'तीन तलाक़ मामले में सरकार इस्लाम में दखल ना दे'

  • प्रशांत दयाल
  • अहमदाबाद से, बीबीसी हिंदी डॉटकॉम के लिए

एक तरफ़ तीन तलाक़ को लेकर मामला सुप्रीम कोर्ट में पहुंचा है और भारत सरकार के हलफ़नामे को लेकर राजनीति गरमाई है, तो दूसरी तरफ गुजरात के सूरत शहर में हज़ारों की तादाद में मुस्लिम महिलाओं ने प्रदर्शन किया.

इन मुस्लिम महिलाओं की मांग है कि तलाक़ के मामले में सरकार दख़ल ना दे. महिलाओं ने इस संबंध में मांगपत्र ज़िलाधिकारी को सौंपा.

गुजरात के सूरत शहर में शुक्रवार को हज़ारों की तादाद में मुस्लिम महिलाएं सड़कों पर उतरीं. उनके हाथ में बैनर थे, जिस पर लिखा था ' शरियत क़ानून को सरकार बदलने की कोशिश न करे'

रैली में शामिल शहनाज़ पटेल ने बीबीसी से कहा, "हम भारत सरकार को बताना चाहते हैं कि तलाक़ के मामले में शरियत क़ानून ही श्रेष्ठ है. भारत के संविधान से भी यह मामला ऊपर है."

पटेल ने बताया, "हम भारत के संविधान को सलाम करते है, लेकिन जब बात शरियत की आती है, तो हमें क़ुरान का बताया रास्ता ही उत्तम मालूम होता है. इस स्थिति में भारत सरकार कॉमन सिविल कोड के सहारे इस्लाम में हस्तक्षेप करना छोड़ दे."

रैली के आयोजक मुकसुद अहमद ने कहा, "यह प्रदर्शन किसी संस्था द्वारा आयोजित नहीं था, लेकिन कॉमन सिविल कोड को लेकर देश में जो हालात खड़े हुए हैं, उसको लेकर सूरत की महिलाएं अपने आप आगे आई हैं. मेरा मानना है कि कॉमन सिविल कोड के नाम पर भारत सरकार शरियत क़ानून में दखल दे रही है."

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