क्या 'आप' अब ओडिशा में पैर पसारेगी?

  • 8 अक्तूबर 2016
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Image caption कटक में हुए राज्य सम्मेलन में बड़ी तादाद में 'आप' कार्यकर्ता पहुंचे

आम आदमी पार्टी (आप) के राष्ट्रीय नेताओं ने हाल ही में कटक में हुए अपने पहले राज्य सम्मलेन में दावा किया कि 2019 के विधानसभा चुनाव में पार्टी ओडिशा में सरकार बनाएगी.

ऐतिहासिक शहर कटक के जवाहरलाल नेहरू इनडोर स्टेडियम में हुए इस सम्मलेन को 'आप' की ताक़त आजमाइश के रूप में देखा जा रहा है.

राज्य के अलग अलग हिस्सों से आए कार्यकर्ताओं ने बड़ी संख्या में इसमें हिस्सा लिया.

ऐसे में दिल्ली और पंजाब के बाद ओडिशा में पैर पसारने के दावे को कितनी गंभीरता से लिया जाना चाहिए ?

यह सवाल स्वाभाविक है कि अगर 'आप' अपने जनाधार को लेकर इतना ही आश्वस्त है तो वह अगले साल फ़रवरी में राज्य में होने वाले पंचायत चुनाव क्यों नहीं लड़ रही है?

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इस सवाल के जवाब में 'आप' के ओडिशा संयोजक निशिकांत महापात्र कहते हैं, "पंचायत और विधान सभा चुनाव के मुद्दे और पृष्ठभूमि बिल्कुल अलग-अलग होते हैं. हमने विधानसभा चुनाव पर फ़ोकस करने का फ़ैसला किया है ताकि राज्य में सत्ता हासिल कर प्रचलित व्यवस्था में बुनियादी बदलाव लाया जा सके."

ओडिशा में सरकार बनाने के दावे के आधार के बारे में पूछे जाने पर महापात्र ने कहा, "दिल्ली में आप की सरकार के अच्छे काम के आधार पर हम यहाँ जनसमर्थन हासिल करेंगे."

आँकड़ों पर एक नज़र डालें तो साल 2014 के आम चुनाव में देश भर में मोदी हवा के बावज़ूद ओडिशा में सत्तारूढ़ बीजू जनता दल (बीजद) का वोट प्रतिशत 2009 के आम चुनाव की तुलना में बढ़ा था.

पार्टी ने लोकसभा और विधानसभा चुनावों में तगड़ी जीत हासिल की थी. दूसरी तरफ 'आप' को 1 प्रतिशत से भी कम वोट मिले थे, जो 'नोटा' को मिले वोट से भी कम थे.

'आप' ने लोकसभा के 21 में से 18 और विधान सभा के 147 में से 108 सीटों पर उम्मीदवार खड़े किए थे.

राज्य में सत्ता हासिल करने के लिए 'आप' को बीजद के अलावा कांग्रेस और भाजपा को भी हराना होगा. इन दो पार्टियों को साल 2014 के चुनाव में क्रमश: 25.74 और 18.02 प्रतिशत वोट मिले थे.

राज्य में 'आप' के कथित विकास पर इन दोनों पार्टियों ने बेहद तीखी टिप्पणी की है. कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और मुख्य प्रवक्ता गणेष्वर बेहेरा ने इसे 'मुंगेरी लाल के हसीन सपने' क़रार दिया.

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भाजपा नेता सज्जन शर्मा ने बीबीसी से पूछा, "क्या इस पर सचमुच प्रतिक्रिया देने की ज़रुरत है ?"

'आप' पर छींटाकशी करते हुए उन्होंने कहा, "सपने देखने पर कोई पाबंदी नहीं है."

सत्तारूढ़ बीजद की प्रतीक्रिया भी लगभग इसी प्रकार की थी.

पार्टी के वरिष्ठ नेता और स्कूली शिक्षा मंत्री देवीप्रसाद मिश्र ने कहा, "आप ओडिशा में है कहाँ? कम से काम मुझे तो नज़र नहीं आता. "

यह ज़रूरी नहीं कि साल 2019 के चुनाव नतीजे साल 2014 के नतीजों पर ही निर्भर होंगे. अस्सी के दशक में पड़ोसी राज्य आंध्र प्रदेश में चुनाव के कुछ ही महीने पहले बनी तेलुगु देशम पार्टी ने शानदार जीत हासिल की थी.

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हाल के दिनों में खुद आम आदमी पार्टी ने भी दिल्ली विधान सभा चुनाव में 70 में से 67 सीटें हासिल कर सबको चौंका दिया था. लेकिन ओडिशा में ऐसा कोई चमत्कार होता हुआ नज़र नहीं आ रहा.

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