मुंबई में आरटीआई कार्यकर्ता की हत्या

  • 17 अक्तूबर 2016
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हिंदुस्तान टाइम्स की एक ख़बर के मुताबिक़ मुंबई में सूचना के अधिकार (आरटीआई) कार्यकर्ता, 61 साल के भूपेंद्र वीरा की उनके घर में ही गोली मारकर हत्या कर दी गई.

वे सांटाक्रूज़ ईस्ट में रहते थे. पुलिस का मानना है कि वीरा की हत्या संपत्ति के विवाद से जुड़ी हो सकती है.

उधर उनके परिवार का दावा है कि ग़ैरक़ानूनी निर्माण को लेकर वो कई नेताओं और अन्य लोगों से टकराव की स्थिति में रहे थे.

उनकी बहू शीला वीरा ने कहा कि उन्होंने ग़ैरक़ानूनी निर्माण को लेकर आरटीआई के तहत कई अर्ज़ियां लगाई थीं. इनमें से एक अर्ज़ी एक पूर्व नगर निगम कॉरपोरेटर के ख़िलाफ़ थी और इस सिलसिले में पुलिस पूछताछ कर रही है.

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इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक़ दिल्ली के जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) का एक छात्र एबीवीपी कार्यकर्ताओं के साथ झगड़े के बाद से रहस्यमय तरीक़ से गायब है.

गायब छात्र वामपंथी छात्र संगठन आइसा का कार्यकर्ता है.

ख़बर के मुताबिक़ नजीब अहमद नाम के छात्र ने कथित तौर पर किसी अन्य छात्र को थप्पड़ मारा था. इसके बाद उनकी कुछ अन्य छात्रों से झड़प हुई. ख़बर के मुताबिक जब वॉर्डन, जेएनयू छात्र संघ के अध्यक्ष और होस्टल के छात्रों ने अहमद को बचाने की कोशिश की तो उनके साथ भी हाथापाई हुई.

इस बारे में पुलिस के पास एक शिकायत भी दर्ज कराई गई है.

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टाइम्स ऑफ़ इंडिया ने लिखा है कि पाकिस्तान ने रविवार को रजौरी ज़िले के तारकुंडी के पास नियंत्रण रेखा पर दो बार युद्धविराम का उल्लंघन किया.

पाकिस्तानी सेना की फ़ायरिंग में एक भारतीय सैनिक की मौत हो गई. ख़बर के मुताबिक़ पाकिस्तान ने इसके अलावा नौशेरा सेक्टर में भी फ़ायरिंग की है.

सेना के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक़ भारत की सर्जिकल स्ट्राइक के बाद पाकिस्तान की तरफ़ से 25 बार युद्धविराम का उल्लंघन किया गया है.

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Image caption फ़ाइल फ़ोटो

इंडियन एक्सप्रेस की एक ख़बर के मुताबिक़ पिछले बुधवार को पश्चिम बंगाल के नॉर्थ 24 परगना ज़िले के हाजीनगर और हाली शहर में हुए सांप्रदायिक तनाव के बाद लोग अपने घर छोड़कर जा रहे हैं.

बुधवार को मुहर्रम के जुलूस में एक छोटा बम फेंके जाने की ख़बर के बाद करीब 30 घरों, कई दुकानों और चार गाड़ियों में आग लगा दी गई थी.

हालांकि पुलिस का कहना है कि हालात काबू में हैं.

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Image caption मराठा आंदोलन

हिंदुस्तान टाइम्स ने लिखा है कि महाराष्ट्र के दलितों में इस बात का डर है कि अगर मराठा आंदोलन ने सिर उठाया तो कहीं वो दिन न लौट आएं जब जातीय संघर्ष लगातार बना रहता था और जाति के नाम पर अक्सर झगड़े होते थे.

हाल ही में पुणे और नासिक में दलितों और मराठों के बीच तनाव भी देखा गया था. मराठों की विशाल रैलियों के बाद दलित समुदाय के लोग भी रैलियां निकाल रहे हैं.

अख़बार ने महाराष्ट्र के जातीय समीकरण बताते हुए लिखा है कि राज्य की कुल जनसंख्या का 32 फ़ीसद मराठा हैं और अन्य पिछड़ा वग (ओबीसी) कैटेगरी से जुड़े किसान भी इसमें गिने जाते हैं.

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