्यालय पकिस्तान के पंजाब प्रान्त के लाहौर का इलाक़ा ही रहा है.

लश्कर ए तैयबा को जमात-उद-दावा की मिलिट्री इकाई के रूप में भी जाना जाता है.

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पकिस्तान प्रशासित कश्मीर में संगठन कई ट्रेनिंग कैम्प चलाता रहा है जहाँ कश्मीर के युवकों को चरमपंथ की ट्रेनिंग देकर उन्हें भारत में घटनाओं को अंजाम देने के लिए भेजा जाता रहा है.

लश्कर ऐ तय्यबा की स्थापना 1987 में ज़फर इक़बाल, अब्दुल्लाह अज़्ज़ाम और हाफ़िज़ सईद ने मिलकर की थी और कहा जाता है कि इसे ओसामा बिन लादेन से आर्थिक मदद मिलती रही.

हालांकि अमरीका, ब्रिटेन और दुसरे देशों के साथ साथ पकिस्तान में भी इस संगठन पर प्रतिबन्ध लगा हुआ है, पकिस्तान की खुफ़िया एजेंसी आईएसआई पर इसे मदद करने की बात कही जाती रही है. वर्ष 1990 से लेकर आज तक इस संगठन पर कई हमलों का आरोप है और वर्ष 2002 में पकिस्तान ने भी इसपर प्रतिबन्ध लगाया था.

हरकत-उल-मुजाहिदीन: इस संगठन का जन्म 1980 के दशक में हुआ था. 1993 में एक नया चरमपंथी संगठन-हरकत उल अंसार का जन्म हुआ. मगर फ़ौरन इस संगठन के तीन बड़े नेता गिरफ्तार कर लिए गए. इनमें सज्जाद अफ़ग़ानी, मौलाना मसूद अज़हर और नसरुल्लाह मंसूर लंगरयाल शामिल थे.

रूस और अफ़ग़ानिस्तान के बीच चल रहे युद्ध के आख़री दौर यानी 1989 में इस संगठन ने भारत प्रशासित कश्मीर पर अपना फोकस कर दिया.

अपने गिरफ़्तार किये गए तीन बड़े नेताओं को छुड़वाने के लिए इस संगठन ने एक के बाद एक, कई लोगों को अग़वा करना शुरू किया. 1995 के जुलाई माह में संगठन ने कई विदेशी सैलानियों का अपहरण किया था जिनकी बाद में ह्त्या कर दी गयी थी.

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2008 मुंबई हमलों में 160 से ज़्यादा लोग मारे गए थे.

भारतीय सुरक्षा एजेंसियों का दावा है कि हरकत-उल-अंसार ने पकिस्तान प्रशासित कश्मीर और भारत प्रशासित कश्मीर में अपने हज़ारों समर्थक तैयार किए हैं.

हालांकि भारतीय सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि हरकत-उल-अंसार मूलतः मुज़फ़्फ़राबाद और रावलपिंडी के अलावा अफ़ग़ानिस्तान में भी काफी सक्रिय है, संगठन मुख्य तौर पर भारत प्रशासित कश्मीर को ही अपना निशाना बनाता रहा है.

अल अख़्तर ट्रस्ट: कराची स्थित अल अख़्तर ट्रस्ट पर आरोप हैं कि उसका सम्बन्ध जैश ए मोहम्मद और और हरकतुल मुजाहिदीन जैसे संगठनों से है.

सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार यह संगठन मूल रूप से चरमपंथी गतिविधियों को अंजाम देने के लिए धन उगाही का काम करता है.

( बीबीसी मॉनिटरिंग द्वारा दी गयी अतिरिक्त जानकारी के साथ )

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