'वॉट्सऐप की वजह से आत्महत्या'

  • 4 नवंबर 2016
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जानलेवा हुआ व्हाट्सऐप पर वायरल वीडियो

उत्तर प्रदेश के एक गांव में रहनेवाली 40 साल की औरत तब आत्महत्या करने पर मजबूर हो गई जब उसके बलात्कार का वीडियो सोशल नेटवर्किंग वेबसाइट वॉट्सऐप पर वायरल हो गया.

गीता एक साहसी औरत थी. स्वास्थ्य कर्मी यानि 'आशा' के अपने काम की वजह से अक़्सर देर रात में भी पैदल चल आसपास के गांवों में अजनबियों के घर जाना पड़ता था.

पति शराबी है तो उसी की आमदनी से पूरा घर चलता था. घर तो पक्का था पर ना उसका कोई दरवाज़ा था ना ही कोई शौचालय.

इसके बावजूद सर फ़क्र से ऊंचा था क्योंकि वो अपनी बेटी और दो बेटों के स्कूल का ख़र्च निकाल पा रही थी.

दिसंबर 2015 में पास के गांव का एक नौजवान लड़का गीता का पीछा करने लगा. उसने उसे पहली बार तब देखा था जब वो उसकी गर्भवती भाभी के चेकअप के लिए आती थी.

जब गीता ने उसे मना किया, वो उसे धमकी देने लगा. गीता के साथ काम करनेवाली उसकी दोस्त ख़ुशबू के मुताबिक एक बार उस नौजवान ने गीता का फोन खींच लिया और कहा, "तुम अकेले मिल गईं, तो छोड़ूंगा नहीं".

गीता को अंदेशा रहा होगा कि वो लाख उस नौजवान की अनचाही हरक़तों को रोकने की क़ोशिश करे और उसे मना करे, गांववाले उसे ही ज़िम्मेदार मानेंगे.

अगली बार जब उसे काम से उस नौजवान के गांव जाना पड़ा तब ख़ुशबू को कहा कि उसे अकेले जाने में डर है. ख़ुशबू फ़ौरन उसके साथ हो ली. गीता को कहा कि गांव के बुज़ुर्गों को सब बताए.

पर गीता नहीं मानी, उसे यक़ीन था कि कोई उसकी नहीं सुनेगा, बोली, "सब मुझ में ही ग़लती निकालेंगे".

कुछ दिन बाद जब दोनों सहेलियां बच्चों को पोलियो के टीके लगाने के लिए निकलीं, गीता ने ख़ुशबू को कहा कि उसके साथ "कुछ बहुत बुरा हुआ है".

जब ख़ुशबू ने और कुरेदा तब गीता ने बताया कि उस नौजवान और उसके तीन दोस्तों ने उसका पीछा किया और फिर उसके साथ "ज़बरदस्ती कर उसके कपड़े फाड़ दिए".

ख़ुशबू के मुताबिक उस व़क्त गीता बहुत परेशान तो थी पर अपनी जान लेने के बारे में नहीं सोच रही थी. ख़ुशबू ने उसे कहा भी था कि वो उसके साथ है.

ख़ुशबू के मुताबिक गीता तो पुलिस के पास जाना चाहती थी, कहती थी, "मैं उनकी शिकायत करूंगी, जिन्होंने मेरे साथ इतना बुरा किया उनके नाम मालूम करूंगी और गिरफ़्तार करवाकर ही दम लूंगी".

पर इससे पहले कि गीता पुलिस में जाने की हिम्मत जुटा पाती, उसके बलात्कार की वीडियो वॉट्सऐप पर भेजा जाने लेगा.

कुछ ही घंटों में औरतों के बीच दबी ज़बान में उसकी बात होने लगी और नौजवान हो या बुज़ुर्ग, सबके फ़ोन में देखा जाने लगा.

ख़ुशबू बताती हैं, "उसने मुझे फ़ोन किया और कहा कि सब पड़ोसी जानते हैं, घर से बाहर निकलना मुश्किल हो गया है."

गीता का डर, कि सब उसे ही नौजवान को 'अपनी ओर आकर्षित करने' का ज़िम्मेदार मानेंगे, सच साबित हुआ.

वो आख़िरी दिन बहुत बुरे थे. ख़ुशबू के मुताबिक गीता ठीक से खाना भी नहीं खा रही थी, "जिस दिन उसने अपनी जान ली, उससे एक दिन पहले वो गांव के डॉक्टर के पास गई और अपनी आपबीती बताई पर उसने लौटा दिया, कहा, 'घर जाओ और चुप रहो, सब तुम्हारी ही ग़लती है'."

वो गांव के पूर्व प्रधान के पास भी गई पर उसने भी कहा, "ये तुम्हारी ग़लती है, हम इसके बारे में क्या कर सकते हैं."

बस वो आख़िरी धक्का जैसा साबित हुआ.

अगली दोपहर गीता गांव के बाहर एक सड़क पर मिलीं. मुंह से झाग निकल रहा था.

पोस्टमार्टम में पाया गया कि मौत ज़हर खाने की वजह से हुई.

गीता का बलात्कार और उसे ही उसके लिए शर्मिंदा किया जाना एक अकेली घटना नहीं है. पिछले सालों में मोबाइल फ़ोन और 'चैट ऐप्स' देश के सबसे ग़रीब और पिछड़े इलाकों तक पहुंच गए हैं.

सामूहिक बलात्कार का फ़ोन पर वीडियो बनाना और 'मेसेजिंग' सेवाओं के ज़रिए उसे फैलाने के कई मामले सामने आए हैं.

हैदराबाद में तस्करी के ख़िलाफ़ मुहिम चला रही महिला सुनीता कृष्णनन ने हाल ही में सुप्रीम कोर्ट से इस मुद्दे से निपटने के लिए कड़े कदम उठाने के आदेश दिए जाने की अपील की थी.

सुनीता ने कोर्ट में दावा किया था कि उनके पास देशभर से ऐसे 90 वीडियो हैं.

सुप्रीम कोर्ट में वकील पवन दुग्गल ने बीबीसी से बातचीत में बताया कि अदालत इस जानकारी से हैरान थी और उसने दूरसंचार मंत्रालय को फ़ेसबुक और वॉट्सऐप के ज़रिए ऐसे वीडियो बांटे जाने के चलन के रोकथाम के लिए कदम उठाने को कहा.

दुग्गल ने कहा, "ऐसे मामलों की बात नहीं होती पर इसका मतलब ये नहीं कि सब सामान्य है, औरतों को हर व़क्त निशाना बनाया जा रहा है, और इससे अंदर ही अंदर एक बेचैनी फैल रही है."

ये बेचैनी पूरे देश में है. पर गांव के स्तर पर असली परेशानी अपराध कर रहे उन मर्दों से नहीं बल्कि उन औरतों से है जो नई तकनीक का इस्तेमाल घर के पुराने सीमित दायरे से बाहर निकलने के लिए कर रही हैं.

नई तकनीक का पारंपरिक मूल्यों पर ग़लत असर पड़ने का ऐसा डर है कि पंचायतों ने कई बार लड़कियों के मोबाइल फ़ोन इस्तेमाल करने पर पाबंदी तक लगाई है.

गीता के मामले की स्वायत्त जांच करनेवाली स्थानीय समाजसेवी रेहाना अदीब के मुताबिक ये विरोधाभास ही है कि सामूहिक बलात्कार के वीडियो चाहे मर्द बनाएं, पर नई तकनीक से जुड़ी शंकाओं का निशाना औरतें ही बनाई जाती हैं.

रेहाना कहती हैं, "जब समाज और परिवार, हमेशा इज़्ज़त और अच्छे चरित्र का भार औरतों के कंधे पर डालेगा और मर्दों को शराफ़त का कोई टेस्ट पास नहीं करना होगा तो मज़बूत और आज़ाद ख़्याल होने का साहस करनेवाली औरत कैसे बच पाएगी."

गीता की मौत के बाद आसपास के गांवों से 'आशा' जुटीं और विरोध प्रदर्शन किए. तीन आदमियों को गीता के बलात्कार और उसका वीडियो बनाने और फैलाने के जुर्म में गिरफ़्तार किया गया.

पर गीता के गांव में उसकी मौत पर नाराज़गी अब भी उसकी इज़्ज़त के सवाल के नीचे दबी है.

गीता के पति, जिसे वीडियो के बारे में पड़ोसियों से पता चला, के मन में भी संदेह है कि शायद गीता ने ही उन आदमियों को अपनी ओर आकर्षित करने के लिए कुछ किया होगा.

वो कहते हैं, "अगर उसने मुझे बताया होता तो मैं भी पूछता कि ये सब उसकी मर्ज़ी से हुआ था कि नहीं, औऱ फिर गांव के बड़े-बुज़ुर्गों के साथ बात कर हम तय करते कि क्या कदम उठाना चाहिए."

पति के हाव-भाव में कोई उत्तेजना नहीं है ना ही वो पुलिस से तेज़ कार्रवाई करने की मांग करते हैं.

जब बीबीसी ने गांव के डॉक्टर और पूर्व सरपंच से बात की, तब दोनों ने गीता के आरोप को ग़लत बताया. कहा कि उन्होंने कभी गीता को पुलिस के पास जाने से नहीं रोका बल्कि उनके मुताबिक आत्महत्या की वजह यही होगी कि वो ख़ुद से शर्मसार थी.

"दुनिया की नज़रों में गिरकर वो कैसे अपनी ज़िंदगी काटती?"

ऐसी ही सोच मामले की तहक़ीक़ात कर रहे इलाके के एसपी प्रदीप गुप्ता की थी.

उन्होंने कहा, "ये बहुत दुर्भाग्यपूर्ण घटना है, लगता है कि उस औरत ने बहुत सामाजिक दबाव महसूस किया और उसी वजह से अपनी जान ले ली."

कई लोगों के लिए गीता की मौत तो होनी ही थी. पर पीछे छूट गए लोगों के लिए उस हादसे से कुछ नहीं बदला.

ख़ास तौर पर गीता की बेटी के लिए.

वो कहती है, "अब भी बहुत मुश्किल है, जब भी मैं बाहर निकलती हूं, मेरी तरफ़ कोई तंज कस कहता है, 'तुम्हारी मां के साथ जो हुआ उससे तुम शर्मिंदा नहीं हो?'"

(पहचान छुपाने के लिए नाम बदले गए हैं.)

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