घर जलाने के मामले में निलंबित होंगे पुलिसवाले

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छत्तीसगढ़ सरकार ने 2011 में बस्तर के ताड़मेटला में 252 आदिवासियों के घर जलाने के मामले में सीबीआई की चार्जशीट में जिन विशेष पुलिस अधिकारियों का नाम आया है उन्हें निलंबित कर लाइन अटैच करने के निर्देश दिए हैं.

इसके अलावा सोमवार को बस्तर में राजनीतिक और सामाजिक कार्यकर्ताओं के पुतले जलाने वाले पुलिस जवानों के ख़िलाफ़ भी सरकार ने बस्तर संभाग के कमिश्नर को जांच सौंप दी है.

सोमवार को वर्दीधारी पुलिस के जवानों ने बस्तर के कई इलाक़ों में सामाजिक कार्यकर्ता स्वामी अग्निवेश, बेला भाटिया, हिमांशु कुमार, मालिनी सुब्रह्मण्यम, बस्तर के पूर्व विधायक और आदिवासी महासभा के महासचिव मनीष कुंजाम, आम आदमी पार्टी की नेता सोनी सोरी और दिल्ली विश्वविद्यालय की प्राध्यापिका नंदिनी सुंदर के ख़िलाफ़ नारेबाज़ी की थी और इनके पुतले जलाये थे.

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Image caption बस्तर में पुलिस जवानों ने सामाजिक कार्यकर्ताओं के पुतले जलाए थे.

पुलिस के ये जवान सुप्रीम कोर्ट में पेश सीबीआई की उस रिपोर्ट से नाराज़ थे, जिसमें बस्तर के आदिवासियों के ख़िलाफ़ हिंसा के लिए विशेष पुलिस अधिकारियों को ज़िम्मेदार बताया गया था.

पुलिस के ये जवान पुलिस की आलोचना करने वालों और अदालतों में मुक़दमा दायर करने वालों से नाराज़ थे.

ग़ौरतलब है कि मार्च 2011 में सुकमा ज़िले के ताड़मेटला, मोरपल्ली और तिम्मापुर में आदिवासियों के 252 घर जला दिये गये थे और तीन आदिवासियों की हत्या कर दी गई थी.

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इन गांवों में कुछ महिलाओं के साथ बलात्कार की घटनाएं भी सामने आई थीं. 26 मार्च 2011 को इस घटना को देखने के लिए जा रहे स्वामी अग्निवेश पर भी पुलिस संरक्षण में चलाये जा रहे सलवा जुडूम के लोगों ने कथित तौर पर हमला किया था.

इस मामले में तत्कालीन पुलिस अधिकारियों ने इन घटनाओं के लिए माओवादियों को ज़िम्मेदार ठहराया था.

दिल्ली विश्वविद्यालय की प्राध्यापिका नंदिनी सुंदर और सामाजिक कार्यकर्ता स्वामी अग्निवेश दोनों ने ही घटनाओं के लिए पुलिस को ज़िम्मेदार ठहराते हुये सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी. जिसके निर्देश पर सीबीआई ने जांच शुरू की थी.

शुक्रवार को सीबीआई की जांच के बाद सरकार ने स्वीकार किया कि इन घटनाओं को विशेष पुलिस अधिकारी और सलवा जुडूम के लोगों ने अंजाम दिया था.

इसके अलावा सीबीआई ने रायपुर की विशेष अदालत में आरोप पत्र भी पेश किया है.

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