'माओवादियों से बातचीत करे सरकार'

इमेज कॉपीरइट CPJC

सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से कहा है कि वह माओवादियों के साथ शांति वार्ता की पहल करे.

छत्तीसगढ़ में विशेष पुलिस अधिकारियों द्वारा आदिवासियों पर किये गये हमले के एक मामले की सुनवाई करते हुये जस्टिस मदन भीमराव लोकुर और आदर्श कुमार गोयल की पीठ ने इस मुद्दे पर कोलंबिया, मिजोरम और नागालैंड का भी उल्लेख किया.

ग़ौरतलब है कि मार्च 2011 में सुकमा जिले के ताड़मेटला, मोरपल्ली और तिम्मापुर में आदिवासियों के 252 घर जला दिये गये थे और तीन आदिवासियों की हत्या कर दी गई थी.

इमेज कॉपीरइट CPJC

इन गांवों में कुछ महिलाओं के साथ बलात्कार की घटनायें भी सामने आई थीं. 26 मार्च 2011 को इस घटना को देखने के लिए जा रहे स्वामी अग्निवेश पर भी पुलिस संरक्षण में चलाये जा रहे सलवा जुड़ूम के लोगों ने हमला किया गया था.

इस मामले में तत्कालीन पुलिस अधिकारियों ने इन घटनाओं के लिये माओवादियों को ज़िम्मेवार ठहराया था.

दिल्ली विश्वविद्यालय की प्राध्यापक नंदिनी सुंदर और सामाजिक कार्यकर्ता स्वामी अग्निवेश दोनों ने ही घटनाओं के लिये पुलिस को ज़िम्मेवार ठहराते हुये सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी. जिसके निर्देश पर सीबीआई ने जांच शुरु की थी.

इमेज कॉपीरइट Nandini Sundar
Image caption नंदिनी सुंदर

शुक्रवार को सीबीआई की जांच के बाद सरकार ने स्वीकार किया कि इन घटनाओं को विशेष पुलिस अधिकारी और पुलिस संरक्षण में चल रहे सलवा जुड़ूम के लोगों ने अंजाम दिया था.

शुक्रवार को इस मामले की सुनवाई के बाद याचिकाकर्ता सामाजिक कार्यकर्ता स्वामी अग्निवेश और नंदिनी सुंदर ने कहा कि छत्तीसगढ़ पुलिस ने हत्या और बलात्कार के मामलों को दबाया.

सामाजिक कार्यकर्ता स्वामी अग्निवेश ने बीबीसी को बताया, "सरकार पांच सालों तक पुलिस को बचाने के लिये इन घटनाओं को झुठलाती रही. यहां तक कि इन घटनाओं के सूत्रधार दंतेवाड़ा के तत्कालीन एसएसपी शिवराम प्रसाद कल्लुरी को जांच के दौरान ही बस्तर का आईजी बना कर भेज दिया. लेकिन सीबीआई की जांच में सारी बातें साफ़ हो गई हैं."

इमेज कॉपीरइट Alok Putul

स्वामी अग्निवेश ने कहा कि अभी जबकि इन घटनाओं में सीबीआई की जांच जारी है, बस्तर के आईजी पुलिस शिवराम प्रसाद कल्लुरी को उनके पद से हटाया जाना चाहिए.

हालांकि सुप्रीम कोर्ट में सीबीआई की जांच रिपोर्ट को लेकर भारतीय जनता पार्टी ने कहा है कि अदालत जो भी निर्देश देगी, उसका पालन किया जायेगा.

छत्तीसगढ़ में भारतीय जनता पार्टी के प्रवक्ता और विधायक श्रीचंद सुंदरानी ने कहा, "माओवादियों के ख़िलाफ़ छत्तीसगढ़ सरकार के अभियान से माओवादी बौखलाये हुये हैं. यही कारण है कि सुरक्षा बलों को लेकर दुष्प्रचार किया जा रहा है."

लेकिन कांग्रेस पार्टी ने सीबीआई की रिपोर्ट का समर्थन करते हुये कहा है कि उनकी पार्टी पहले से ही कहती रही है कि बस्तर में पुलिस माओवादियों को खत्म करने के नाम पर आदिवासियों को फर्ज़ी मुठभेड़ में मार रही है.

इमेज कॉपीरइट Alok Putul

छत्तीसगढ़ में कांग्रेस पार्टी के प्रवक्ता ज्ञानेश शर्मा ने कहा-"सीबीआई की रिपोर्ट ने हमारे आरोपों की पुष्टि की है. बस्तर में पुलिस का अत्याचार चरम पर है. माओवादी उन्मूलन के नाम पर बेगुनाह आदिवासियों की हत्या और पुलिस आतंक को स्वीकार नहीं किया जा सकता."

इधर रायपुर में सीबीआई की विशेष अदालत में पेश अपनी रिपोर्ट में सीबीआई ने कहा है कि 2011 में सुकमा जिले के ताड़मेटला, मोरपल्ली और तिम्मापुर में 323 विशेष पुलिस अधिकारियों व पुलिसकर्मियों, कोबरा बटालियन के 114 और सीआरपीएफ के 30 जवानों ने ऑपरेशन चलाया था.

इन गांवों में आदिवासियों पर हुए अत्याचार के मामले में सीबीआई ने विशेष पुलिस अधिकारियों समेत 6 लोगों के ख़िलाफ़ चलान पेश किया.

इसके अलावा स्वामी अग्निवेश पर हुये हमले के लिये पुलिस संरक्षण में चलने वाले सलवा जुड़ूम समेत दूसरे संगठनों के 24 लोगों को भी नामज़द आरोपी बनाया गया है.

इमेज कॉपीरइट Alok Putul

सुप्रीम कोर्ट में सलवा जुड़ूम के ख़िलाफ़ याचिका दायर करने वाली दिल्ली विश्वविद्यालय की प्राध्यापक नंदिनी सुंदर और सामाजिक कार्यकर्ता स्वामी अग्निवेश ने कहा कि 5 जुलाई 2011 को सुप्रीम कोर्ट ने सलवा जुड़ूम और विशेष पुलिस अधिकारियों पर प्रतिबंध लगाने के साथ राज्य को यह निर्देश दिया गया था कि मानव अधिकारों के उल्लंघन के दोषी हर व्यक्ति को हटाया जाए और उस पर मुकदमा चलाया जाए.

लेकिन इसके उलट छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा विशेष पुलिस अधिकारियों पर प्रतिबंध लगाने की तारीख से ही सभी विशेष पुलिस अधिकारियों को सशस्त्र सहायक बल, आर्म्ड ऑक्सिलरी फोर्स में बदल दिया गया, जो पूरी तरह से ग़लत फ़ैसला था और राज्य ने न्यायालय के प्रति अपने दायित्वों का पूरी तरह उल्लंघन किया.

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)