'स्टॉकिंग': कोई पीछा करे, तो क्या करें?

  • दिव्या आर्य
  • संवाददाता, दिल्ली

बेंगलुरू में एक ऐसा सीसीटीवी फुटेज सामने आया है जिसमें स्कूटर पर सवार दो युवकों ने एक रात में एक युवती को रोका, छेड़खानी की और फिर उसे सड़क पर गिराकर फ़रार हो गए.

बेंगलुरू में नए साल के जश्न के दौरान भी कुछ महिलाओं के साथ ऐसे ही व्यवहार की शिकायत दर्ज हुई थी.

कुछ महीने पहले राजधानी दिल्ली से सटे गुड़गांव के एक मेट्रो स्टेशन पर 32 साल की एक महिला की चाकू से गोदकर हत्या कर दी गई. ये हमला कथित तौर पर कई दिनों से उसका पीछा कर रहे एक आदमी ने किया.

इमेज कैप्शन,

सितंबर में दिल्ली की करुणा प्रजापति की कैंची से गोदकर हत्या कर दी गई

एक और घटना में दिल्ली के बुराड़ी इलाके में एक साल से एक औरत का पीछा कर रहे एक आदमी ने ख़ुले-आम कैंची से बार-बार मारकर उसकी हत्या कर दी थी.

अगर आप या आपके जाननेवाली किसी औरत के साथ ऐसा हो रहा हो तो ये जानकारी आपकी मदद कर सकती है.

पुलिस को शिकायत

'स्टॉकिंग' यानि ग़लत इरादे से एक औरत का पीछा करने को, अब अपराध माना जाता है जिसके ख़िलाफ़ पुलिस में शिकायत की जा सकती है.

भारतीय दंड संहिता की धारा 354(डी) के मुताबिक हर वो आदमी 'स्टॉकिंग' का अपराधी माना जाएगा जो एक औरत के साफ़ तौर पर अपना 'डिसइन्ट्रेस्ट' यानि असहमति दिखाने के बावजूद उसे संपर्क करने की कोशिश करे, पीछा करे, निजी रिश्ता बनाने की कोशिश करे, ऐसे घूरे या जासूसी करे कि उसकी मानसिक शांति भंग हो और उसमें हिंसा का डर पैदा हो.

इस धारा में 'साइबर स्टॉकिंग' को भी अपराध माना गया है.

हेल्पलाइन

'स्टॉकिंग' समेत औरतों से जुड़ी किसी भी हिंसा या परेशानी की शिकायत के लिए देशभर में कहीं से भी 1091 नंबर पर फोन किया जा सकता है.

राजधानी दिल्ली में 'स्टॉकिंग' की शिकायतों के लिए 1096 नंबर पर फोन कर विशेष हेल्पलाइन की मदद ली जा सकती है.

ये हेल्पलाइन्स फ़ोन पर दी गई शिकायत को स्थानीय पुलिस थाने को देती हैं जहां औरत शिकायत के रेफ़रेंस नंबर से एफ़आईआर समेत आगे की कार्रवाई करवा सकती है.

राष्ट्रीय महिला आयोग

पीड़ित औरत राष्ट्रीय महिला आयोग की वेबसाइट पर जाकर दर्ज करवा सकती है. शिकायत का एक रसीद नंबर मिलता है.

आयोग दस दिन में शिकायत पर विचार करता है जिसके बाद औरत दोबारा संपर्क कर उनसे पुलिस में शिकायत समेत आगे की कार्रवाई के विकल्प समझने के लिए रसीद नंबर के साथ संपर्क कर सकती है.

आयोग की वेबसाइट के इस पन्ने पर ऐसे संगठनों की जानकारी भी है जो औरतों को क़ानून मदद और काउंसलिंग जैसी सुविधाएं देती हैं.

क़ानून में कितनी सज़ा?

पुलिस थाने में शिकायत या हेल्पलाइन या आयोग की मदद लेने के बाद औरत का पीछा करनेवाला आदमी आईपीसी की ग़ैर-ज़मानती धारा 354(डी) में गिरफ़्तार किया जा सकता है.

'स्टॉकिंग' के अपराध के लिए दोषी पाए गए व्यक्ति को कम से कम एक साल और ज़्यादा से ज़्यादा पांच साल की सज़ा हो सकती है. दोषी को जुर्माना भी देना पड़ सकता है.

'स्टॉकिंग' करनेवाला व्यक्ति अगर बलात्कार, हत्या या और कोई हिंसक कार्रवाई के लिए दोषी पाया जाए तो उन धाराओं के तहत सज़ा दी जाएगी.

सालाना 'स्टॉकिंग' के कितने मामले?

भारत में अपराध के आंकड़े जुटाने वाली संस्था, 'नेशनल क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो' के मुताबिक साल 2015 में 'स्टॉकिंग' के 6,266 मामले दर्ज हुए. यानि औरतों की जनसंख़्या के अनुपात में ये एक फ़ीसदी अपराध दर ही है.

इसके मुक़ाबले बलात्कार की अपराध दर 5.7 फ़ीसदी है और घरेलू हिंसा यानि पति या उसके परिवार द्वारा हिंसा की अपराध दर 18.7 फ़ीसदी है.

कब बना 'स्टॉकिंग' का क़ानून?

दिसंबर 2012 में दिल्ली में 'निर्भया' के सामूहिक बलात्कार से छिड़ी बहस के बाद सरकार ने साल 2013 में औरतों के ख़िलाफ़ हिंसा के क़ानून में संशोधन किया था.

2013 में पारित किए गए 'क्रिमिनल अमेंडमेंट ऐक्ट' के तहत ही 'स्टॉकिंग' यानि ग़लत इरादे से एक औरत का पीछा करने को दंडनीय अपराध क़रार दिया गया.

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