पाक पत्रकार सिरिल अलमेइडा का 'गोवा कनेक्शन'

  • 11 अक्तूबर 2016
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पाकिस्तान के जिस पत्रकार पर मुल्क से बाहर जाने पर पाबंदी लगा दी गई है उनके बाप-दादा का संबंध गोवा से था. भारत के अख़बार द हिंदू और कई विदेशी अख़बारों की ख़बरों के मुताबिक सिरिल पर पाबंदी एक ख़बर लिखने की वजह से लगाई गई है.

'डॉन' अख़बार के सहायक संपादक सिरिल अलमेइडा ने कुछ दिन पहले पाकिस्तान के राजनेताओं और फ़ौजी अफ़सरों के बीच कथित तौर पर उभरे तनाव पर एक ख़बर छापी थी जिसमें भारत के "सर्जिकल स्ट्राइक्स" और पाकिस्तान के अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अलग थलग होने का ज़िक्र था.

पाकिस्तान की सरकार ने इस ख़बर का पुरज़ोर खंडन किया था और इसे बेबुनियाद बताया था.

इसके बाद सोशल मीडिया पर सिरिल अलमेइडा के पक्ष और विरोध में टिप्पणियां आने लगीं और उनको लेकर दिलचस्पी बढ़ गई.

दिसंबर 2015 में सिरिल वाघा बॉर्डर होते हुए ज़मीनी रास्ते से गोवा पहुँचे थे और टाइम्स ऑफ़ इंडिया से एक बातचीत में उन्होंने अपने गोवा कनेक्शन' का ज़िक्र किया था.

बहुत कम लोगों को ये जानकारी है कि सिरिल के पूर्वज गोवा के रहने वाले थे जो विभाजन से पहले ही कराची चले गए थे.

यह वो वक़्त था जब कराची 'बॉम्बे प्रेसिडेंसी' का हिस्सा हुआ करता था. भारत के विभाजन के बाद उनके परिवार ने कराची में ही रहने का फ़ैसला किया.

कराची में गोवा से जाकर बस चुके लोगों की अपनी बड़ी कालोनी थी, जो आज भी है.

गोवा कला व साहित्य सम्मलेन 2015 के दौरान 'टाइम्स आफ इंडिया' अख़बार को दिए साक्षात्कार में उन्होंने कहा था कि गोवा के व्यंजन वैसे ही हैं जैसे उनकी 'दादी अक्सर बनाया' करती थीं.

हालांकि वो अब कोंकणी भाषा नहीं बोलते हैं मगर उन्होंने कहा था कि दो दशक पहले तक उनके परिवार के लोग कोंकणी बोल भी लेते थे और समझ भी लेते थे.

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पकिस्तान से बाहर जाने पर लगे प्रतिबंध पर अपने ट्विट्टर हैंडल से उन्होंने ख़ुद पर टिप्पणी करते हुए लिखा- "तुम एयरपोर्ट पर काफ़ी मशहूर हो चुके हो. तुम्हारा नाम हर 'इमीग्रेशन' अफ़सर की डेस्क के पास चिपका हुआ है. ए-4 साइज का पेपर जिस पर सिर्फ तुम्हारा नाम लिखा हुआ है - सूत्र कहते हैं."

सिरिल के फ़ेसबुक एकाउंट के मुताबिक़ उन्होंने ब्रिटेन के 'ऑक्सफ़ोर्ड विश्वविद्यालय' से क़ानून की डिग्री हासिल की और लंबे समय तक कराची में बतौर रिपोर्टर काम किया.

फिर कुछ साल पहले वो इस्लामाबाद आ गए और फिलहाल वो वहीं 'डॉन' अख़बार में बतौर सहायक संपादक काम कर रहे हैं.

पकिस्तान के कई वरिष्ठ पत्रकारों ने उनके विदेश जाने पर लगाए गए प्रतिबंध पर तीखी प्रतिक्रया व्यक्त की है.

लेखक और पत्रकार ज़ाहिद हुसैन ने ट्वीट किया - 'अपना काम करने की सजा के तौर पर बाहर जाने पर प्रतिबंध शर्मनाक है.'

वहीं संपादक नजम सेठी ने इस प्रकरण पर लिखा- 'पकिस्तान के मीडिया को सरकार के इस फैसले के खिलाफ एकजुट होना चाहिए.'

गोवा के लेखक विवेक मैनज़ेज़ गोवा के उस समारोह के आयोजकों में से थे जिसमें सिरिल को आमंत्रित किया गया था.

मैनज़ेज़ ने बीबीसी को बताया कि सिरिल पिछले साल अपनी माँ और भाई के साथ गोवा आए थे.

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उन्होंने कहा, "पाकिस्तान में सिरिल जैसे लोग उदार राष्ट्रवाद की आवाज़ हैं जिन्हें प्रताड़ित नहीं प्रोत्साहित किया जाना चाहिए."

दूसरी तरफ भारत में भी कुछ पत्रकार सिरिल के साथ खड़े नज़र आये.

वरिष्ठ पत्रकार राजदीप सरदेसाई ने लिखा- "पकिस्तान में बहुत सारे पत्रकार हमसे ज़्यादा बहादुर नज़र आ रहे हैं. सिरिल अलमेइडा के समर्थन में."

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